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क्या ज्योतिष धर्म का हिस्सा है?

क्या ज्योतिष धर्म का हिस्सा है?

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क्या ज्योतिष धर्म का हिस्सा है?

सारांश

यह लेख बताता है कि ज्योतिष और आस्था का संबंध होते हुए भी ज्योतिष स्वयं कोई धर्म नहीं, बल्कि समय और जीवन को समझने की एक ज्ञान-प्रणाली है। हिंदू परंपरा में इसका उपयोग मुहूर्त और संस्कारों में होता है, जबकि अन्य धर्मों में इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है।

ज्योतिष और धर्म का रिश्ता

अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या ज्योतिष धर्म का हिस्सा है या यह केवल एक परंपरा है। कई धार्मिक कार्यों में ज्योतिष का प्रयोग होता है, जिससे भ्रम पैदा होता है कि ज्योतिष और धर्म एक ही हैं। सच्चाई इससे कहीं अधिक गहरी और संतुलित है।

ज्योतिष और धर्म का संबंध

ज्योतिष स्वयं कोई धर्म नहीं है।
यह एक ज्ञान प्रणाली है, जो समय, ग्रहों और मानव जीवन के संबंध को समझने का प्रयास करती है।

धर्म जहाँ

  • आस्था

  • नैतिकता

  • ईश्वर

से जुड़ा होता है, वहीं ज्योतिष

  • गणना

  • निरीक्षण

  • अनुभव

पर आधारित होता है।

हिंदू धर्म में ज्योतिष

हिंदू परंपरा में ज्योतिष को विशेष स्थान मिला है।
विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश और मुहूर्त जैसे संस्कारों में इसका प्रयोग होता है।

वेदों में ज्योतिष को

नेत्र कहा गया है — जो समय को देखने में सहायता करता है।

अन्य धर्मों में ज्योतिष

  • इस्लाम में भविष्यवाणी पर आधारित ज्योतिष को स्वीकार नहीं किया गया।

  • ईसाई धर्म में भी इसे लेकर मतभेद रहे हैं।

  • बौद्ध और जैन धर्म में समय और कर्म पर अधिक बल दिया गया है।

इससे स्पष्ट है कि ज्योतिष को हर धर्म ने अपने-अपने दृष्टिकोण से देखा है।

धर्म, परंपरा और विश्वास

ज्योतिष धर्म का मूल सिद्धांत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा है, जो समय के साथ धर्मों से जुड़ गई।

ज्योतिष को धर्म समझना या धर्म का अनिवार्य अंग मानना उचित नहीं। यह एक मार्गदर्शक विद्या है, जो सही उपयोग पर सहायक और गलत उपयोग पर भ्रम पैदा कर सकती है।

निष्कर्ष

ज्योतिष और आस्था को एक साथ देखने का अर्थ यह नहीं कि ज्योतिष धर्म का मूल सिद्धांत है। ज्योतिष एक मार्गदर्शक विद्या है—सही उपयोग में सहायक, और अंध-विश्वास बन जाए तो भ्रम पैदा कर सकती है। इसलिए इसे धर्म का अनिवार्य अंग मानने के बजाय संतुलित समझ के साथ अपनाना अधिक उचित है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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January 6, 2026 2 min read
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