RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

छठ पूजा: जानिये क्या है छठ पर्व का इतिहास और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ

छठ पूजा: जानिये क्या है छठ पर्व का इतिहास और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ

छठ पूजा: जानिये क्या है छठ पर्व का इतिहास और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ
Visual Archive

छठ पूजा: जानिये क्या है छठ पर्व का इतिहास और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ

छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा विधि विधान से की जाती है। छठ पूजा का प्रारंभ कब से हुआ, सूर्य की आराधना कब से प्रारंभ हुई, इसके बारे में पौराणिक कथाओं में बताया गया है।

सतयुग में भगवान श्रीराम, द्वापर में दानवीर कर्ण और पांच पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी। छठी मैया की पूजा से जुड़ी एक क​था राजा प्रियवद की है, जिन्होंने सबसे पहले छठी मैया की पूजा की थी। आइए जानते हैं कि सूर्य उपासना और छठ पूजा का इतिहास और कथाएं क्या हैं।

राजा प्रियवद ने पुत्र के प्राण रक्षा के लिए की थी छठ पूजा

राजा प्रियवद ने पुत्र के प्राण रक्षा के लिए की थी छठ पूजा

एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियवद नि:संतान थे, उनको इसकी पीड़ा थी। उन्होंने महर्षि कश्यप से इसके बारे में बात की। तब महर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। उस दौरान यज्ञ में आहुति के लिए बनाई गई खीर राजा प्रियवद की पत्नी मालिनी को खाने के लिए दी गई। यज्ञ के खीर के सेवन से रानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मृत पैदा हुआ था। राजा प्रियवद मृत पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और पुत्र वियोग में अपना प्राण त्याग लगे।

उसी वक्त ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने राजा प्रियवद से कहा, मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं, इसलिए मेरा नाम षष्ठी भी है। तुम मेरी पूजा करो और लोगों में इसका प्रचार-प्रसार करो। माता षष्ठी के कहे अनुसार, राजा प्रियवद ने पुत्र की कामना से माता का व्रत विधि विधान से किया, उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी थी। इसके फलस्वरुप राजा प्रियवद को पुत्र प्राप्त हुआ।

श्रीराम और सीता ने की थी सूर्य उपासना

श्रीराम और सीता ने की थी सूर्य उपासनापौराणिक कथा के अनुसार, लंका के राजा रावण का वध कर अयोध्या आने के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता ने रामराज्य की स्थापना के लिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को उपवास रखा था और सूर्य देव की पूजा अर्चना की थी।

यह भी पढ़ें-छठ पूजा: चार दिन तक मनाया जायेगा छठ पर्व, जाने शुभ मुहूर्त

द्रौपदी ने पांडवों के लिए रखा था छठ व्रत

द्रौपदी ने पांडवों के लिए रखा था छठ व्रत

पौराणिक कथाओं में छठ व्रत के प्रारंभ को द्रौपदी से भी जोड़कर देखा जाता है। द्रौपदी ने पांच पांडवों के बेहतर स्वास्थ्य और सुखी जीवन लिए छठ व्रत रखा था और सूर्य की उपासना की थी, जिसके परिणामस्वरुप पांडवों को उनको खोया राजपाट वापस मिल गया था।

दानवीर कर्ण ने शुरू की सूर्य पूजा

दानवीर कर्ण ने शुरू की सूर्य पूजा

महाभारत के अनुसार, दानवीर कर्ण सूर्य का पुत्र था और प्रतिदिन सूर्य की उपासना करता था। कथानुसार, उसने सबसे पहले सूर्य की उपासना शुरू की थी। वह प्रतिदिन स्नान के बाद नदी में जाकर सूर्य को अर्घ्य देता था।

@religionworldin

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

October 30, 2019 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

chhathpuja

छठ महापर्व को लेकर आयोजकों को गाइडलाइन का इंतजार

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर; छठ महापर्व  की तैयारियों को लेकर आयोजन समितियां असमंजस में हैं. सरकार की ओर से अब तक पूजा के आयोजन को लेकर कोई बात…

Read now
chhathpuja

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न

लोक आस्था के महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान आज सुबह सूरज को अर्ध्य देने के बाद संपन्न हो गया। आस्था और विश्वास का यह पर्व बिहार, झारखंड,…

Read now
chhathpuja

छठ का पर्व बहुसांस्कृतिक संगम का अनूठा उदाहरण

छठ पूजा की शुभकामनाएं ऋषिकेश, 2 नवम्बर। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्टी को भगवान सूर्य की आराधना की पर्व मनाया जाता है। वेदों, उपनिषदों और अनेक वैदिक ग्रन्थों…

Read now