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नवरात्रि के चौथे दिन की देवी: माँ कुष्मांडा के रूप और महत्व को जानें

नवरात्रि के चौथे दिन की देवी: माँ कुष्मांडा के रूप और महत्व को जानें

नवरात्रि के चौथे दिन की देवी: माँ कुष्मांडा के रूप और महत्व को जानें
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नवरात्रि के चौथे दिन की देवी: माँ कुष्मांडा के रूप और महत्व को जानें

मां कुष्मांडा : नवरात्रि के चौथे दिन की देवी

नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। उन्हें सृष्टि की जननी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है। भक्त इस दिन विशेष श्रद्धा के साथ व्रत, पूजा, मंत्र जाप और आरती करते हैं।

कुष्मांडा देवी, मां दुर्गा के नौ रूपों में से चौथे रूप के रूप में पूजी जाती हैं। माना जाता है कि उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मांड की रचना की, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है।

देवी कुष्मांडा का रूप और स्वरूप

देवी का यह स्वरूप अत्यंत दिव्य, तेजस्वी और कल्याणकारी माना जाता है। उन्हें सात घोड़ों वाले रथ पर आरूढ़ दिखाया जाता है। उनके हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित होते हैं, जिनसे वे दुष्टों का संहार करती हैं। उनका मुखमंडल सौम्य और आभायुक्त है, जो शक्ति, संतुलन और शांति का प्रतीक माना जाता है।

मां कुष्मांडा का धार्मिक महत्व

सृष्टि की जननी

देवी कुष्मांडा को ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनके दिव्य तेज से ही सृष्टि में प्रकाश और जीवन का संचार हुआ।

दुष्टों का संहार

यह स्वरूप दुष्टों और राक्षसों का नाश करने वाला माना जाता है। देवी अपने अस्त्रों से अधर्म का विनाश करती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं।

आध्यात्मिक ऊर्जा

उनकी पूजा से साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। यह आराधना मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आंतरिक संतुलन प्रदान करने वाली मानी जाती है।

आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि

मान्यता है कि देवी की कृपा से आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। उनकी उपासना नकारात्मकता को दूर कर जीवन में शुभता लाने वाली मानी जाती है।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि

व्रत रखने वाले भक्त इस दिन सात्विक भोजन का सेवन करते हैं, जैसे फल, मेवा और दूध। पूजा के समय भक्त फल और पुष्प अर्पित करते हैं। इस दिन मां दुर्गा की आरती और देवी स्तुति का विशेष महत्व माना जाता है।

मंत्र जाप के रूप में भक्त श्रद्धा से यह मंत्र बोलते हैं —

ॐ कुष्माण्डायै नमः॥

देवी कुष्मांडा की विशेषताएं

शक्ति और संजीवनी

इस स्वरूप की पूजा से जीवन में नई ऊर्जा और शक्ति का संचार होता है। यह शक्ति मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूपों में लाभकारी मानी जाती है।

साहस और संरक्षण

देवी का यह स्वरूप साहस, सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक है। भक्त उनकी आराधना से भय और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं।

चौथे दिन का विशेष महत्व

नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा में इस स्वरूप का विशेष स्थान है। इस दिन की उपासना साधक को आत्मबल, शांति और सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाली मानी जाती है।

मां कुष्मांडा के मंत्र

ॐ देवी कुष्माण्डायै नमः॥
ॐ क्लीं कुष्माण्डायै नमः॥

मां कुष्मांडा की कथा

कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब देवी ने अपने तेज और शक्ति से ब्रह्मांड में प्रकाश फैलाया। उनका दिव्य प्रकाश पूरे सृष्टि मंडल को आलोकित करता है और जीवन को ऊर्जा प्रदान करता है। इसी कारण उन्हें आदिशक्ति और सृष्टि की जननी के रूप में स्मरण किया जाता है।

नवरात्रि के चौथे दिन भक्त विशेष रूप से अपने दुखों से मुक्ति, स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि की कामना से उनकी पूजा करते हैं।

मां की आराधना से जीवन में ऊर्जा, साहस, संतुलन और सकारात्मकता का संचार होता है। उनकी कृपा से नकारात्मक भाव दूर होते हैं और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए नवरात्रि के चौथे दिन उनकी पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां कुष्मांडा की पूजा नवरात्रि के किस दिन की जाती है?

मां कुष्मांडा की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है।

मां कुष्मांडा को किस रूप में पूजा जाता है?

मां कुष्मांडा को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप और सृष्टि की जननी के रूप में पूजा जाता है।

मां कुष्मांडा का मंत्र क्या है?

मां कुष्मांडा का प्रमुख मंत्र है — ॐ देवी कुष्माण्डायै नमः॥

मां कुष्मांडा की पूजा का क्या महत्व है?

मां कुष्मांडा की पूजा से ऊर्जा, स्वास्थ्य, साहस, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता प्राप्त होने की मान्यता है।

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  ~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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April 1, 2025 4 min read
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