सही दिशा में सोने के प्रभाव, परिणाम एवं दुष्प्रभाव : वास्तुशास्त्र

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जानिए सही दिशा में शयन/सोने के प्रभाव, परिणाम एवं दुष्प्रभाव

(इस लेख में वास्तु नियम, वैज्ञानिक और चिकित्स्कीय/मेडिकल कारण भी शामिल हैं)
वास्तु का हमारे जीवन और हम पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। वास्तुशास्त्र असल में भवन निर्माण और मानव जीवन से सम्बंधित नियमों-कायदों का दिशाओं पर आधारित एक शास्त्र है। जिसका सही से पालन करने पर जीवन सुख-शांतिमय बनाया जा सकता है। वास्तुशास्त्र में हर चीज के लिए दिशानुसार नियम निर्धारित किये गए हैं। सही दिशा में सोना भी उन्हीं में से एक है। इस बारे में विस्तार से जानिये उज्जैन के वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के इस लेख में।
हमारे जीवन मे दिशाओं का बहुत महत्व है, जिसका जिक्र वास्तुशास्त्र में दर्ज है। हमारे जीवन मे अनेक कष्ट एवं कठिनाइयाँ केवल दिशाओं के गलत उपयोग के कारण ही आती है। आप अपनी दिशाएं बदल के अपने जीवन मे सुख शांति ला सकते हैं।
वास्तु का भी हमारे जीवन में विशेष प्रभाव रहता है। मानसिक हालत कमजोर होने की स्थिति में हम डिप्रेशन या अवसाद का शिकार हो जाते हैं। ऐसा होने पर व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, भावनाओं और दूसरी गतिविधियों पर असर पड़ता है। डिप्रेशन से प्रभावित व्यक्ति अक्सर उदास रहने लगता है, उसे बात-बात पर गुस्सा आता है, भूख कम लगती है, नींद कम आती है और किसी भी काम में उसका मन नहीं लगता। लंबे समय तक ये हालत बने रहने पर व्यक्ति मोटापे का शिकार बन जाता है, उसकी ऊर्जा में कमी आने लगती है, दर्द के एहसास के साथ उसे पाचन से जुड़ी शिकायतें होने लगती हैं। कहने का मतलब यह है कि डिप्रेशन केवल एक मन की बीमारी नहीं है, यह हमारे शरीर को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। डिप्रेशन के शिकार किसी व्यक्ति में इनमें से कुछ कम लक्षण पाए जाते हैं और किसी में ज्यादा।
आमतौर पर शरीर में बीमारी होने पर हम उसके बायोलॉजिकल, मनोवैज्ञानकि या सामाजिक कारणों पर जाते हैं। यहां पर आज हम बीमारियों के उस पहलू पर गौर करेंगे, जो हमारे घर के वास्तु से जुड़ा है। कई बीमारियों की वजह घर में वास्तु के नियमों की अनदेखी भी हो सकती है। अगर आप इन नियमों को जान लेंगे और उनका पालन करना शुरू करेंगे तो आपको इन बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।
वास्तु शास्त्र अध्ययन से एक बात सामने आई है की जो लोग अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफल रहे हैं उन सभी में एक बात आम है – उनके घर अथवा ऑफिस जाने या अनजाने में वास्तु शास्त्र के मौलिक सिद्धांतों का पालन करते हैं । एक निर्मित भवन के भीतर जिस भी स्थान में वास्तु दोष पाया गया है, निवासियों को जीवन के उसी पहलू  में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है जिससे की वह स्थान जुड़ा हुआ है ।
वास्तु विज्ञान में हर क्रिया के लिए अलग-अलग दिशा और स्थान का वर्णन किया गया है। इन्हीं नियमों में एक है कि व्यक्ति को कभी मुख्य दरवाजे की ओर पैर करके नहीं सोना चाहिए। इस तरह से सोना अपशकुन भी माना जाता है। इसलिए अगर आप घर के मुख्य दरवाजे की ओर पैर रखकर सोते हैं तो अपने सोने के तरीके को बदलिए।
