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विश्व पर्यावरण दिवस : 50,000000 पेड़ लगा चुके हैं हमारे संत और उनके संगठन

विश्व पर्यावरण दिवस : 50,000000 पेड़ लगा चुके हैं हमारे संत और उनके संगठन

विश्व पर्यावरण दिवस : 50,000000 पेड़ लगा चुके हैं हमारे संत और उनके संगठन
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विश्व पर्यावरण दिवस : 50,000000 पेड़ लगा चुके हैं हमारे संत और उनके संगठन

विश्व पर्यावरण दिवस : 50,000000 पेड़ लगा चुके हैं हमारे संत और उनके संगठन

विश्व पर्यावरण दिवस जैसा कि नाम से ही विदित है कि पृथ्वी और पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन हेतु मनाया जाने वाला एक दिवस है जिसे हम सभी उत्सव की भांति मनाते हैं. पर्यावरण और जीवन एक दूसरे के पूरक हैं. लेकिन फिर भी हमें पर्यावरण के संरक्षण और उसके संवर्धन के लिए यह दिवस मनाना पड़ रहा है. वर्तमान में, पर्यावरण में सजीव जगत का अस्तित्व उपस्थित है. पर्यावरण संरक्षण में मानव की अहम भूमिका है. मानव को आदर्श चेतन मानव निर्मित करना आध्यात्म की विषयवस्तु है. भारतीय सभ्यता व संस्कृति के आधार पर एक भारतीय आदर्श मानव के प्रतीक बन कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता निर्धारित कर सकते हैं. एक भारतीय विश्वदृष्टा विद्वान मनीषी ने इक्कीसवीं सदी का आधार स्तम्भ आध्यात्मिक अर्थशास्त्र घोषित कर भविष्य में आने वाली प्राकृतिक व पर्यावरणीय संकट के प्रति मानव को सचेत किया है. इसके साथ ही भौतिकवादिता व अति उपभोक्तावादी प्रवृति को त्याग कर अध्यात्मवादी भौतिकता अपनाई जाने को मानव हित में उदघाटित किया है. आज हम आपका ध्यान इसी ओर केन्द्रित करने का प्रयास करेंगे. कई ऐसी आध्यात्मिक संस्थाएं हैं जो पर्यावरण संरक्षण में अपना अभूतपूर्व योगदान दे रही हैं.

डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन

अखिल विश्व गायत्री परिवार के सहयोग से डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन ने करीब सौ पहाड़ियों पर 1 करोड़ से भी ऊपर पेड़ लगाये. इसके अतरिक्त गायत्री परिवार ने तरुपुत्र और तरु मित्र बनकर वृक्षों के संरक्षण का संकल्प लिया है. वृक्ष लगाने के लिए उन्होंने एक स्ट्रेटेजी तैयार की है जिसके अंतर्गत-

1.अपनी जमीन है तो सर्वोत्तम, उसमें यथासम्भव अधिकाधिक वृक्ष लगाएँ.

2. शहरों में घर के सामने, गेट के दोनों ओर अशोक वृक्ष लगाए जाएँ. यह देखने में सुन्दर, औषधीय गुणों से भरपूर और कम फैलाव वाले वृक्ष हैं.

3. घरों के आँगन में कच्ची जमीन न हो, तो बड़े गमले में कम फैलाव वाले गुड़हल एवं चाँदनी के फूलों की बेल आदि लगा सकते हैं.

4. सरकारी सड़कों के किनारे, रेलवे लाइन के समीप जहां बेकार जमीन पड़ी हो, वहां अपने श्रम से पेड़ लगाये जा सकते हैं, उनका स्वामित्व सरकारी रहे, तो भीहर्ज नहीं.

5 . प्रत्येक विद्यालय में 24 पौधों का रोपण करायें. (जहाँ भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन होता है, वहाँ यह कार्य सहज है)

6. राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों के किनारे फलदार/छायादार वृक्ष लगायें.

7. श्मशान घाट पर धार्मिक महत्त्व वाले एवं छायादार वृक्ष लगायें.

8. खेतों की मेढ़ों पर फलदार एवं कृषि में सहायक पौधों का रोपण करें. महाविद्यालयों के परिसरों में सम्पर्क कर वृक्षारोपण करें. खाली, वीरान पड़ी छोटी-बड़ीपहाडिय़ों पर.

9. औषधीय गुणों वाले वृक्षों को महत्त्व दें, जैसे- नीम, आँवला, अशोक आदि इन वृक्षों की पौध तैयार करके वितरित करें.

