RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

भगवान श्री कृष्ण : पूरा जीवन : 125 वर्षों का महाजीवन

भगवान श्री कृष्ण : पूरा जीवन : 125 वर्षों का महाजीवन

भगवान श्री कृष्ण : पूरा जीवन : 125 वर्षों का महाजीवन
Visual Archive

भगवान श्री कृष्ण : पूरा जीवन : 125 वर्षों का महाजीवन

भगवान श्री कृष्ण : पूरा जीवन : 125 वर्षों का महाजीवन

भगवान श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता हैं।

* उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल-गोविन्द इत्यादि नामों से जानते हैं।

* राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते हैं।

* महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान जाने जाते हैं।

* उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते हैं।

* बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है।

* दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम से जाने जाते है।

* गुजरात में द्वारिकाधीश के नाम से जाने जाते हैं।

* असम, त्रिपुरा, नेपाल इत्यादि पूर्वोत्तर क्षेत्रों में कृष्ण नाम से ही पूजा होती हैं।

* मलेशिया, इंडोनेशिया, अमेरिका, इंग्लैंड, फ़्रांस इत्यादि देशो में कृष्ण नाम ही विख्यात हैं।

* गोविन्द या गोपाल में “गो” शब्द का अर्थ गाय एवं इन्द्रियों, दोनों से है। गो एक संस्कृत शब्द है और ऋग्वेद में गो का अर्थ होता है मनुष्य की इंद्रिया, जो इन्द्रियों का विजेता हो जिसके वश में इंद्रिया हो वही गोविंद है गोपाल हैं।

* श्री कृष्ण के पिता का नाम वसुदेव था, इसलिए इन्हें आजीवन “वासुदेव” के नाम से जाना गया। श्री कृष्ण के दादा का नाम शूरसेन था।

* श्री कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के राजा कंस की जेल में हुआ था।

* श्री कृष्ण के भाई बलराम थे लेकिन उद्धव और अंगिरस उनके चचेरे भाई थे। 

* अंगिरस ने बाद में तपस्या की थी और जैन धर्म के तीर्थंकर नेमिनाथ के नाम से विख्यात हुए थे।

* श्री कृष्ण ने 16000 राजकुमारियों को असम के राजा नरकासुर की कारागार से मुक्त कराया था, और उन राजकुमारियों को आत्महत्या से रोकने के लिए मजबूरी में उनके सम्मान हेतु उनसे विवाह किया था। क्योंकि उस युग में हरण की हुयी स्त्री अछूत समझी जाती थी और समाज उन स्त्रियों को अपनाता नहीं था।

* श्री कृष्ण की मूल पटरानी एक ही थी जिनका नाम रुक्मणी था जो महाराष्ट्र के विदर्भ राज्य के राजा रुक्मी की बहन थी।। रुक्मी शिशुपाल का मित्र था और श्री कृष्ण का शत्रु ।

* दुर्योधन श्री कृष्ण का समधी था और उसकी बेटी लक्ष्मणा का विवाह श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब के साथ हुआ था।

* श्री कृष्ण के धनुष का नाम सारंग था। शंख का नाम पाञ्चजन्य था। चक्र का नाम सुदर्शन था। उनकी प्रेमिका का नाम राधारानी था जो बरसाना के सरपंच वृषभानु की बेटी थी। श्री कृष्ण राधारानी से निष्काम और निश्वार्थ प्रेम करते थे। राधारानी श्री कृष्ण से उम्र में बहुत बड़ी थी। लगभग 6 साल से भी ज्यादा का अंतर था। 

* श्री कृष्ण ने 14 वर्ष की उम्र में वृंदावन छोड़ दिया था। और उसके बाद वो राधा से कभी नहीं मिले।

* श्री कृष्ण विद्या अर्जित करने हेतु मथुरा से उज्जैन मध्य प्रदेश आये थे। और यहाँ उन्होंने उच्च कोटि के ब्राह्मण महर्षि सान्दीपनि से अलौकिक विद्याओ का ज्ञान अर्जित किया था।।

* श्री कृष्ण की कुल 125 वर्ष धरती पर रहे। उनके शरीर का रंग गहरा काला था और उनके शरीर से 24 घंटे पवित्र अष्टगंध महकता था। उनके वस्त्र रेशम के पीले रंग के होते थे और मस्तक पर मोरमुकुट शोभा देता था। 

* उनके सारथि का नाम दारुक था और उनके रथ में चार घोड़े जुते होते थे। उनकी दोनो आँखों में प्रचंड सम्मोहन था।

* श्री कृष्ण के कुलगुरु महर्षि शांडिल्य थे।

* श्री कृष्ण का नामकरण महर्षि गर्ग ने किया था।

* श्री कृष्ण के बड़े पोते का नाम अनिरुद्ध था जिसके लिए श्री कृष्ण ने बाणासुर और भगवान् शिव से युद्ध करके उन्हें पराजित किया था।

* श्री कृष्ण ने गुजरात के समुद्र के बीचों बीच द्वारिका नाम की राजधानी बसाई थी। द्वारिका पूरी सोने की थी और उसका निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया था।

* श्री कृष्ण को ज़रा नाम के शिकारी का बाण उनके पैर के अंगूठे मे लगा वो शिकारी पूर्व जन्म का बाली था, बाण लगने के पश्चात भगवान स्वलोक धाम को गमन कर गए।

* श्री कृष्ण ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अर्जुन को पवित्र गीता का ज्ञान रविवार शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन मात्र 45 मिनट में दे दिया था।

* श्री कृष्ण अवतार नहीं थे बल्कि अवतारी थे….जिसका अर्थ होता है “पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान्” न ही उनका जन्म साधारण मनुष्य की तरह हुआ था और न ही उनकी मृत्यु हुयी थी।

सर्वान् धर्मान परित्यजम मामेकं शरणम् व्रज

अहम् त्वम् सर्व पापेभ्यो मोक्षस्यामी मा शुच

( भगवद् गीता अध्याय 18 )

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी 

हे नाथ नारायण वासुदेव …

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

September 3, 2018 4 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

Onam 2026: 26 अगस्त को मनाया जाएगा थिरुवोनम, जानें क्यों राजा महाबली के स्वागत में सजते हैं केरल के घर?

भारत में कई ऐसे त्योहार हैं, जिनकी परंपराएं और कथाएं बेहद अनोखी हैं। केरल का ओणम भी ऐसा ही एक प्रमुख पर्व है। यह त्योहार फसल, समृद्धि, खुशहाली…

Read now
Hinduism

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने के बाद कब उतारें? जानिए सही समय और राखी उतारने का धार्मिक तरीका

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व है। रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा, और राखी बांधने के बाद सबसे ज्यादा…

Read now
Hinduism

पुत्रदा एकादशी 2026: चावल से लेकर तुलसी तोड़ने तक, इन कामों से रहें दूर, जानें व्रत का महत्व

पुत्रदा एकादशी 2026: चावल से लेकर तुलसी तोड़ने तक, इन 7 कामों से रहें दूर हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *