योगासन सीरीज: योग के यह तीन आसन बनायेंगे शरीर मजबूत
नियमित योग करने से से आप दिल और याद्दाश्त मजबूत होता है। सबसे अच्छी बात है कि योगा से आपके दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. आइये जानते हैं सुबह सुबह कौन से तीन आसन भरेंगे शरीर में नयी ऊर्जा-
भुजंगासन

इस आसन से न सिर्फ पेट की चर्बी कम होती है बल्कि बाजुओं, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर लचीला बनता है।
आसन करने की विधि…
पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं।
दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं।
दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े।अब शरीर के अग्रभाग को बाजुओं के सहारे उठाएं।
शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें. कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।
बालासन

बलासन उन लोगों के लिए अच्छा आसन है जिन्होंने योगासन की शुरुआत की हो। इससे पेट की चर्बी भी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गर्भवती महिलाएं या घुटने के रोग से पीड़ित लोग इसे न करें।
आसन करने की विधि..
घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एड़ियों पर हो.
गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें.
आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें.
कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं.
पश्चिमोत्तानासन

इस आसन से पेट के आसपास के हिस्सों (किडनी, लिवर, पैंक्रियाज) को सुचारू कर हमारी पाचन क्रिया को सही बनाता है. इस आसन क्रिया से आपके पेट पर दबाव पड़ता है, जिसका सीधा प्रभाव पेट की चर्बी पर पड़ता है। यदि आपका पेट आगे की ओर कुछ ज्यारदा ही निकल आया है तो इस आसन को नियमित रूप से करने से काफी प्रभाव देख सकते हैं। इससे पीठ दर्द भी सही होता है।
आसन करने की विधि…
इस आसन के लिए चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने पैरों को अपनी सीध में रख कर बैठ जाएं. ध्यान रहे कि पैर मजबूती से जमीन पर रखे हों.
अब सांस लेते हुए, अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. सांस छोड़ते समय पेट को अंदर की ओर ले जाते हुए आगे की ओर झुक जाएं.
अगर आप इस आसन को पहली बार कर रहे हैं तो शुरुआत में चाहें तो अपने घुटनों को हल्का मोड़ सकते हैं।
ध्यान दें कि आपने शरीर के सभी हिस्सों में किसी प्रकार का खिंचाव तो नहीं बना रखा है.
प्रत्येक सांस खींचने के साथ आप सही मुद्रा में पहुंचते जाते हैं. हर बार सांस खींचने पर आपकी रीढ़ सही मुद्रा में आती है और सांस छोड़ने पर पेट अंदर की ओर जाता है.
इस मुद्रा में एक मिनट तक रुके रहें और फिर इस अवधि को समय के साथ-साथ बढ़ाते जाएं। यदि डायरिया से पीड़ित हैं या पीठ की चोट से तो यह आसन न करें।
- रिलिजन वर्ल्ड ब्यूरो
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