RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

पितृ पक्ष 2026: इन चीजों की खरीदारी से करें परहेज, जानें क्या खरीदना माना जाता है शुभ

पितृ पक्ष 2026: इन चीजों की खरीदारी से करें परहेज, जानें क्या खरीदना माना जाता है शुभ

पितृ पक्ष 2026: इन चीजों की खरीदारी से करें परहेज, जानें क्या खरीदना माना जाता है शुभ
Visual Archive

पितृ पक्ष 2026: इन चीजों की खरीदारी से करें परहेज, जानें क्या खरीदना माना जाता है शुभ

Pitru Paksha 2026 Shopping Rules: पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान खान-पान, आचरण और खरीदारी को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं।

कई परिवार इस अवधि में नई और महंगी चीजें खरीदने से बचते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर तरह की खरीदारी को लेकर कोई सार्वभौमिक धार्मिक निषेध नहीं है; अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं में अंतर हो सकता है।

पितृ पक्ष 2026 कब तक रहेगा?

साल 2026 में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है, जबकि पितृ पक्ष का मुख्य क्रम 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।

इस दौरान कई लोग शुभ और मांगलिक कार्यों को टालकर पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य को प्राथमिकता देते हैं।

पितृ पक्ष में क्या नहीं खरीदना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में कुछ चीजों की खरीदारी से परहेज करने की परंपरा है। इनमें मुख्य रूप से ये चीजें शामिल हैं:

1. नए कपड़े

पितृ पक्ष को पितरों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित समय माना जाता है। इसलिए इस दौरान नए कपड़े खरीदने या नए वस्त्रों की खरीदारी करने से कई परिवार परहेज करते हैं।

2. सोने-चांदी के आभूषण

पितृ पक्ष में सोना, चांदी या महंगे आभूषण खरीदने से बचने की मान्यता भी प्रचलित है। हालांकि यह नियम सभी हिंदू परंपराओं में समान रूप से लागू नहीं है।

3. नया वाहन

नई कार, बाइक या अन्य वाहन खरीदने को भी इस अवधि में टालने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में नए शुभ कार्यों और नई शुरुआत के बजाय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा को प्राथमिकता दी जाती है।

4. जमीन या मकान

पितृ पक्ष में जमीन, मकान या किसी बड़ी संपत्ति की खरीदारी को भी कई लोग टालते हैं। खासकर ऐसे काम जिन्हें परिवार में शुभ या मांगलिक शुरुआत माना जाता है, उन्हें पितृ पक्ष के बाद करना पसंद किया जाता है।

5. लोहे का सामान

कुछ धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान लोहे से बनी वस्तुएं खरीदने से परहेज करने की बात कही जाती है। इसमें लोहे के बर्तन, औजार या अन्य सामान शामिल हो सकते हैं।

6. झाड़ू

पितृ पक्ष में झाड़ू खरीदने से बचने की मान्यता भी प्रचलित है। इसे धार्मिक और लोक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है।

7. शादी या मांगलिक कार्यों का सामान

पितृ पक्ष के दौरान शादी, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों से जुड़ी खरीदारी को भी कई परिवार टालते हैं। इसका कारण यह मान्यता है कि यह समय उत्सव के बजाय पितरों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित होता है।

8. जूते-चप्पल

कुछ लोक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान नए जूते-चप्पल खरीदने से भी परहेज करने की बात कही जाती है। इसे अनिवार्य शास्त्रीय नियम के बजाय एक प्रचलित धार्मिक मान्यता के रूप में समझना चाहिए।

पितृ पक्ष में किन चीजों की खरीदारी की जा सकती है?

