RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

विश्व शांति केंद्र मिशन हेतु मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, दिल्ली (17–25 जनवरी 2026)

विश्व शांति केंद्र मिशन हेतु मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, दिल्ली (17–25 जनवरी 2026)

विश्व शांति केंद्र मिशन हेतु मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, दिल्ली (17–25 जनवरी 2026)
Visual Archive

विश्व शांति केंद्र मिशन हेतु मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, दिल्ली (17–25 जनवरी 2026)

भूमिका

भारतीय संस्कृति में रामकथा केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और मानवता का संदेश है। जब-जब समाज में अशांति, तनाव और वैचारिक भ्रम बढ़ता है, तब-तब रामकथा मार्गदर्शन का दीपक बनकर प्रकट होती है। इसी पावन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मोरारी बापू एक बार फिर दिल्ली की धरती पर ऐतिहासिक रामकथा का वाचन करने जा रहे हैं। यह दिव्य आयोजन 17 से 25 जनवरी 2026 तक भारत मंडपम, दिल्ली में आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य विश्व शांति केंद्र मिशन को सशक्त बनाना है।

मोरारी बापू: रामकथा की जीवंत परंपरा

मोरारी बापू आज केवल एक कथावाचक नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, करुणा और सद्भाव के संदेशवाहक हैं। उनके श्रीमुख से निकली रामकथा देश-विदेश में करोड़ों लोगों के जीवन को दिशा देती रही है। वे रामकथा को केवल धार्मिक मंच तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और मानव कल्याण से जोड़ते हैं। यही कारण है कि उनकी प्रत्येक कथा एक आंदोलन का रूप ले लेती है।

रामकथा का शुभारंभ(DAY1)

इस ऐतिहासिक रामकथा का विधिवत शुभारंभ अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। पूज्य कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज जी (पीठाधीश्वर, रमणरेती आश्रम), स्वामी चिदानंद सरस्वती जी (परमाध्यक्ष, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश) एवं स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज (आध्यात्मिक गुरु) की पावन उपस्थिति में रामकथा के मंच का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और भी बढ़ा दिया। मंच से प्रकट हुए इन दिव्य क्षणों ने सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत कर दिया।

ऐतिहासिक रामकथा का महत्व

दिल्ली के भारत मंडपम जैसे भव्य और राष्ट्रीय महत्व के स्थल पर आयोजित यह रामकथा अपने आप में ऐतिहासिक है। यह आयोजन दर्शाता है कि आज के आधुनिक युग में भी राम के आदर्श उतने ही प्रासंगिक हैं। रामकथा के माध्यम से सत्य, मर्यादा, सेवा और त्याग जैसे मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा। यह कथा न केवल धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि युवाओं और समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

रामकथा (DAY2)

रामकथा के द्वितीय दिवस का आयोजन अत्यंत गरिमामयी और प्रेरणादायी रहा। इस अवसर पर माननीय विजेंद्र गुप्ता जी, स्पीकर, दिल्ली विधानसभा की विशेष उपस्थिति रही। उनके साथ आचार्य लोकेश जी एवं स्वामी शैलेंद्र जी (आध्यात्मिक गुरु) की उपस्थिति ने कार्यक्रम को वैचारिक और आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। रामकथा का दिव्य वाचन पूज्य मोरारी बापू के श्रीमुख से संपन्न हुआ, जिसमें उन्होंने श्रीराम के आदर्शों, करुणा और मर्यादा के संदेश को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। द्वितीय दिवस की कथा ने श्रोताओं के हृदय में शांति, सद्भाव और आत्मचिंतन की भावना को और अधिक सशक्त किया।

विश्व शांति केंद्र मिशन का उद्देश्य

इस रामकथा का मूल उद्देश्य विश्व शांति केंद्र मिशन को बल देना है। वर्तमान समय में जब विश्व युद्ध, हिंसा, मानसिक तनाव और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब रामकथा शांति का मार्ग दिखाती है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम, करुणा और धर्म का पालन कैसे किया जाए। मोरारी बापू इसी संदेश को कथा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं।

कथा के दौरान मिलने वाला आध्यात्मिक अनुभव

रामकथा के नौ दिनों में श्रोता केवल कथा नहीं सुनते, बल्कि आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। भजन, चौपाइयाँ, दोहे और जीवन से जुड़े प्रसंग श्रोताओं के हृदय को छू लेते हैं। यह कथा मन को शांत करती है, विचारों को सकारात्मक बनाती है और जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। परिवार सहित इस कथा में सम्मिलित होना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संस्कारों का बीजारोपण है।

दिल्ली के लिए विशेष अवसर

राजधानी दिल्ली में इस प्रकार का आध्यात्मिक आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करता है। भारत मंडपम में आयोजित यह रामकथा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बाँधेगी। यह आयोजन यह भी दर्शाता है कि आध्यात्म और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं।

उपसंहार

17 से 25 जनवरी 2026 तक आयोजित मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व शांति, मानवता और भारतीय संस्कृति का उत्सव है। यह रामकथा हमें अपने भीतर झाँकने, अपने कर्तव्यों को समझने और समाज में प्रेम व सद्भाव फैलाने की प्रेरणा देती है। जो भी श्रद्धालु इस कथा में सम्मिलित होंगे, वे निश्चित रूप से आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ लौटेंगे।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

January 17, 2026 4 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

हिंदू धर्म के 16 संस्कार: जीवन को पवित्र और अनुशासित बनाने वाली सनातन परंपरा

हिंदू धर्म के 16 संस्कार सनातन धर्म में मनुष्य का जीवन केवल जन्म और मृत्यु तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि उसे एक आध्यात्मिक यात्रा समझा गया है।…

Read now
Hinduism

भारत को आध्यात्मिक देश क्यों कहा जाता है?

भारत को विश्वभर में केवल एक भौगोलिक राष्ट्र के रूप में नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक चेतना की भूमि के रूप में पहचाना जाता है। यहाँ की संस्कृति, परंपराएँ…

Read now
Hinduism

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? जानिए इस अग्नि पर्व का रहस्य

भूमिका भारत विविधताओं का देश है, जहाँ हर मौसम और फसल के साथ एक पर्व जुड़ा हुआ है। लोहड़ी उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में…

Read now