सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने का तरीका

सावन के सोमवार के व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। दैनिक कार्यों से निवृत होकर नहा धोकर शुद्ध सफ़ेद रंग के कपडे पहनने चाहिए। भगवान शिव की पूजा यदि घर में करनी हो तो पूजा का स्थान साफ करके गंगाजल छिड़क कर शुद्ध कर लेना चाहिए। इसके बाद शिव जी की मूर्ती या तस्वीर को स्थापित करके साफ आसन पर बैठ कर पूजा करनी चाहिए। घर में सिर्फ पारद या नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। बाहर मंदिर में पूजा करने जाना हो तो पूजा का सामान ढक कर ले जाना चाहिए। संभव हो तो मंदिर में भी शुद्ध आसन पर बैठ कर पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
शिव पूजा की सामग्री
जल कलश, गंगा जल, कच्चा दूध ,दही ,घी ,शहद, चीनी, केसर ,वस्त्र ,चन्दन रोली ,मौली ,चावल (अक्षत), फूलमाला, फूल, जनेऊ, इत्र, बेल पत्र, आंक, धतूरा, भांग, कमल गट्टा, पान, लौंग, इलायची , सुपारी, धूप, दीप, अगरबत्ती, माचिस, कपूर, फल, मेवा, मिठाई, नारियल, दक्षिणा के पैसे।

शिव पूजा की विधि
- पूजा के लिए सबसे पहले पूजा के सामान को यथास्थान रख दें
- अब भगवान शिव का ध्यान करके ताम्बे के बर्तन से शिव लिंग को जल से स्नान कराएँ ।
- गंगा जल से स्नान कराएं।
- इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएँ। इनके मिश्रण से बनने वाले पंचामृत से भी स्नान करा सकते है
- इसके बाद सुगंध स्नान के लिए केसर के जल से स्नान कराएँ।
- चन्दन आदि लगाएँ।
- अब मौली, जनेऊ, वस्त्र आदि चढ़ाएँ।
- अब इत्र और पुष्प माला , बील पत्र आदि चढ़ा दें। बील पत्र 5 ,11 , 21 , 51 आदि शुभ संख्या में लें। बीलपत्र चढाने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
- आंकड़े और धतूरे के फूल चढ़ाएँ । शिव जी को सफ़ेद रंग अतिप्रिय है क्योकि ये शुद्ध , सौम्य और सात्विक होता है। आंकड़ा और धतूरा
- चढ़ाने से पुत्र का सुख मिलता है।
- वाहन सुख के लिए चमेली का फूल चढ़ाएँ , धन की प्राप्ति के लिए कमल का फूल, शंखपुष्पी या जूही का फूल चढ़ाएँ , विवाह के लिए बेला के फूल चढ़ाएँ, मन की शांति के लिए शेफालिका के फूल चढाने चाहिए। पारिवारिक कलह से मुक्ति के लिए पीला कनेर का फूल चढ़ाएं।
- शिव जी की पूजा करते समय आपकी भावना शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए ( जैसे शिव खुद है )।
- अब धूप, दीप आदि जलाएँ।
- अब फल मिठाई आदि अर्पित कर भोग लगाएँ।
- इसके बाद पान, नारियल और दक्षिणा चढ़ाएँ।
अब आरती करें। जय शिव ओमकारा ….
आरती के बाद क्षमा मंत्र बोलें। क्षमा मन्त्र इस प्रकार है :
” आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम, पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर: “
श्रद्धा पूर्वक इस प्रकार सावन के सोमवार को पूजा सम्पूर्ण करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण करते है। इस दिन महामृत्युंजय, शिवसहस्र नाम, रुद्राभिषेक, शिवमहिमा स्रोत, शिवतांडव स्रोत या शिवचालीसा आदि का पाठ करना बहुत लाभकारी होता है।
ध्यान रखें
शिवलिंग पर सिन्दूर , हल्दी , लाल रंग के फूल , केतकी और केवड़े के फूल आदि या स्त्री सौंदर्य से सम्बंधित सामान ना चढ़ाएँ। क्योंकि शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। जलधारी पर ये चढ़ाये जा सकते है क्योकि जलधारी माता पार्वती और स्त्रीत्व का प्रतीक होती है। शिव लिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। आधी परिक्रमा ही लगाएं।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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