वास्तु विज्ञान के अनुसार मुख्य दरवाजे की ओर पैर का होना घर से बाहर निकलने का संकेत होता है। इस प्रकार से बाहर की ओर पांव करके मृत्यु के बाद ही व्यक्ति को लिटाया जाता है। इस दिशा में सोने से आयु कम होती है और व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार वास्तु में केवल घर के सुख समृद्धि हेतु ही उपाय नहीं बताये जाते बल्कि इसमें आपकी सेहत से जुड़े हुए भी कुछ उपाय दिए गये हैं. जिन पर ध्यान देकर अप अपने जीवन को सुखी और स्वस्थ बना सकते हैं. अच्छा स्वास्थ्य हर व्यक्ति के जीवन का आधार होता हैं. क्योंकि यदि व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं रहेगा तो उसके पास बेशक कितने ही सुख – साधन क्यों न हो. उनका आनंद वह नहीं उठा पाएगा. क्योंकि जब व्यक्ति का शरीर स्वस्थ रहता हैं तभी उसका मन प्रसन्न रहता हैं और वह अपने आस – पास होने वाली गतिविधियों में शामिल हो पाता हैं या अपने आस – पास उपस्थित साधनों का प्रयोग कर पाता हैं।
आज के समय में यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं तो हम उस व्यक्ति के बीमार होने के मनोवैज्ञानिक, बॉयोलोजिकल और सामाजिक कारणों को जाने की कोशिश करते हैं. लेकिन हम वास्तु के अनुसार होने वाली बिमारियों की तरफ ध्यान नहीं देते. अक्सर हम अनजाने में ही कुछ वास्तु नियमों को नजरंदाज कर देते हैं. जिसकी वजह से ही हमारी तबियत ख़राब हो जाती हैं. तो चलिए जानते हैं कि ऐसे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से व्यक्ति बीमार हो सकता हैं और उन कारणों का ध्यान रखकर एक सुखी और स्वस्थ जीवन जीने के योग्य बन सकता हैं।
वास्तु को अपना कर जीवन को और अधिक बेहतर बनाया जा सकता है। वास्तु शास्त्र में हर चीज़ को लेकर कुछ न कुछ बताया गया है ।
जैसे सोते समय अगर वास्तु का ध्यान रखा जाये तो टैंशन और कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है | वास्तुशास्त्र के अनुसार गलत दिशा में सोने से आप नींद न आने के साथ ही अन्य कई समस्याओं से भी ग्रस्त हो सकतें हैं इसलिए वास्तुशास्त्र में सोने से सम्बंधित कुछ नियम दिए गए हैं, जिनका पालन करने से अच्छी नींद के साथ ही आप कई लाभों को भी अर्जित के सकतें हैं।
तो किस दिशा में सिर करके सोना सबसे अच्छा होता है? पूर्व सबसे अच्छी दिशा है। पूर्वोत्तर ठीक है। पश्चिम चलेगा। नींद के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हम लेटे कैसे? हमारा सिर और पैर किस दिशा में होना चाहिए? यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो व्यक्ति को गहरी और अच्छी नींद प्राप्त होती है। सोने की सही अवस्था व्यक्ति को काफी ऊर्जा प्रदान करती है। गलत अवस्था में सोने पर कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावनाएं रहती हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार में इंसान की सोने की अवस्था भी ऊर्जा को प्रभावित करती है। सोते समय हमारा सिर पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं के विपरित सोना अशुभ माना गया है।अगर कोई विकल्प नहीं है तो दक्षिण। उत्तर बिल्कुल नहीं। जब तक आप उत्तरी गोलार्ध में हैं, यही सही है – उत्तर के अलावा किसी भी दिशा में सिर करके सोया जा सकता है। दक्षिणी गोलार्ध में, दक्षिण की ओर सिर करके न रखें।पूर्व या दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोने से दीर्घ आयु एवं अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। जबकि पश्चिम या उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं और इसे अशुभ भी माना जाता है।
जैसे सोते समय किस दिशा में पैर रखे जाये और किस दिशा में सर, इन सब से अपने जीवन में खुशियां लायी जा सकती हैं. आज हम आपको ऐसी ही कुछ वास्तु टिप्स देने जा रहे हैं।
जानिए वास्तु के अनुसार शयन/सोने के लिए नियम:
-उत्तर में सिर करके सोने का प्रभाव एवं परिणाम-
वास्तुशास्त्र द्वारा उत्तर दिशा में सिर करके सोना अनुशंसित नहीं है. वास्तव में, वास्तु के अनुसार, सोते समय किसी को भी अपने सिर को उत्तर में नहीं रखना चाहिए. केवल एक मृत शरीर का सिर उत्तर दिशा में रखा जाता है. यदि कोई इस स्थिति में सोता है तो वह बड़ी बीमारी का सामना कर रहा है और कई अच्छी चीजों से वंचित होकर सो रहा है.
