नरेन्द्र मोदी की विजय देश के सुरक्षित, सतत और समृद्ध विकास की विजय – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- अब चुनाव हो चुके है अब देश को चुने
- श्री नरेन्द्र मोदी जी की अद्भुत विजय यात्रा के लिये दी बधाईयां
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण को समर्पित श्रीराम कथा गली और मोहल्लों को स्वच्छ बनायें रखने का दिया संदेश
- अपने-अपने गली, मोहल्ले और मुल्क के चैकीदार बने
ऋषिकेश, 23 मई। परमार्थ निकेतन गंगा तट आज राष्ट्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, माँ गंगा सहित देश की सभी नदियों को समर्पित मानस कथा के मंच से परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महराज ने श्री नरेन्द्र मोदी जी की अद्भुत विजय यात्रा के लिये बधाईयां दी।
प्रख्यात कथाकार श्री मुरलीधर जी के मुखारबिन्द से माँ गंगा के साथ-साथ मानस की ज्ञान रूपी गंगा भी प्रवाहित हो रही है। श्रीराम कथा के मंच से श्रद्धालुओं को राष्ट्र, समाज, पर्यावरण, परिवार और जीवन से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर पूज्य संतों, पर्यावरणविदों, मूर्धन्य विभूतियों और विशेषज्ञों के विचार से अवगत होने का अवसर प्राप्त हो रहा है।


कथा के पावन मंच से वैश्विक स्तर पर व्याप्त समस्याओं यथा स्वच्छता, स्वच्छ जल, नदियों का संरक्षण, शौचालय के प्रति जागरूकता, प्लास्टिक मुक्त विश्व का निर्माण, गौ संवर्धन, वृक्षारोपण, बढ़ते ई कचरे के प्रति जागरूकता, शाकाहारी जीवनचर्या, कुपोषण, महिला सशक्तिकरण, शादी से पहले शिक्षा, बाल विवाह के प्रति जागरूकता, दहेज प्रथा, नशा मुक्त भारत, भ्रूण हत्या के प्रति जागरूक करने एवं समाधान प्रस्तुत करने हेतु संदेश प्रसारित किये जा रहे है तथा सभी को संकल्प दिलवाया जा रहा है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’सृष्टि जब प्रभु की है तो सब कुछ अपना है। उस अपने को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिये आईये हम अपनी गली से शुरूआत करेें। अपनी गली को संभाल लें, गली को गोद ले, ले गली सुधरेगी तो गांव सुधर जायेगा; गली सम्भलेगी तो गांव सम्भल जायेंगा। थोड़ी और हिम्मत हो तो मोहल्ले को गोद ले लेना क्योंकि मोहल्ले बदलते है तो माहौल बदलता है और माहौल बदलता है तो मुल्क बदलता है। आज पूरे देश में यह दर्शन करने को मिला कि माहौल किस तरह बदलता है। मोदी जी की यात्रा मोहल्लों से; गलियों से और अपने घर से शुरू हुई। उन्होने अपने लिये नहीं अपनों के लिये सोचा। इस देश में अगर कोई छक्के लगा सकता है तो वह है ईमानदारी और वफादारी। अगर देश की जनता के लिये अपनत्व हो, वफादारी हो और ईमानदारी हो तभी सबका साथ-सबका विकास, सतत और सुरक्षित विकास के फुल खिलते है और सुगंध बिखरती है। आईये हम सभी अपने-अपने गली, मोहल्ले और मुल्क के चैकीदार बने।’’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यह जीत भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक है। मैने सुना की कुछ लोग कह रहे है कि फिर से भगवा आ गया; इस बार भी भगवा, उन्हें मैं कहना चाहता हूँ कि भगवा त्याग का प्रतीक है; ऊर्जा का प्रतीक है; सूर्य की रोशनी का प्रतिक है; अग्नि की ज्वाला का प्रतीक है जो समाज में आयी कुरीतियों को, ऊंच नीच के भेदभाव को जलाकर समाज को शुद्धि प्रदान करेगी और भारत को सिद्धि प्रदान करेगी। भारत, पूरे विश्व में राष्ट्रवाद के इस परचम को लहरा कर पूरे विश्व को समता, समरसता और सद्भाव का संदेश देगा। उन्होने कहा कि जिस तरह से सूर्य प्रकट होता है; उदित होता है तो सूर्य की किरणे सभी को अपने आगोश में ले लेती है; सब को गले लगाती है मुझे पूरा विश्वास है कि भारत के यशस्वी, तपस्वी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री गालियां देने वालों को भी गले लगायेंगे; भ्रष्टाचार के पथ पर चलने वालों को सदाचार के पथ का अनुसरण करायेंगे, बदला लेने वालों को भी स्वयं को बदलने का पाठ पढ़ायेंगे तथा सभी को साथ लेकर देश के विकास के लिये राष्ट्र के विकास के लिये आगे कदम बढ़ायेंगे। अब समय आ गया है कि भगवे पर शक न करे, भगवा तो त्याग का प्रतीक है। उन्होने कहा कि न शक से न शिकवों से न शिकायतों से बल्कि शुक्रिया करे कि देश को फिर वापस एक ऐसा नेतृत्व मिला है जो सब को साथ लेकर चलेगा, सब के विकास की सोचेगा, सतत और सुरक्षित विकास की सोचेगा। अब चुनाव हो चुके है अब देश को चुने। सारे भेद भाव भूलकर अपनी पार्टी से उपर उठकर अब पार्टीशन की नहीं बल्कि एक्शन की बात करें और वह एक्शन देश के लिये हो, राष्ट्र के लिये हो तभी हम सफल भारत के सफल नागरिक कहलायेंगे
इस अवसर पर मानस कथाकार श्री मुरलीधर जी ने मानस कथा को आगे बढ़ाते हुये सती जी द्वारा श्री राम चन्द्र जी के अपमान के प्रसंग पर चर्चा तथा भगवान की परीक्षा लेना का भावपूर्ण वाचन किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज की गंगा आरती को राष्ट्र के नाम समर्पित करते हुये राष्ट्र को स्वच्छ, स्वस्थ और समृद्ध बनायें रखने का संकल्प कराया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
