हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इसे त्रयोदशी प्रदोष व्रत भी कहते हैं । जब यह प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। 21 मार्च को शनि प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।
शास्त्रों में शनि प्रदोष का विशेष महत्व होता है। शनि प्रदोष व्रत में शनि भगवान की पूजा होती है। जिन जातकों की कुंडली में शनि से संबंधित किसी तरह का दोष रहता है उनके लिए यह व्रत दोषों को दूर करने में मदद मिलती है।
शनि प्रदोष व्रत में शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काला तिल, काले कपड़े, सरसों का तेल, उड़द दाल अर्पित की जाती है। प्रदोष व्रत भगवान शिव और पार्वती की पूजा से जुड़ा व्रत का फल प्रत्येक वार के हिसाब से अलग-अलग मिलता है।
शनिवार के दिन किये जाने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम् कहा जाता है। इस दिन इस पावन व्रत को पुत्र की कामना से किया जाता है।
यह भी पढ़ें-पापमोचनी एकादशी: पढ़िए पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने के लिए जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें और भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।
You can send your stories/happenings here: info@religionworld.in
Editorial Review Note
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
