संगीत के क्षेत्र के अस्त हुये सूर्य गिरिजादेवी जी को मणिकर्णिका घाट दी जा रही थी श्रद्धांजलि
- पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं पूज्य मोरारी बापू ने अर्पित की श्रद्धांजलि
- बनारस में पूज्य संत मोरारी बापू एवं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की हुई भेंट
- दशाशमेव घाट पर होने वाली आरती में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कराया हरियाली युक्त प्रदूषण मुक्त बनारस का संकल्प
- एक शाम भारत रत्नों के नाम हो जहां पर भारत के सभी कलाकारों को और उनकी कला को सम्मानित किया जा सके
- शहनाई के शहंशाह बिस्मिल्लाह खान के नाम पर बने एक घाट, वहां स्वच्छता और संगीत चले साथ-साथ-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने 1999 में आरम्भ की गंगा आरती उसके माध्यम से भारत ही नहीं विश्व में भी पंहुच रही भारतीय संस्कृति की गूंज – मोरारी बापू
वाराणसी, 27 अक्टूबर। बनारस की पावन भूमि में आध्यात्मिक जगत के संत पूज्य मोरारी बापूू और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की भेंट हुयी। जब बनारस के दिव्य गंगा तटों पर लाखों की संख्या में साधक अस्त होते सूर्य को अर्ध्य दें रहे थें तब संगीत के क्षेत्र के अस्त हुये सूर्य गिरिजादेवी को दोनो आध्यात्मिक गुरूओं ने मणिकर्णिका घाट पर गंगा जी के बीच जल धार में खड़े होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

तत्पश्चात मोरारी बापू और पूज्य स्वामी जी ने दशाशमेव घाट पर होने वाली आरती की भव्यता एवं दिव्यता के दर्शन किये।
पूज्य मोरारी बापू ने कहा कि ’गंगा के प्रत्येक तटों पर सायंकाल होते ही आरती के स्वर गूंजेे जिससे भारतीय संस्कृति के दर्शन भारत ही नहीं पूरे विश्व को हो सके। उन्होने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा 1999 में आरम्भ की गंगा आरती की भूरि-भूरि प्रशन्सा करते हुये कहा कि परमार्थ गंगा तट की आरती के माध्यम से पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति को प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बापू ने कहा कि इस आरती के दीप केवल बाहर ही प्रज्जलित नहीं होते बल्कि इसके द्वारा दिल में सद्भाव के दीप जलने लगे है यहीं तो है भारत का दर्शन; यही तो है भारतीय संस्कृति।’

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’शहनाई के शंहशाह बिस्मिल्लाह खान साहब के जन्म को 100 वर्ष पूर्ण हो गये है (21 मार्च 1916, 21 अगस्त 2006) अतः गंगा तट पर शहनाई के शंहशाह के नाम से एक घाट बनाया जाना चाहिये जहां पर माँ गंगा की आरती भी शंहनाई के साथ हो और उस घाट पर स्वच्छता एवं संगीत साथ-साथ चले। उन्होने कहा कि एक शाम भारत रत्नों के नाम हो ताकि विश्व में यह संदेश जा सके कि भारत संगीत, स्वच्छता एवं कला का सम्मान करता है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि बिस्मिल्ला खान साहब ही एक मात्र ऐसे संगीतज्ञ थे जिन्हें भारत के सभी सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। उन्होने कहा कि खान साहब ने केवल शहनाई ही नहीं बजायी बल्कि उनके साथ एकता की शहनाई भी बजी।’
पूज्य स्वामी जी ने बनारस में माँ गंगा के इतने सारे तट और तटों पर स्वच्छता देखकर भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी धन्यवाद दिया और मुक्त कंठ से प्रशन्सा करते हुये कहा कि कभी इन घाटों पर रेत के ढेंर और शौच के दर्शन होते थे आज वे ही तट लोगो की सोच को बदल रहे है। उन्होने कहा कि इन तटों को स्वच्छ रखना श्री मोदी जी एवं श्री योगी की ही प्राथमिकता नही बल्कि हम सब भी सहयोग करें; सभी गंगा माँ के पहरेदार बने; गंगा के भगीरथ बने; स्वच्छता के पहरेदार बने।’ पूज्य स्वामी जी ने पूज्य बापू को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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