लखनऊ, 17 नवम्बर; अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद अयोध्या में मंदिर और मस्जिद की जमीन को एक साथ सौंपे जाने की तैयारी है। मंदिर की जमीन को केंद्र सरकार से बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपने को लेकर सौंपने से पहले की तैयारी की जा रही है तो मस्जिद के लिए जमीन की तलाश अभियान के रूप में की जा रही है। कई स्थान चिंहित भी कर लिए गए हैं।
सुप्रीमकोर्ट ने अपने फैसले में विराजमान राम लला को 2.77 को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि विराजमान राम लला की यह जमीन केंद्र सरकार से बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपी जाएगी।
तीन महीने के भीतर इसका ट्रस्ट बनेगा। इसके बाद जमीन ट्रस्ट को सौंपी जाएगी। ट्रस्ट ही राम मंदिर का निर्माण कराएगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में मस्जिद बनाए जाने के लिए पांच एकड़ जमीन दिए जाने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने जमीनों को लेकर अपनी तैयारी शुरू की है। सूत्रों की मानें तो अयोध्या में मंदिर और मस्जिद की जमीनों को एक साथ दिए जाने की तैयारी है।
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मंदिर के लिए दी जाने वाली जमीन को सौंपे जाने की पूर्व तैयारी की जा रही है तो उसी तेजी के साथ ही मस्जिद के लिए भी पांच एकड़ जमीन की खोज पूरी करने का प्रयास है। जिससे एक साथ मंदिर और मस्जिद की जमीनों को सौंपा जा सके।
सूत्रों की मानें तो रामनगरी के बाहर जिले के सभी पांचों तहसीलों में इसकी खोज करके कई स्थान चिंह्ति किए जा रहे है। सूत्र बताते हैं कि अब 14 कोसी परिक्रमा पथ के बाहर सदर तहसील के सहनवां, कुशमाहा, सोहावल के धन्नीपुर के साथ ही मिल्कीपुर के एक स्थान पर प्रशासन की निगाह टिकी है। सहनवां और कुशमाहा राम नगरी से कुछ ही दूर स्थित हैं। धन्नीपुर राम नगरी से लगभग 20 किमी दूर हैं। जमीन के विकल्प के रूप में कई स्थान रखे जाने की चर्चा है।
सूत्रों का कहना है कि अयोध्या में मंदिर और मस्जिद की जमीनों को एक साथ सौंपा जाएगा। जिससे न्यायालय के आदेश का पालन किया जा सके। अयोध्या के कमिश्नर और अधिग्रहीत परिसर के रिसीवर मनोज मिश्र का कहना है कि जमीनें फैसले के अनुसार सौंपी जाएगी।
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