क्या है चाँद और ईद का रिश्ता ?
इस समय देश भर में ईद की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। हर किसी को बस ईद के चांद का बेसब्री से इंतजार है क्योंकि अगर चांद दिखा तभी शुक्रवार को ईद होगी वरना नहीं.
क्या आप जानते हैं कि आखिर ईद का चांद से क्या कनेक्शन है, चलिए हम बताते हैं कि आखिर दोनों के बीच का कनेक्शन क्या है…
शव्वाल उल-मुकरर्म (दसवें महीने की पहली तारिख )
दरअसल ईद-उल-फितर हिजरी कैलेण्डर (हिजरी संवत) के दसवें महीने शव्वाल (शव्वाल उल-मुकरर्म) की पहली तारीख को मनाई जाती है. हिजरी कैलेण्डर, इस्लाम में काफी पाक माना जाता है क्योंकि इससे एक ऐतिहासिक घटना जुड़ी है, ये उस दिन से शुरू होता है, जिस दिन हजरत मुहम्मद साहब ने मक्का शहर से मदीना की ओर प्रवास किया था.
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हिजरी संवत चांद पर आधारित
हिजरी संवत चांद पर आधारित कैलेण्डर है. इस संवत के बाकी के अन्य महीनों की तरह शव्वाल महीना भी ‘नया चांद’ देख कर ही शुरू होता है. यदि इस महीने का पहला चांद नजर नहीं आता है, तो माना जाता है कि रमजान का महीना अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए ईद उसके 24 घंटे बाद यानी कि अगले दिन मनाई जाती है.
जकात उल-फितर
मूल रूप से मुसलमानों का त्योहार ईद भाईचारे को बढ़ावा देने वाला पर्व है. इस त्योहार को सभी आपस में मिल के मनाते है और खुदा से सुख-शांति और बरक्कत के लिए दुआएं मांगते हैं.ईद के दिन मस्जिदों में सुबह की प्रार्थना से पहले हर मुसलमान का फर्ज है कि वो दान या भिक्षा दे, इस दान को जकात उल-फितर कहते हैं.
रोज़ा ख़त्म होने की खुशी के अलावा ईद में मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होंने महीने भर उपवास रखने की शक्ति दी. ईद का दिन उत्सव जैसा होता है इसलिए इस दिन बढ़िया खाने के अतिरिक्त नए कपड़े भी पहने जाते हैं और परिवार और दोस्तों के बीच तोहफों का आदान-प्रदान होता है. सेवईं इस त्योहार मुख्य खाद्य पदार्थ है, इसी कारण ये ‘मीठी ईद’ कहलाती है.
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