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परमार्थ निकेतन में चार दिवसीय ’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन’’ का आयोजन

परमार्थ निकेतन में चार दिवसीय ’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन’’ का आयोजन

परमार्थ निकेतन में चार दिवसीय ’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन’’ का आयोजन
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परमार्थ निकेतन में चार दिवसीय ’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन’’ का आयोजन

परमार्थ निकेतन में चार दिवसीय ’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन’’ का आयोजन

  • राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान समिट का शुभारम्भ उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री माननीय त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी, आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया 
  • गंगा के किनारे बसे तटीय पांच राज्यों के प्रतिनिधि, 80 से अधिक शहरों के प्रतिभागी, 150 से अधिक मेयर, प्रशासक, नगरपालिकाओं के अध्यक्ष, 70 से अधिक वक्ता, नवीन आविष्कारक, 30 पी एच ई डी वाटर इंजीनियर, 250 गंगा प्रहरी, फिक्की के अधिकारी, उच्च प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी प्रशासक, गंगा मंत्रालय के अधिकारी एवं प्रतिनिधियों ने किया सहभाग
  • परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टफेथ वाश एलायंस, आवास और विकास मंत्रालय, भारत सरकार, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित
  • फिक्की ने 2 लाख और आरबी ने 2 लाख पौधों के रोपण एवं संरक्षण का लिया संकल्प
  • मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ने कि जलाशयों के लिये 200 करोड़ रूपये की घोषणा
    नदियों के लिये जिम्मेदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी- ’’हमें पददार नहीं अब पहरेदार बनना होगा’’-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 10 मार्च। परमार्थ निकेतन में चार दिवसीय राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री माननीय त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता और ग्लेाबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक, आध्यात्मिक गुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी,  उप महासचिव फिक्की निरंकार सक्सेना जी, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव, विक्रांत महाजन जी सीईओ स्फीयर इन्डिया, वीके जिंदल जी, मिशन निदेशक एसबीएम शहरी, राजेश झा जी, हेड आॅफ लीगल साउथ एशिया आर बी, प्रोफेसर श्रीनिवास चारी जी, एडमिनिस्ट्रेटिव काॅलेज आॅफ इन्डिया, डाॅ प्रवीण कुमार जी, टेक्निकल डायरेक्टर नेशलन मिशन क्लीन गंगा, जागरण शाह, डायरेक्टर जनरल नेशनल इंस्टीटयूट आॅफ अर्बन अफेयर्स, रवि भटनागर जी, डायरेक्टर एक्सटर्नल अफेयर्स पार्टनर आर बी, डाॅ अशोक घोष जी, चेयर पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड आॅफ बिहार, प्रोफेसर बिष्ट जी, नेशलन सेंटर फाॅर गुड गवर्नेंस, ईको टास्क फोर्स के कर्नल राणा जी, दक्षिण भारत से आये स्वामी वेद विज्ञानाननन्द जी, मनोज गर्ग हरिद्वार मेयर, नगरपालिका अध्यक्ष शकुन्तला राजपूत, स्वामिनी आदित्यानन्द सरस्वती जी, प्रोग्राम डायरेक्टर एंड पालिसी डेवलेपमेंट एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने इलायची की माला पहनाकर माननीय मुख्यमंत्री जी का स्वागत किया। शिखर सम्मेलन के प्रथम दिन स्वामी जी महाराज, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी एवं अन्य अतिथियों ने रूद्राक्ष का पौधा परमार्थ निकेतन प्रांगण में रोपित किया।

यह एक ऐतिहासिक अवसर है जब गंगा के तट पर पहली बार गंगा के तटीय पांच राज्यों के प्रतिनिधि, 80 से अधिक शहरों के प्रतिभागी, 150 से अधिक मेयर, प्रशासक, नगरपालिकाओं के अध्यक्ष, 70 से अधिक वक्ता, नवीन आविष्कारक, 30 पीएचईडी वाटर इंजीनियर, 250 गंगा प्रहरी, फिक्की के अधिकारी, उच्च प्रशासनिक अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ, परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय नदी गंगा की समस्याओं का जिक्र करने नहीं बल्कि समाधान निकालने के लिये एकत्र हुये है।

शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। तत्पश्चात गंगा माँ के उद्गम के वीडियो फिल्म, जीवा द्वारा तैयार की गई प्रेरक एवं सारगर्भित गंगा समस्या और समाधान शार्ट फिल्मों को दिखाया गया। इस शिखर सम्मेलन में गंगा के तट पर स्थित शहरों की समस्याओं के आधार पर विशेषज्ञ विचार मंथन कर वहां की वस्तुस्थिति के अनुसार समाधान देंगे और तटीय शहरों और गावों की समस्याओं के आधार पर प्लान प्रस्तुत किया जायेगा। 

परमार्थ निकेतन में गंगा एक्शन परिवार और ग्लेाबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संयुक्त तत्वाधान में ’गंगा रिवर इंस्टीटयूट’ का शीघ्र ही शुभारम्भ किया जा रहा है जिसके घोषणा स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज की। इसके अन्तर्गत पूरे वर्ष गंगा बचाओ (सेव द गंगा) के लिये विशेषज्ञों द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन किया जायेगा। तीसरा महत्वपूर्ण कार्य उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड राज्यों के गंगा तट पर बसे शहरों और गांवों में गंगा के तट पर 2 लाख पौधों का रोपण आरबी और जीवा (ग्लेाबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संयुक्त तत्वाधान) में किया जायेगा।