ईशा फाउंडेशन

ईशा फाउंडेशन द्वारा शुरू किया प्रोजेक्ट ग्रीन हैण्ड ने लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी का एहसास कराया. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य था की तमिलनाडु में हरियाली में 10 फ़ीसदी का इजाफा करना. जिससे तमिलनाडु के क्षेत्रों में मिट्टी का क्षरण कम हुआ और जलवायु परिवर्तन में हो रहे बदलाव में कुछ कमी हो. साल 2005 में सुनामी प्रभावित क्षेत्रों में 25000 पेड़ लगाकर इन्होने इसके कार्यक्रम की शुरुआत की और यह सिलसिला हर साल बढ़ता ही रहता है. प्रोजेक्ट ग्रीन हैंड्स ने तमिलनाडु और पुडुचेरी में करीब दो करोड़ लोगों के सहयोग से तीस करोड़ से ऊपर पेड़ लगाये.

इस विषय में ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरुजी महाराज का यह कहना है, “ पेड़ों और इंसानों का बहुत घनिष्ठ रिश्ता है. पेड़ जो सांस छोड़ते हैं, उसे हम अंदर लेते हैं, और हम जो सांस छोड़ते हैं, उसे पेड अंदर लेते हैं. यह वो स्थायी रिश्ता है जिसे कोई भी तोड़ नहीं सकता और ना ही इसके बिना जीवित रह सकता है.”.

देखिये ग्रीनहैंड्स प्रोजेक्ट्स से कैसे जुड़े हैं लाखों की संख्या में स्वयंसेवक..

द आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन

वृक्षारोपण के लिए आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन और यूनाइटेड नेशन ने पर्यावरण कार्यक्रम ‘बिलियन ट्री कैम्पेन’ के लिए बांग्लादेश में संयुक्त अभियान शुरू किया है. मैरिको बांग्लादेश ने अपने ‘गो ग्रीन’ अभियान के तहत एक चरण में परियोजना का समर्थन भी किया है. आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन भारत में ही नहीं भारत के बाहर भी गो ग्रीन कैम्पेन चलाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का प्रयास किया है.

श्रीश्री रविशंकर ने पेडो़ं के महत्व पर तमिल में क्या कहा…

परमार्थ निकेतन

परमार्थ निकेतन भी गंगा सफाई, गौ रक्षण के साथ वृक्षारोपण जैसे कार्यों में भी संलग्न है. परमार्थ निकेतन के सेवकों ने वृक्षारोपण का महत्त्व बताया. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर यदि वृक्षारोपण होता है तो उससे अधिक ऑक्सीजन का उत्पादन होगा और इसके साथ प्राकृतिक आपदाओं में कमी आएगी. ऐसा करने से भूस्खलनों में कमी आएगी, हवा शुद्ध होगी, गंगा में भी स्वच्छता व्याप्त रहेगी और हमारी पृथ्वी पर जीवन बरकरार रहेगा.

ग्रीन फ्रेंड्स एक्टिविटी

श्री माता अमृतानन्दमयी देवी के सहयोग से ग्रीन फ्रेंड्स एक्टिविटी की शुरुआत भारत में साल २००१ में हुयी. और इसके बाद इसका विस्तार पूरे विश्व में होनेलगा. ग्रीन फ्रेंड्स एक्टिविटी में न सिर्फ युवा बल्कि बच्चे भी अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं. ग्रीन फ्रेंड्स एक्टिविटी में व्यक्तिगत रूप से जुड़े लोग साल भर में कमसे कम १८ पेड़ लगाने ज़रूरी है. ग्रीन फ्रेंड्स की समूह एक्टिविटी के अंतर्गत तालाबों, झेलों की साफ सफाई, कम्पोस्ट आदि निर्मित करना और पेड़ पौधों केप्रति जागरूकता फैलाना है.

अम्मा द्वारा विश्व पर्यावरण को बचाने का प्रयास यहाँ देखिये-

योगी डिवाइन सोसाइटी

योगी डीवाइन सोसाइटी ने प्रकृति को जलवायु परिवर्तन की मार से बचाने के लिए वृक्षारोपण का बीड़ा उठाया है. योगी डीवाइन सोसाइटी के संस्थापक एच.एच. हरिप्रसाद स्वामी जी ने स्वयं वृक्षारोपण करने का प्रण लिया है. वह हरिधाम में और उनके आसपास नीम की पौध लगाना पसंद करते हैं. स्वामी जी के अनुसार नीम का पेड़ अन्य वृक्षों की अपेक्षा ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं. इतना ही नहीं हरिधाम के भीतर जितने भी वृक्ष लगाये गए हैं स्वामीजी स्वयं ही उनका ध्यान रखते हैं.

देखिए कितनी हरियाली के बीच बसा है योगी डिवाइन सोसाइटी –

समर्थ भारत फाउंडेशन

कर्नाटक स्थित एनजीओ समर्थ भारत फाउंडेशन ने भी विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक मेगा कैम्पेन चलाया है. इस कैम्पेन के अंतर्गत इस एनजीओ ने विश्व पर्यावरण दिवस यानि ५ जून २०१७ से लेकर १५ अगस्त २०१७ तक एक करोड़ वृक्ष पूरे कर्नाटक में लगाने का लक्ष्य रखा है.⁠

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Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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June 5, 2017 6 min read
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