हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम, तपस्या और विवाह से जुड़ा हुआ है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, एक सवाल अक्सर कुंवारी लड़कियों के मन में भी आता है कि क्या अविवाहित कन्याएं हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।
हरतालिका तीज 2026 कब है?
साल 2026 में हरतालिका तीज का पर्व सोमवार, 14 सितंबर को मनाया जाएगा।
पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7:08 बजे से शुरू होगी और 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी।
पूजा के प्रमुख समय इस प्रकार बताए गए हैं:
- हरतालिका तीज: 14 सितंबर 2026, सोमवार
- प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 6:12 बजे से 7:06 बजे तक
- प्रदोष काल पूजा: शाम 6:27 बजे के बाद
पूजा के समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।
क्या कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?
जी हां, धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं।
इस व्रत को विशेष रूप से योग्य और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
इसी मान्यता के आधार पर अविवाहित लड़कियां भी माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं।
क्या कुंवारी लड़कियों के लिए निर्जला व्रत जरूरी है?
हरतालिका तीज का व्रत परंपरागत रूप से निर्जला व्रत माना जाता है, यानी इसमें अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता। लेकिन TV9 Hindi के अनुसार कुंवारी कन्याओं के लिए कठोर निर्जला व्रत करना अनिवार्य नहीं बताया गया है।
अगर स्वास्थ्य ठीक हो और व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला व्रत करना चाहे तो कर सकता है। वहीं स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर फलाहार या जल ग्रहण करके भी व्रत रखा जा सकता है।
व्रत रखते समय अपनी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। विशेष रूप से कमजोरी, बीमारी या किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा क्या है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। उन्होंने शिव को पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की।
कहा जाता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें उनके पिता की इच्छा के विरुद्ध एक वन में ले गईं, ताकि उनका विवाह भगवान विष्णु से न हो। वहीं माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग बनाया और भगवान शिव की आराधना करते हुए कठिन तप किया।
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कथा से हरतालिका तीज की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
‘हरतालिका’ शब्द को भी इसी कथा से जोड़ा जाता है। ‘हरत’ का संबंध हरण करने और ‘आलिका’ का संबंध सखी से बताया जाता है।
कुंवारी लड़कियां कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा?
अविवाहित कन्याएं भी इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं।
पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद साफ चौकी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। परंपरा के अनुसार बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर भी पूजा की जा सकती है।
पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को:
- फूल
- फल
- मिठाई
- अक्षत
- धूप
- दीप
- नैवेद्य
अर्पित करें।
इसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
क्या कुंवारी लड़कियां माता पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ा सकती हैं?
धार्मिक परंपरा के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर सकती हैं।
इसमें सिंदूर, चूड़ी और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल हो सकती है। इसका उद्देश्य माता पार्वती के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना और उनके आशीर्वाद की कामना करना होता है।
अविवाहित लड़कियों के लिए हरतालिका तीज के मुख्य नियम
हरतालिका तीज का व्रत रखते समय कुंवारी कन्याएं अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियमों का पालन कर सकती हैं।
1. व्रत का संकल्प लें
सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और भगवान शिव-माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
2. अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें
स्वास्थ्य ठीक हो तो निर्जला व्रत रखा जा सकता है। लेकिन कमजोरी या स्वास्थ्य समस्या होने पर फलाहार और जल ग्रहण करने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
3. शिव-पार्वती की पूजा करें
भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें और अच्छे जीवनसाथी की कामना करें।
4. माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
कुंवारी कन्याएं श्रद्धा के अनुसार माता पार्वती को चूड़ी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित कर सकती हैं।
5. अगले दिन पारण करें
परंपरा के अनुसार व्रत का पारण अगले दिन पूजा-अर्चना और प्रसाद ग्रहण करने के बाद किया जाता है।
हरतालिका तीज में किस भावना का महत्व है?
हरतालिका तीज में केवल व्रत रखना ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, बल्कि इसके पीछे श्रद्धा और संकल्प की भावना भी महत्वपूर्ण है।
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी यह कथा धैर्य, विश्वास और दृढ़ संकल्प का संदेश देती है। इसलिए कुंवारी कन्याएं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके अपने भविष्य के वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगती हैं।
क्या हरतालिका तीज का व्रत केवल शादीशुदा महिलाएं रख सकती हैं?
नहीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याएं भी रख सकती हैं।
सुहागिन महिलाएं जहां पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत कर सकती हैं।
स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
हरतालिका तीज का पारंपरिक स्वरूप कठिन निर्जला व्रत से जुड़ा है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना भोजन और पानी के रहना उचित नहीं हो सकता।
इसलिए कुंवारी कन्याओं को भी अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर व्रत का स्वरूप तय करना चाहिए। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत रख सकती हैं। माना जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इसलिए अविवाहित लड़कियां भी योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं।
कुंवारी कन्याओं के लिए कठोर निर्जला व्रत करना जरूरी नहीं बताया गया है। वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहार का विकल्प चुन सकती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, व्रत का संकल्प और माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जा सकती है।
हरतालिका तीज का मूल संदेश श्रद्धा, तपस्या, धैर्य और संकल्प से जुड़ा है।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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