श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ने कहा, माँ गंगा के लिये सभी एकत्र होकर एक दिशा में प्रयास करेंगे तो विलक्षण परिवर्तन सम्भव है। हमारे पास तकनीकी है; संसाधन है जिससे हम गंगा को अविरल और निर्मल बना सकते है केवल हमें बहुआयामी प्रयास करने की जरूरत है। वृक्षारोपण भी एक आयाम है; उन्होने खेतों में कीटनाशकों का कम इस्तेमाल करने की बात कही। साथ ही वर्षा जल के संरक्षण पर जोर देते हुये कहा कि उत्तराखण्ड राज्य केवल 0.4 प्रतिशत वर्षा जल का संरक्षण करता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे छोटे-छोटे तालाब; पोखर आदि बनाकर वर्षा जल के संरक्षण में योगदान प्रदान करे। उन्होने कहा कि सरकारी स्तर पर बड़े बड़े कार्य हो रहे है परन्तु हमें जनसमुदाय को भी जागरूक करने की जरूरत है, हमारी कोशिश भी जारी है हम इस बार 200 करोड से अधिक़ रूपये केवल जलाशयों के निर्माण के लिये लगायेंगे जिसके अन्तर्गत उचांई पर जलाशयों का निर्माण किया जायेंगा और वहां से पानी रिसकर नदियों में आयेंगा ताकि नदियों का प्रवाह बना रहे। इस अवसर पर उन्होने प्रधानमंत्री जी की योजना ’’गंाव का पानी गांव में, शहर का पानी शहर में’’ का जिक्र किया साथ ही उन्होने श्री नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल में गुजरात राज्य में 50 प्रतिशत वर्षा जल के संरक्षण की बात भी साझा की। उन्होने बताया कि भारत सरकार विकास के लिये 20 हजार करोड़ रूपये दे रही है, बड़े कार्य सरकार कर रही है छोटे प्रयासों के लिये जन समुुदाय को आगे आना होगा।’’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत का सौभाग्य है कि हमारे पास गंगा के विषय में सोचने व कार्य करने वाले यशस्वी और ऊर्जावान प्रधाममंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी है जिनका नेतृत्व इस अभियान को मिल रहा है; उनका संकल्प हम सभी के साथ है और हम सभी संकल्प भी उनके साथ हो, उन्होने आह्वान किया है कि गंगा ने मुझे बुलाया है। साथ ही उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि हिमालय और गंगापुत्र, संत हृदय श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी कर्मठ मुख्यमंत्री हमारे साथ है।

स्वामी जी ने कहा कि ’’उत्तराखण्ड राज्य के पास शुद्ध वायु, शुद्ध जल एवं शुद्ध मृदा है, ये तीनों तत्व ही तो हमारे जीवन को बनाते है। उन्होने कहा कि अगर मृदा विषैली है तो विषैला खाद्य पदार्थ ही पैदा करेगी इसलिये हमारी जिम्मेदारी, जवाबदेही और हमारी पारदर्शिता बहुत जरूरी है अतः हम सभी मिलकर आगे बढ़े तो कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होने लोगों और इगो से उपर उठकर काम करने की बात कहीं। हम उस प्रदेश के वासी है जिस प्रदेश से गंगा बहती है, उत्तराखण्ड राज्य गंगा क पथ में आने वाले राज्यों को निर्मल और अविरल गंगा की सौगात देगा ताकि बाकी प्रदेश भी अन्य प्रदेशों को निर्मल गंगा सौपें। हम पदों पर रहकर नहीं बल्कि गंगा के पहरी; परिवार, पहरेदार और पुत्र बनकर कार्य करेंगे। यहां पर भाषण नहीं बल्कि सुझाव साझा किये जायंेगे; यह मेयर टू शेयर समिट है। इस शिखर सम्मेलन में गंगा के साथ-साथ भारत की अन्य नदियों के लिये भी समाधान निकाला जायेंगा। उन्होने कहा हम है समाधान; यह मैं से हम की यात्रा है।’’

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा, ’’विश्व से लोग गंगा तट पर शान्ति खोजने आते है, भगवान तो सभी स्थानों पर है परन्तु गंगा केवल भारत में है अतः गंगा को संरक्षित करना नितांत आवश्यक है। गंगा हमें शोर से शान्ति की ओर ले जाती है। उन्हाने कहा कि पांच सौ मिलियन (50 करोड़) लोग गंगा के किनारे रहते है उनकी आजीविका जुड़ी हुयी है अतः हमें मिलकर गंगा के लिये समाधान खोजना होगा।

पूज्य स्वामी जी ने माननीय मुख्यमंत्री जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों को हरित सौगात पौधेे भेंट किये तथा नदियों को अविरल करने का संकल्प लिया। नदियों के जल के संरक्षण हेतु सभी ने मिलकर वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। इस पावन अवसर पर फिक्की के उप महासचिव श्री निरंकार सक्सेना जी ने घोषणा की कि वे जीवा एवं गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन के साथ मिलकर 2 लाख पौधों का रोपण करेंगे।

वक्ताओं ने गंगा की स्वच्छता, संरक्षण एवं जैवविविधता के संरक्षण के विषय में जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर पांच राज्यों से 500 से अधिक संख्या में आये प्रतिभागियों ने गंगा नदी की वर्तमान स्थिति, विभिन्न राज्यों में गंगा संरक्षण हेतु चलाये जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी और भविष्य की रणनीति पर विचार मंथन किया गया। कार्यक्रम समन्वयक डाॅ एस ए हुसैन, कार्यक्रम का संचालन प्रोफसर रचना विमल एवं डाॅ रूचि बडोला ने किया।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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March 11, 2018 7 min read
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