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कृष्ण जन्माष्टमी : जानिये क्या हैं जन्माष्टमी व्रत के नियम

कृष्ण जन्माष्टमी : जानिये क्या हैं जन्माष्टमी व्रत के नियम

कृष्ण जन्माष्टमी : जानिये क्या हैं जन्माष्टमी व्रत के नियम
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कृष्ण जन्माष्टमी : जानिये क्या हैं जन्माष्टमी व्रत के नियम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बालगोपाल की पूजा और सेवा करने से संतान प्राप्ति से लेकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. लेकिन इससे पहले ये जान लेना जरूरी है कि बालगोपाल की पूजा की विधि-विधान कैसे होना चाहिए. चलिए जानते हैं जन्माष्टमी व्रत से जुड़े नियम-



सुबह जल्दी उठकर करें संकल्प

जन्माष्टमी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत या पूजा का संकल्प लें. दिन भर जलाहार या फलाहार ग्रहण करें, सात्विक रहें.

गंगाजल से धो लें हाथ

पूजा से पहले स्नान जरूर करें. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विधान है. स्नान के बाद भगवान को वस्त्र पहनाएं. ध्यान रहें कि वस्त्र नए हो. इसके बाद उनका श्रृंगार करें. भगवान को फिर भोग लगाएं और कृष्ण आरती गाएं. इसके बाद गणेश पूजन करना न भूलें.

इस मंत्र के जाप से पूरी होगी मनोकामना

भगवान श्रीकृष्ण के मंत्र ‘कृं कृष्णाय नम:’ का जाप करते रहना चाहिए. मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें. पूजन में श्रीकृष्ण को दूर्वा, कुमकुम, चावल, अबीर, सुगंधित फूल और शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए.

यह भी पढ़ें-कृष्ण जन्माष्टमी: जानिये क्यों जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण को लगाते हैं 56 भोग

करें प्रभु श्रीकृष्ण का श्रृंगार

श्री कृष्ण के श्रृंगार में फूलों का खूब प्रयोग करें. पीले रंग के वस्त्र, गोपी चन्दन और चन्दन की सुगंध से इनका श्रृंगार करें. श्री कृष्ण के श्रृंगार में इस बात का ध्यान रखें कि वस्त्र से लेकर गहनों तक कुछ भी काला नहीं होना चाहिए. काले रंग का प्रयोग बिल्कुल न करें. वैजयंती के फूल अगर कृष्ण जी को अर्पित किए जाएं तो सर्वोत्तम होगा.

प्रसाद

जन्माष्टमी के प्रसाद में पंचामृत जरूर अर्पित करें. उसमें तुलसी दल भी जरूर डालें. मेवा, माखन और मिसरी का भोग भी लगाएं. कहीं-कहीं धनिये की पंजीरी भी अर्पित की जाती है. इस दिन श्रीकृष्ण को पूर्ण सात्विक भोजन अर्पित किए जाते हैं, जिसमें तमाम तरह के व्यंजन हों.



मूर्ति का चुनाव

सामान्यतः जन्माष्टमी पर बाल कृष्ण की स्थापना की जाती है. आप अपनी मनोकामना के आधार पर जिस स्वरूप को चाहें स्थापित कर सकते हैं. प्रेम और दाम्पत्य जीवन के लिए राधा-कृष्ण की, संतान के लिए बाल कृष्ण की और सभी मनोकामनाओं के लिए बंसी वाले कृष्ण की स्थापना करें. इस दिन शंख और शालिग्राम की स्थापना भी कर सकते हैं.

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August 12, 2020 2 min read
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