पितृ पक्ष में जरूरत की सामान्य चीजें खरीदना हर परंपरा में निषिद्ध नहीं माना जाता। विशेष रूप से श्राद्ध और तर्पण से जुड़ी सामग्री खरीदना इस अवधि के धार्मिक कर्मों का हिस्सा है।

पितृ कर्म में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में परंपरा के अनुसार:

  • काले तिल
  • चावल
  • कुश
  • जौ
  • जल पात्र
  • पूजा सामग्री
  • धूप और दीप
  • फल आदि

शामिल हो सकते हैं।

इनमें से कौन-सी सामग्री आवश्यक है, यह परिवार की परंपरा और किए जाने वाले श्राद्ध कर्म पर निर्भर करता है।

क्या पितृ पक्ष में हर तरह की खरीदारी बंद कर देनी चाहिए?

नहीं। इसे समझना जरूरी है। पितृ पक्ष के दौरान हर तरह की खरीदारी पर रोक का कोई सामान्य नियम नहीं माना जाता। जरूरत की वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में कुछ विशेष वस्तुओं या शुभ खरीदारी को टालने की मान्यता जरूर मिलती है।

इसलिए केवल डर की वजह से जरूरी सामान खरीदना बंद करने की जरूरत नहीं है। यदि परिवार में कोई विशेष परंपरा चली आ रही है, तो उसका पालन किया जा सकता है।

पितृ पक्ष में किन कामों को प्राथमिकता दें?

पितृ पक्ष का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार:

  • पितरों का श्राद्ध करें
  • तर्पण करें
  • पिंडदान करें
  • ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं
  • अन्न और वस्त्र का दान करें
  • पंचबली की परंपरा का पालन करें
  • सात्विक भोजन करें

अमर उजाला की 2026 की जानकारी में भी पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और सात्विक आहार पर जोर दिया गया है।

पितृ पक्ष में खरीदारी को लेकर क्यों है ऐसी मान्यता?

पितृ पक्ष को धार्मिक परंपराओं में पूर्वजों के प्रति समर्पित समय माना जाता है। इसलिए इस दौरान भौतिक सुख-सुविधाओं और नई शुभ शुरुआत की बजाय श्राद्ध, तर्पण, दान और पितरों के स्मरण पर ध्यान देने की परंपरा विकसित हुई है।

इसी वजह से कुछ समुदायों और परिवारों में नए कपड़े, आभूषण, वाहन, संपत्ति या अन्य महंगी वस्तुओं की खरीदारी को पितृ पक्ष समाप्त होने तक टालने की मान्यता है।

हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के रूप में देखना चाहिए। सभी परिवारों में इनके नियम एक जैसे नहीं होते।

निष्कर्ष

पितृ पक्ष 2026 में कई परिवार खरीदारी और नए मांगलिक कार्यों को टालकर पितरों के श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य पर ध्यान देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नए कपड़े, आभूषण, वाहन, जमीन-मकान, लोहे का सामान और झाड़ू जैसी कुछ चीजों की खरीदारी से परहेज किया जाता है।

हालांकि हर खरीदारी पर रोक का कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। जरूरत की चीजें खरीदी जा सकती हैं और श्राद्ध कर्म से जुड़ी सामग्री की खरीदारी तो धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है।

पितृ पक्ष का मूल भाव डर नहीं, बल्कि पूर्वजों का स्मरण, सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई खरीदारी संबंधी बातें धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग परिवार, क्षेत्र और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं। जरूरी खरीदारी या किसी विशेष धार्मिक कर्म के संबंध में अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय आचार्य की सलाह को प्राथमिकता दें।

Religion World

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

September 28, 2026 • 6 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

पितृ पक्ष 2026: श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए कौन सा समय है शुभ? जानें 4 खास मुहूर्त

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान परिवार के…

Read now
Hinduism

गया में ही क्यों किया जाता है पिंडदान? गयासुर से लेकर भगवान श्रीराम तक, जानें इस पवित्र भूमि का धार्मिक महत्व

Gaya Pind Daan: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान…

Read now
Hinduism

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में ब्राह्मण भोज क्यों कराया जाता है? जानें धार्मिक महत्व और मान्यता

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इन दिनों परिवार अपने दिवंगत…

Read now