RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

संकष्टी चतुर्थी: यह व्रत करता है हर कष्ट को दूर, जानिये पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी: यह व्रत करता है हर कष्ट को दूर, जानिये पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी: यह व्रत करता है हर कष्ट को दूर, जानिये पूजा विधि
Visual Archive

संकष्टी चतुर्थी: यह व्रत करता है हर कष्ट को दूर, जानिये पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी व्रत हर महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को किया जाता है। इस बार यह व्रत 8 जून, सोमवार को किया जा रहा है।



भगवान गणेश हर विघ्न को हर लेते हैं इसलिए विघ्नहर्ता कहलाते हैं। हर तरह के संकट से छुटकारा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश और चतुर्थी देवी की पूजा की जाती है।

इनके साथ ही रात को चंद्रमा की पूजा और दर्शन करने के बाद व्रत खोला जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत करने से हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्य, समृद्धि और संतान सुख मिलता है।

यह भी पढ़ें-जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव 2020 : कैसे निकलेगी यात्रा ?

संकष्टी चतुर्थी और गणेश पूजा
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हरने वाली चतुर्थी। संकष्टी संस्कृत भाषा से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ है कठिन समय से मुक्ति पाना। इस दिन भक्त अपने दुखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति जी की आराधना करते हैं।

गणेश पुराण के अनुसार चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना फलदायी होता है। इस दिन उपवास करने का और भी महत्व होता है।

भगवान गणेश को समर्पित इस व्रत में श्रद्धालु अपने जीवन की कठिनाइयों और बुरे समय से मुक्ति पाने के लिए उनकी पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं। इस दिन भगवान गणेश का सच्चे मन से ध्यान करने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और लाभ प्राप्ति होती है।

पूजन विधि

इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

रविवार होने से इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनना भी शुभ माना जाता है।

ग्रंथों में बताया है कि व्रत और पर्व पर उस दिन के हिसाब से कपड़े पहनने से व्रत सफल होता है।

स्नान के बाद गणपति जी की पूजा की शुरुआत करें।

गणपति जी की मूर्ति को फूलों से अच्छी तरह से सजा लें।

पूजा में तिल, गुड़, लड्डू, फूल, तांबे के कलश में पानी, धूप, चंदन, प्रसाद के तौर पर केला या नारियल रखें।

संकष्टी को भगवान गणपति को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं।



शाम को चंद्रमा निकलने से पहले गणपति जी की पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें।

[video_ads]

You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

June 7, 2020 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

भगवान के कई रूप क्यों होते हैं? 

भगवान के कई रूप क्यों होते हैं?  भारत की धार्मिक परंपराएँ अत्यंत समृद्ध, विविध और रहस्यमय हैं। यहाँ एक ईश्वर को अनेक रूपों में पूजने की अनोखी परंपरा…

Read now
Hinduism

संकष्टी चतुर्थी: जानें महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है और आज श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। धार्मिक…

Read now
Hinduism

हिंदू धर्म के सभी 18 पुराण : विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ

पुराण शब्द का अर्थ है प्राचीन कथा। पुराण विश्व साहित्य के प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता कि बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव…

Read now