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भगवान जाने!

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अवलोकन

सदियों से भगवान के बारे में वाद-विवाद चलता आ रहा है। कुछ लोग भगवान, ईश्वर या परमात्मा के बारे में सभी मान्यताओं को नकार देते हैं। कुछ लोग मरते दम तक भगवान में श्रृद्धा रखते हैं और कभी-कभी कुछ लोग ऐसी भी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं, “क्या फर्क पड़ता है”? इन्श्योरेन्स कम्पनियाँ आज भी आपदायें, मतभेद, लड़ाईयाँ, गाली-गलौज आदि को ‘एक्ट ऑफ गॉड’ (परमात्मा द्वारा उत्पन्न किया गया संकट) मानते हैं। लेकिन क्या सचमुच मनुष्य निर्मित यह घटनायें और मनुष्य की गलतियों के लिए भगवान को जिम्मेदार माना जा सकता है?

अब तक आपके मन में यह कल्पना स्पष्ट हो गई होगी कि हमारे जीवन में अलौकिक, दिव्य और अकल्पित घटनायें कैसे घटती हैं। वास्तविकता में चाहे कोई कुछ भी करे या कहे, हम सबको स्वतंत्रता है कि हम भगवान को अपने व्यक्तिगत और अनोखे ढंग से स्वीकार करें या उस परम सत्ता के अस्तित्व को पूरी तरह से नकार दें।

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यह सत्र मानवीय खेलों से अलग दैवी सत्ता और स्थान कैसे अलग हैं इस बात पर प्रकाश डालता है। जिसमें परमात्मा इस घटक के बारे में जिज्ञासु को नये दृष्टिकोण अपनाने की अनुमति दी जाती है।खुले विचार और साहस से आपके मन में सुगमता और स्पष्टता के साथ विभिन्न कल्पनाओं में विचरण करने की क्षमता होगी। नीचे वर्णित हरेक प्रकार का योगाभ्यास एक प्रयोग है, परिक्षेद को दो या तीन बार पढ़ें और आपके मन में उस संदेश को बैठने दें। हर प्रयोग के बाद हो सकता है आप अपने नोट बनाना चाहें।

जीवन के सूत्र

मन मनाभव यह संस्कृत मंत्र हमारे मन को अनुशासित करता है। मनमनाभव अर्थात अपने मन को एक परम सत्ता, एक परमात्मा पर एकाग्र करें। यह ज्ञान और याद का सार है और जीवन का सच्चा अमृत है। मनमनाभव यह विधि है परमात्मा को पहचानने की, उस आत्मा का बनने की और उस आत्मा से प्यार करने की।

शान्ति के उन क्षणों में केवल आप और वो परम सत्ता दोनों साथ हों। शान्ति में आत्मा-परमात्मा के साथ सम्बन्ध जोड़ती है और आध्यात्मिक शक्ति को प्राप्त करती हैं। प्रकाश और शक्ति की वह तरंगें उस परम सत्ता से सीधे आप आत्मा में पहुँचती हैं और आत्मा की बैटरी पुन: चार्ज होती है।

पवित्रता की वह शक्ति जो बहुतकाल में हम एकत्रित करते हैं वह सारे विश्व को शक्ति और सहयोग प्रदान करती हैं। आप शान्तित की शक्ति से पवित्रता को एकत्रित करते हैं।

RW

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November 19, 2017 2 min read
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