World Water Day पर ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आयोजित हुआ ’वाटर गोल मेज सम्मेलन’
- गंगा नदी के तट पर बसे पांच राज्यों से सात वैज्ञानिक, वाइल्ड इंस्ट्टीयूट आॅफ इन्डिया से दस अनुभवी इंजीनियर एवं भारत के विभिन्न क्षेत्रों से 27 युवा महिला इंजीनियरों, वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों ने किया सहभाग
- परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, वाइल्ड इंस्ट्टीयूट आॅफ इण्डिया तथा गंगा रिवर इंस्ट्टीयूट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित
- वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीविदों ने दिव्य परमार्थ गंगा आरती एवं हवन में किया सहभाग
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीविदों को जल संरक्षण संकल्प कराया
- जल का संरक्षण समेकित प्रयासों से ही सम्भव – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
’वाटर गोल मेज सम्मेलन’ का आयोजन, परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस (जीवा), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, वाइल्ड इंस्ट्टीयूट आॅफ इण्डिया तथा गंगा रिवर इंस्ट्टीयूट के संयुक्त तत्वाधान में किया गया।
वाटर गोल मेज सम्मेलन का उद्देश्य सरकारी और निजी क्षेत्र में कार्य करने वाले वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को जल संरक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाये जिससे नई तकनीकी क्षमताओं का निर्माण हो, कार्य करने की दक्षता सशक्त हो जिससे अर्थपूर्ण परिणाम प्राप्त सके। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वाटर गोल मेज सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये कहा, ’दुनिया में रहने वाले प्रत्येक मनुष्य को जल की एक-एक बूंद के महत्व को समझना होगा तभी हम जल रूपी वैश्विक त्रासदी से उबर सकते है। जल का संरक्षण समेकित प्रयासों से ही सम्भव हो सकता है और इस हेतु जल वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। स्वामी जी ने कहा कि ’जल है तो कल है’ ’जल ही जीवन है’ उक्तियांे तक सीमित रहने से काम नहीं चलेगा अब इसके लिये जमीनी स्तर पर कार्य करना होगा। उन्होने बताया कि 50 करोड़ लोगांे की आजीविका गंगा के जल पर निर्भर है। 25 करोड लोग तो पूर्ण रूप से केवल गंगा जल पर आश्रित है, फिर भी 100 मिलियन लीटर प्रदूषित जल गंगा मंे प्रवाहित किया जाता है। घरों, शहरों, उद्योगों, एवं कृषि से निकलने वाला अपशिष्ट जल बिना पुर्ननवीनीकरण एवं उपचारित किये विशाल मात्रा में प्रकृति में प्रवाहित कर दिया जाता है जो हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करता है। इससे प्रकृति के मुल्यवान पोषक तत्व भी नष्ट हो रहे है। अनुउपचारित जल से पेचिस, टायफाइड, पोलियो जैसी बीमारियों में वृद्धि हो रही है। स्वच्छ जल, स्वच्छता एवं स्वच्छता सुविधाओं की आवश्यकता मनुष्य के साथ जलीय प्राणियों एवं पर्यावरण को भी है अतः जल संरक्षण एवं जल के पुर्ननवीनीकरण के लिये प्रयास भी युद्ध स्तर करना होगा।’
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा, ’जल हमारा भविष्य ही नहीं बल्कि वर्तमान भी है अतः जल की हर एक बूंद को संरक्षित करना हमारा दायित्व हैं। जिस प्रकार हमें जीने का अधिकार है उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वछन्द होकर अविरल व निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। साध्वी जी ने कहा कि वर्तमान समय में 665 मिलियन लोगों तक सुरक्षित एवं स्वच्छ जल की पंहुच नहीं है। अतः किसी अभावग्रस्त परिवार को पर्याप्त एवं स्वच्छ जल उपलब्ध कराना ईश्वर के वरदान या चमत्कार से कम नहीं हो सकती है हम सभी को इस ओर मिलकर कार्य करने की नितांत आवश्यकता है।
वाटर गोल मेज सम्मेलन के पश्चात सभी इंजीनियरों, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीविदों पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की अपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। स्वामी जी महाराज ने इंजीनियरों, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीविदों को जल संरक्षण का संकल्प कराया।
’वाटर गोल मेज सम्मेलन का निर्देशन जीवा की निर्देशक स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डाॅ संगीता अंगाॅम, वैज्ञानिक और प्रशिक्षण समन्वयक, भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून, डाॅ अभिजीत दास, वैज्ञानिक भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून, के मार्गदर्शन में मोनिका मेहरालु, साईंताका बनर्जी, अनीता देवी, मालवीका ओनियल, एस ए हुसैन, अंजना गोसाइन, मोनिका शर्मा, एस पी गोयल, अजित कुमार, नीना ग्रेवाल, सविता, अर्चना सह्यापक, के रमेश, संगीता अंगाॅम, बीएस ए अधिकारी, पारिवा डाॅब्रिअल, संदीप गुप्ता, बिलाल हबीब, पी के माथु, सुतिर्था दत्ता, दीपिका डोगरा, कमर कुरैशी, एस साधु कुमार, एकता शर्मा, वी के उनियाल, गोपी, रविन्दर नाथ त्रिपाठी, वी झाला, गीता गैरोला, सतकाशी शर्मा, शिवानी बर्थवाल, जयराज, शोभा भार्गव एवं अन्य इंजीनियरों, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकीविदों ने सहभाग किया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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