प्रत्येक वर्ष जनवरी माह की 12 तारीख को महर्षि महेश योगी जयंती के रूप में मनाया जाता है. दिव्य विभूति महर्षि महेश योगी ने वैदिक ज्ञान से संपूर्ण विश्व को आलौकित किया और उनके हृदयग्राही सरस प्रवचनों ने हिन्दुस्तान के जबलपुर से लेकर हॉलैण्ड तक कई शहरों के श्रोताओं को सम्मोहित किेया.
महर्षि महेश योगी , जिन्होंने भारत में ही नहीं, अपितु विश्व-भर में उन्होंने इस ध्यान योग के साथ-साथ शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना भी की. इन शैक्षणिक संस्थाओं में भारतीय संस्कृति के धर्म, आध्यात्म के साथ-साथ जीवन के व्यावहारिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है.
ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन के पश्चिमी देशों के प्रसारक

महर्षि महेश योगी ने जिस ध्यान योग को पूरे विश्व में फैलाया, उसके द्वारा बुद्धि, ज्ञान तथा योग्यता की क्षमताओं में वृद्धि होती है. आत्मा को शक्ति और आनंद का सागर बताते हुए उन्होंने ध्यान को ही प्रमुख माना है. विश्वशांति, विश्वबंधुत्व, पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति, वैदिक शिक्षा का प्रचार, भावातीत ध्यान के महत्त्व को संसार में फैलाना उनका प्रमुख उद्देश्य था.
महर्षि महेश योगी का जीवन परिचय
जबलपुर में जन्मे महर्षि योगी बचपन में महेश श्रीवास्तव के नाम से जाने जाते थे. उनके गुरु स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती शंकराचार्य थे. उनके देहांत के बाद महेश श्रीवास्तव महर्षि महेश योगी कहलाये. गुरु की आज्ञानुसार उन्होंने समस्त विश्व में वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने का बीड़ा उठाया. हिमालय के बद्रीकाश्रम तथा ज्योर्तिमठों में रहकर ध्यान योग की साधना की. दक्षिण भारत में उन्होंने आध्यात्मिक विकास केंद्र की स्थापना की. दिसंबर, 1957 को आध्यात्मिक पुनरुत्थान कार्यक्रम शुरू किया. 1960 में पश्चिमी देशों की यात्रा पर निकल पड़े. वहां रहकर उन्होंने अमेरिका में भावातीत के रूप में मानवीय चेतना के विस्तार का कार्य किया.
मेरू महर्षि यूरोपियन रिसर्च यूनिवर्सिटी की स्थापना

वे फरवरी 2008 में पंचतत्त्व में विलीन हो गए. विश्व-भर में भारतीय वैदिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने में महर्षि महेश योगी का नाम हमेशा अमर रहेगा.
महेश योगी ने जारी करी थी राम नाम की मुद्रा

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