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नवरात्र में कौन से मंत्रों का करें जाप ?

नवरात्र में कौन से मंत्रों का करें जाप ?

नवरात्र में कौन से मंत्रों का करें जाप ?
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नवरात्र में कौन से मंत्रों का करें जाप ?

नवरात्रि में कौन से मंत्रों का करें जाप ?
नवरात्रि में मां दुर्गा की शक्ति की पूजा की जाती है। इस वर्ष 21 सितंबर 2017 से शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुके हैं। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का भी पाठ करने का विधान है। हर कोई दुर्गा सप्तशती का पाठ करता हैं, लेकिन इसके कुछ ऐसे असरकारक मंत्र भी हैं, जो शायद ही लोगों का पता हो। इस मंत्र को बोलने से आत्मा की शक्ति प्राप्त होती है, साथ ही व्यक्ति का मानसिक तनाव भी कम होता है।
नवरात्र के नौ दिन नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अच्छा माना जाता है। इससे घर में शांति और सौहार्द्र आता है। लेकिन यदि समय के अभाव के चलते आप पूरा पाठ नहीं कर सकते तो नियमित रूप से सामान्य पूजन के साथ अपनी राशि अनुसार मंत्र का जाप करने से आपकी पूजा पूर्ण होती हैं।
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जानिए इस नवरात्रि पर किस राशि वाले कौन से मंत्र का करें जाप 
मेषऊं ऐं सरस्वत्यै नमः माला 108 मोती की
वृषभ ऊं क्र क्रूं कालिका देव्यै नमः माला 108 मोती की
मिथुन – ऊं दुं दुर्गायै नमः माला 108 मोती की
कर्कऊं ललिता दैत्ये नमः माला 108 मोती की
सिंह ऊं ऐं महासरस्वती देव्यै नमः माला 108 मोती की
कन्या ऊं शूल धारिणी देव्यै नमः माला 108 मोती की
तुला ऊं हृीं महालक्ष्म्यै नमः माला 108 मोती की
वृश्चिक ऊं शक्तिरूपायै नमः माला 108 मोती की
धनु ऊं ऐं हृीं क्लीं चामुण्डायै नमः माला 108 मोती की
मकरऊं पां पार्वती देव्यै नमः माला 108 मोती की
कुंभ ऊं पां पार्वती देव्यै नमः माला 108 मोती की
मीन ऊं श्री हृीं श्रीं दुर्गा देव्यै नमः माला 108 मोती की
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ऐसा विश्वास है कि नवरात्रि में कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से अभिष्ठ कार्य की सिद्धि होती है और पूजा का कई गुना फल मिलता है। ये हैं वो मंत्र जिसका नवरात्रि के नौ दिनों या किसी एक दिन उच्चारण करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्त की व्याधि, रोग, पीड़ा और दरिद्रता को नष्ट कर भक्त को उत्तम स्वास्थ्य और संपत्ति का वरदान देती हैं।
ग्रहों को शान्त करने का एक मात्र उपाय ग्रहों की शान्ति करना है। इसके लिये यंत्र और मंत्र विशेष रुप से सहयोगी हो सकते है। माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष लाभ देता है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में विधि-विधान से इन सिद्ध मंत्रों का जाप करना चाहिए। ये मंत्र आपको सुख एवं शांति प्रदान करते हैं।
यदि आपके परिवार में दु:ख-दारिद्र का वास बना हुआ है तो इस नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के इस मंत्र का पाठ कर सकते हैं। सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करके पूजन सामग्री के साथ पूजन स्थल पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। सामने दुर्गा जी की मूर्ति या प्रतिमा रखें।
हर दिन पूजा समाप्ति के बाद उत्तर दिशा की ओर मुख कर निम्न मंत्रो का जाप अवश्य करें:

।। सिद्धिः सन्तु मम् कामः।।

कितनी बार मंत्र का जाप करना चाहिए? मंत्र का जाप 51 बार करना चाहिए तभी पूर्ण फल प्राप्त होता है।
अगर दुर्गा पाठ न कर सकें तो?
अगर आप दुर्गा सप्तशती नहीं कर सकते, अपनी राशि अनुसार मंत्र उच्चारण नहीं कर सकते तो “नमो देव्यै महा देव्यै शिवायै सतंत नमः” का पाठ जरूर करें।
नीचे लिखे मंत्र से पूजन सामग्री और अपने शरीर पर जल छिड़कें….
 ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर: शुचि:
इसके बाद पूजा के लिए संकल्प करें और फिर नीचे लिखे मंत्र में से किसी भी मंत्र का यथा शक्ति जप नवरात्र पूरे 9 दिन करें।
ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः।
ॐ ऐं वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्‌।
ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्‌।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै:स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दरिद्रायदु:खभयहारिणी का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सादर्द्रचित्ता।।
उपरोक्त मंत्र का हिन्दी अर्थ : मां दुर्गे आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती है और स्वस्थ जीवन प्रदान करती है। स्वस्थ पुरुषों द्वारा चिन्तन करने पर उनको परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती है। दुःख, दारिद्रता और भय हरने वाली हे देवी मां आपके सिवाय दूसरा कौन है जिसका चित्त, मन सभी का उपकार करने के लिए सदा ही दयार्द्र रहता हो। इस मंत्र का जप करने वाला अपने समस्त रोग, व्याधि, जरा, पीड़ा, दुःख, दरिद्रता से मुक्ति पा जाता है। इस मंत्र का सम्पुट लगाकर नौ चंडी का पाठ घर में नवरात्रि में कराने से सभी प्रकार के कष्टों से सरलता से मुक्ति हो जाती है। माता की अत्यन्त कृपा प्राप्त होती है।
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 इस शारदीय नवरात्री में विशेष लाभ हेतु कुछ अन्य उपयोगी मंत्र : 

– साधक इस मंत्र का जप विविध उपद्रवों से बचने के लिए करते हैं।

 रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र।
दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
– साधक इस मंत्र का जप अपने पापों को मिटाने के लिए करते हैं।
हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योनः सुतानिव॥
– साधक इस मंत्र के द्वारा अशुभ प्रभाव और भय का विनाश करने के लिए देवी दुर्गा की आराधना करते हैं।
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥

 – साधक इस मंत्र का जप सामूहिक कल्याण के लिए करते हैं।
देव्या यया ततमिदं जग्दात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या।
तामम्बिकामखिलदेव महर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥
– साधक इस मंत्र का जप सभी प्रकार के विघ्नों दूर करें और महामारी नाश के लिए करते हैं।
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥

 – साधक इस मंत्र का जप विपत्तियों के नाश के लिए करते हैं।
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
 
– साधक इस मंत्र का जप स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति के लिए करते हैं।
सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥
– साधक इस मंत्र का जप भक्ति प्राप्ति के लिए करते हैं।
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

 – साधक इस मंत्र का जप प्रसन्नता प्राप्ति के लिए करते हैं।
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
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पंडित दयानन्द शास्त्री,
(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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September 24, 2017 6 min read
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