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दुर्गापूजा 2020 : आरंभ हुयी दुर्गापूजा, जानें सिंदूर खेला और दुर्गा बलिदान का महत्व

दुर्गापूजा 2020 : आरंभ हुयी दुर्गापूजा, जानें सिंदूर खेला और दुर्गा बलिदान का महत्व

दुर्गापूजा 2020 : आरंभ हुयी दुर्गापूजा, जानें सिंदूर खेला और दुर्गा बलिदान का महत्व
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दुर्गापूजा 2020 : आरंभ हुयी दुर्गापूजा, जानें सिंदूर खेला और दुर्गा बलिदान का महत्व

बंगाल, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में दुर्गापूजा का प्रारंभ हो चुका है . हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के समय में ही दुर्गापूजा का उत्सव भी मनाया जाता है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से दुर्गापूजा का शुभारंभ होता है और दशमी के दिन समापन होता है. शारदीय नवरात्रि की षष्ठी से दुर्गापूजा का आगाज होता है.



पांच दिन मनाई जाती है दुर्गापूजा

दुर्गापूजा 5 दिन षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी तक मनाया जाता है. दुर्गापूजा खासतौर पर बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, त्रिपुरा, पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत देश के अन्य भागों में मनाया जाता है.

दुर्गापूजा में मां  दुर्गा के साथ इनकी भी होती है पूजा

नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के ही नवस्वरुपों की पूजा की जाती है. उसी में षष्ठी तिथि से दुर्गा पूजा के प्रारंभ से मां दुर्गा के साथ माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है. दुर्गापूजा के प्रथम दिन मां की मूर्ति स्थापित की जाती है, प्राण प्रतिष्ठा होती है और 5वें दिन उनका विसर्जन किया जाता है.

यह भी पढ़ें-Dussehra 2020: जानिए दशहरे पर क्यों माना जाता है नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ

दुर्गा बलिदान

दुर्गापूजा 2020 : आरंभ हो गई है दुर्गापूजा,  जानें सिंदूर खेला और दुर्गा बलिदान का महत्व

दुर्गा बलिदान का तात्पर्य दुर्गापूजा के समय दी जाने वाली पशु बलि से है. यह हमेशा नवरात्रि की नवमी तिथि को दी जाती है. बलिदान के लिए अपराह्न का समय अच्छा माना गया है. हालांकि अब लोग पशु बलि की जगह सब्जियों के साथ सांकेतिक बलि देते हैं.



सिंदूर खेला या सिंदूर उत्सव

दुर्गापूजा 2020 : आरंभ हो गई है दुर्गापूजा,  जानें सिंदूर खेला और दुर्गा बलिदान का महत्व

जिस दिन मां दुर्गा को विदा किया जाता है यानी जिस दिन प्रतिमा विसर्जन के लिए ले जायी जाती है, उस दिन बंगाल में सिंदूर खेला या सिंदूर उत्सव होता है. यह विदाई का उत्सव होता है. इस दिन सुहागन महिलाएं पान के पत्ते से मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं. उसके बाद एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और उत्सव मनाती हैं. एक दूसरे के सुहाग की लंबी आयु की शुभकामनाएं भी देती हैं. ऐसी भी मान्यता है कि मां दुर्गा 9 दिन तक मायके में रहने के बाद ससुराल जा रही हैं, इस अवसर पर सिंदूर उत्सव मनाया जाता है.

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October 23, 2020 2 min read
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