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ब्रह्म पुराण: जानिये क्यों कहलाया ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीनतम पुराण

ब्रह्म पुराण: जानिये क्यों कहलाया ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीनतम पुराण

ब्रह्म पुराण: जानिये क्यों कहलाया ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीनतम पुराण
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ब्रह्म पुराण: जानिये क्यों कहलाया ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीनतम पुराण

पुराण साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य कीअमूल्य निधि है। इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मिलती हैं। अठारह पुराणों में अलग-अलग देवी-देवताओं को केन्द्र में रखकर पाप और पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म और अकर्म की गाथाएं कही गई हैं।



इस रूप में पुराणों का पठन और आधुनिक जीवन की सीमा में मूल्यों की स्थापना आज के मनुष्य को एक निश्चित दिशा दे सकता है।

निरन्तर द्वन्द्व और निरन्तर द्वन्द्व से मुक्ति का प्रयास मनुष्य की संस्कृति का मूल आधार है। पुराण हमें आधार देते हैं। इसी उद्देश्य को लेकर रिलीजन वर्ल्ड के पाठकों के लिए, प्रस्तुत है पुराण-साहित्य की श्रृंखला में ‘ब्रह्म पुराण’।

पुराणों में महापुराण 

ब्रह्म पुराण पुराणों में महापुराण है। कुछ स्थानों पर इसे प्रथम पुराण भी माना जाता है। इस पुराण में सूर्य-चन्द्र वंशों के विषय में वर्णन किया गया है।

ब्रह्मपुराण में 246 अध्याय, तथा इन में 14000 श्लोक हैं। इस पुराण में सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी के महानता के अतिरिक्त सृष्टि की उत्पत्ति, पृथ्वी पर गंगा का अवतरण तथा रामायण और कृष्ण अवतार की कथाओं का भी विवरण किया गया है। आप इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिंधु घाटी की सभ्यता तक कि कुछ ना कुछ जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

साथ ही इसमें ज्ञान-विज्ञान की अनेक बातों का समावेश करके मोक्ष, धर्म, ब्रह्म स्वरूप और योग-विधि को विस्तार से बताया गया है। वह वैष्णव पुराणों में प्रमुख माना जाता है।

सृष्टि उत्पत्ति की कथा 

शुरू में सृष्टि की उत्पत्ति की कथा है। मनु और शतरुपा के पुत्र उत्पत्ति का जिक्र है। आगे जाकर राजा पृथु, प्रजापति दक्ष आदि के वंश का वर्णन किया है। राजा सगर की कथा है। आगे जाकर ययाति के वंश की कथा है।

ब्रह्म पुराण में बताया है कि केवल भारतभूमि ही कर्मभूमि है। यहां जन्म प्राप्त होना सैकड़ों वर्षों के पुण्यफल का प्रतीक है। पृथ्वी के नीचे अतल, वितल नितल, सुतल तलातल, रसातल और पाताल ये सात लोक हैं। आगे दक्ष प्रजापति की कथा है जिसे भगवान् शंकर ने मार डाला था।

ब्रह्म पुराण में विष्णु को ही मूल प्रकृति माना है। सूर्य देव के बारह पर्याय माने हैं जिसका विस्तार से इसमें वर्णन है। चक्र तीर्थ में भी स्नान और दान आदि शुभ करने से विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इसमें विश्वधर नामक एक सम्पन्न वणिक् की कथा है।

यह भी पढ़ें- हिंदू धर्म के सभी 18 पुराण : विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ

इसमें जन स्थान तीर्थ से लेकर कई तीर्थों का जिक्र है। गौतमी गंगा की पवित्रता के बारे में बताया गया है जिसे राम द्वारा अपनी पत्नी सीता के साथ पितरों का तर्पण करने से विश्वमित्र तीर्थ के नाम से पुकारा जाता है।

इसमें महामुनि कण्ड की विस्तार से कथा है। मुनियों ने कृच्छ साधना की जिससे इन्द्र भयभीत हो गए। उनकी तपस्या भंग करने के लिए उन्होंने प्रम्लोचा सर्वसुन्दरी को भेजा। मुनि की साधना भंग करने में वह सफल रही और वह उनके साथ 907 वर्ष 6 महीने और 3 दिन रही। मुनि को बाद में अपने कम-कर्तव्य का ज्ञान हुआ और उन्होंने प्रम्लोचा को धिक्कारते हुए निकाल दिया।

इसमें कालनेमि जैसे राक्षसों, धेनुक, प्रलम्ब, नरकासुर और केसी के बारे में जिक्र है। कंस की कथा का विस्तार से वर्णन है। कृष्ण व बलराम के जन्म की कथा से लेकर कंस की मृत्यु तक का वर्णन है।

इसमें ब्रह्मयोनि से पतन की स्थितियों का उल्लेख किया गया है। जिन अनुष्ठानों से देवलोक प्राप्त होता है, उसका वर्णन है। आगे अंत में आग्नीघ्र नाम के शासक व उसके पौत्र धर्माराम की कथा है।

पञ्च महाभूतों की जानकारी 

इसमें विद्या व अविद्या के स्वरूप का वर्णन है। योगाभ्यास के विषय के बारे में बताया है। पांच महाभूतों की विद्या के बारे में बताया है। योग-साधना को सर्वोत्तम माना है। इस पुराण के श्रवण से सभी मनोरथ पूरे होते हैं। रोगी रोगमुक्त हो जाता है। यह हर प्रकार से उद्धार कराने वाला महान पुराण है। इसका पठन-पाठन और सुनना-सुनाना प्रत्येक मनुष्य का धर्म है।

ब्रह्म पुराण में ज्ञान-विज्ञान की अनेक बातों का समावेश करके मोक्ष-धर्म, ब्रह्म का स्वरूप और योग-विधि को विस्तार से बताया गया है। सांख्य और योग दर्शन की व्याख्या करके मोक्ष–प्राप्ति के उपायों पर प्रकाश डाला गया है।



ब्रह्म पुराण को कुछ विद्वान् पांचवां पुराण भी मानते हैं। पर इस पुराण का महत्त्व अधिक है। यह वैष्णव पुराणों में प्रमुख माना गया है।

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June 30, 2020 4 min read
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