नयी दिल्ली, 3 फरवरी; सुप्रीम कोर्ट धार्मिक स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से जुड़े सभी मुद्दे तय करेगी, जिस पर नौ जजों की बेंच सुनवाई करेगी. कोर्ट ने विभिन्न धर्मों में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के मामले से निपटने के संबंध में उन सवालों को तैयार करने की प्रक्रिया सोमवार को शुरू की, जिस पर उसे चर्चा करनी है. इसमें केरल के सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा मामला भी शामिल है. सुप्रीम कोर्ट सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश के साथ-साथ मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश, और दाऊदी बोहरा समुदाय की महिलाओं के खतना की परंपरा पर भी सुनवाई करेगी.
पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केरल के सबरीमला मंदिर समेत तमाम अन्य धार्मिक स्थानों पर महिलाओं के प्रति भेदभाव से संबंधित मामले की सुनवाई 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ 10 दिन में पूरा कर लेगी.
बेंच ने यह टिप्पणी उस समय की जब सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष इस मामले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अदालत के पूर्व में दिए गए आदेश की अनुपालना में वकीलों की एक बैठक हुई, लेकिन 9 न्यायाधीशों की पीठ के विचार-विमर्श के लिए कानूनी सवालों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका.
सुनी जाएँगी सभी दलीलें
जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता में नौ न्यायाधीशों की पीठ सवालों को तय किये जाने के मुद्दे पर एफ एस नरीमन समेत विभिन्न वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुन रही है, जिस पर उसे फैसला करना है. सबरीमला मामले में पिछले साल 14 नवंबर को दिए गए फैसले के माध्यम से विभिन्न धर्मों में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का मामला वृहद पीठ के समक्ष भेजा गया था.
क्या है मुद्दे
याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों, जैसे- मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना के चलन और अपने धर्म से बाहर किसी अन्य धर्म में विवाह करने वाली पारसी महिलाओं को अधिकार देने से इनकार करने आदि पर दिये गए तर्कों के मद्देनजर पीठ को अपने सवाल तैयार करने हैं.
Editorial Review Note
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.