माघ मास की पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा मनाई जाती है। 27 नक्षत्रो में मघा नक्षत्र के नाम से “माघ पूर्णिमा” की उत्पत्ति होती है। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व बताया गया है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन जो भी जातक गंगा स्नान करते है तथा उसके बाद जप और दान करते है उन्हें सांसारिक बंधनो से मुक्ति मिलती है।
यह स्नान सम्पूर्ण माघ मास में चलता है अर्थात पौष मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक होता है। सम्पूर्ण मास में गंगा स्नान करने का विशेष महत्त्व है न की केवल पूर्णिमा के दिन। यदि आप सम्पूर्ण मास में स्नान न कर सके, तो तीन दिन अथवा एक दिन माघ स्नान अवश्य ही करना चाहिए। जो जातक पूरे महीने गंगा स्नान करता वह इसी जन्म में मुक्ति का भागीदार होता है। त्रिवेणी स्नान करने का अंतिम दिन माघ पूर्णिमा ही है। कहा जाता है कि माघ स्नान करने वाले व्यक्ति पर भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर धन-धान्य, सुख-समृद्धि तथा संतान एवं मुक्ति प्रदान करते हैं।
माघ पूर्णिमा का महत्व

जो जातक चिरकाल तक स्वर्गलोग में रहना चाहते हैं । उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए।
स्वर्गलोके चिंर वासो येषां मनसि वर्तते |
यत्र क्वापि जले तैस्तु स्नातव्यं मृगभास्करे॥
माघ पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्त्व

ज्योतिषाचार्य आलोक आगे कहते हैं कि जिस जातक की जन्मकुंडली में चन्द्रमा नीच का है तथा मानसिक संताप प्रदान कर रहा है तो उसे सम्पूर्ण मास गंगा जल से स्नान करना चाहिए तथा अंतिम दिन दान करना चाहिए ऐसा करने से चन्द्रमा का दोष समाप्त हो जाता है।
जिस जातक की कुंडली में सूर्य तुला राशि में है तथा मान-सम्मान, यश में कमी प्रदान कर रहा है तो वैसे व्यक्ति को माघ स्नान करना चाहिए तथा सूर्य भगवान् को प्रतिदिन अर्घ्य देना चाहिए ऐसा करने से सूर्य से मिलने वाले कष्ट दूर हो जाते है।
माघ पूर्णिमा व्रत कथा

शुभव्रत ने उसी श्लोक के अनुरूप माघ स्नान का संकल्प लिया और नर्मदा नदी में स्नान करने लगे। इस प्रकार वे लगातार 9 दिनों तक प्रात: नर्मदा के जल में स्नान करते रहे। दसवें दिन स्नान के बाद उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। उनके मृत्यु का समय आ गया था वे सोचने लगे की मैंने तो आजीवन धनार्जन में लगा रहा कोई भी सत्कार्य नहीं किया अतः मुझे तो नरकलोक में ही रहना पड़ेगा। परन्तु माघ मास में स्नान करने के कारण उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
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माघ पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि
- माघ पूर्णिमा के दिन सर्वप्रथम सुबह सूर्योदय से पहले किसी पवित्र गंगा, यमुना नदी, जलाशय, कुआं या बावड़ी में स्नान करना चाहिए ।
- यदि आप गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं तो नहाने की पानी मे गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए।
- यदि गंगाजल भी उपलब्ध न हो तो हाथ में जल लेकर इस मन्त्र का उच्चारण करे —ॐ गंगे च यमुना गोदावरी नर्मदे सिंधु कावेरी अस्मिन जले सन्निधिं कुरु। इस मंत्र के उच्चारण के बाद स्नान करना प्रारम्भ करे।
- स्नान के बाद सूर्यदेव को “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मन्त्र से अर्घ्य देना चाहिए।
- इसके बाद मन में माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
- दोपहर में किसी गरीब व्यक्ति और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दे।
- दान में तिल और काले तिल विशेष रूप से दान करे तथा काले तिल से हवन और काले तिल से पितरों का तर्पण करे।
माघ पूर्णिमा व्रत में स्नान और दान से लाभ
- माघ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने से शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं और शरीर निरोगी होता है।
- इस दिन स्नान-ध्यान कर भगवान महादेव या विष्णु की पूजा-अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
- व्यक्ति को तिल और कम्बल का दान करना चाहिए ऐसा करने से जातक को नरक लोक से मुक्ति मिलती है।
- माघ की पूर्णिमा पर ब्रह्मवैवर्तपुराण का दान करे ऐसा करने से श्रद्धालु को ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है ।
- सभी पापों से विमुक्ति, स्वर्गलाभ तथा भगवान् वासुदेव की प्राप्ति के लिए सभी श्रद्धालुओं को माघ स्नान करना चाहिए।
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