-पूर्व में सिर करके सोने का प्रभाव् एवं परिणाम
वास्तु विज्ञान में पूर्व और उत्तर पूर्व दिशा को उर्जा का केन्द्र माना गया है। इसे स्वर्ग की दिशा भी कहते हैं। इस दिशा की ओर मुंह करके सोने से शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव में कमी आती है। लेकिन सूर्योदय की दिशा होने के कारण इस दिशा में मुंह करके सोने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए। अन्यथा सूर्योदय के समय आपका पांव सूर्य की ओर होगा। जिससे सूर्य देवता का अपमान होगा। पूर्व दिशा में सिर करके सोना स्मृति, एकाग्रता, अच्छे स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता के प्रति झुकाव बढ़ाता है |वास्तुशास्त्र के अनुसार छात्रों को स्मृति में वृद्धि, मस्तिष्क की अवधारण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने के लिए पूर्व दिशा में अपना सिर करके सोना चाहिए |
पश्चिम में सिर करके सोने का प्रभाव् एवं परिणाम
वास्तु के अनुसार, पश्चिम दिशा में सिर करके सोना भी अनुकूल है क्योंकि यह नाम, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा और समृद्धि को बढ़ाता है।
दक्षिण में सिर करके सोने का प्रभाव् एवं परिणाम
वास्तु के अनुसार, इस दिशा में सिर करके सोना सबसे अच्छा है। दक्षिण दिशा की ओर सिर के साथ सोना- धन, खुशी और समृद्धि को बढ़ाता है.  दक्षिण दिशा में सिर करके सोने से नींद की गुणवत्ता भी बढ़ती है |
दक्षिण-पश्चिम में सिर करके सोने का प्रभाव् एवं परिणाम
दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र वास्तु विज्ञान में सबसे शक्तिशाली चतुर्भुज है क्योंकि यह ऐसा क्षेत्र है जहां सकारात्मक ऊर्जा संग्रहित है. इस दिशा में सोना भी अच्छा माना जाता है।
जानिए क्यों होता हैं हानिकारक उत्तर दिशा में सर रखकर सोना?
शास्त्रों का मत है कि उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। इस दिशा की ओर मुंह करके सोने से उठते समय मुंह उत्तर की ओर होगा जिससे कुबेर की कृपा प्राप्त होगी। वहीं विज्ञान के अनुसार पृथ्वी के दोनों सिरों उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के बीच चुम्बकीय प्रवाह होता है। उत्तरी ध्रुव चुम्बक के पोजिटिव और दक्षिणी ध्रुव निगेटिव पोल की तरह काम करते हैं। हमारा सिर पोजेटिव और पैर निगेटिव एनर्जी प्रवाहित करता हैं।
सोते समय उत्तर की ओर मुंह करके सोने से सिरहाना दक्षिण की ओर होता है। इससे हमारा सिर वातावरण की निगेटिव एनर्जी को अट्रैक्ट करता है और पैर पॉजेटिव एनर्जी को अपनी ओर खींचता है। जिससे सोते समय मन में उथल-पुथल नहीं मचती है और अच्छी नींद आती है। जबकि इसके विपरीत उत्तर दिशा की ओर दिशा करके सोने से मन में हलचल मची रहती है और अच्छी नींद नहीं आती है। सुबह उठने पर सिर भारी लगता है। जिससे कार्य क्षमता प्रभावित होती है।
विज्ञान के दृष्टिकोण से देखा जाए तो पृथ्वी के दोनों ध्रुवों उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव में चुम्बकीय प्रवाह विद्यमान है। उत्तर दिशा की ओर धनात्मक प्रवाह रहता है और दक्षिण दिशा की ओर ऋणात्मक प्रवाह रहता है। इसी के आधार पर चुम्बक में भी दो पॉल साउथ (उत्तर) पॉल और नॉर्थ (दक्षिण) पॉल रहते हैं। यदि दो चुंबक के साउथ पॉल को मिलाया जाए तो वे चिपकते नहीं हैं बल्कि एक-दूसरे से दूर भागते हैं। जबकि अपोजिट पॉल्स मिलाए जाए तो चुंबक चिपक जाती है।
यही सिद्धांत सोने के संबंध में हमारे शरीर पर भी लागू होता है। हमारे सिर की ओर धनात्मक ऊर्जा और पैर की ओर ऋणात्मक ऊर्जा रहती है। यदि हम उत्तर दिशा की ओर सिर रखकर सोते हैं तो उत्तर दिशा का धनात्मक तरंगे और हमारे सिर की धनात्मक तरंगे एक-दूसरे को दूर भगाती हैं जिससे मस्तिष्क हलचल बढ़ जाती है और ठीक से नींद नहीं आ पाती है। जबकि दक्षिण दिशा की ओर सिर रखने पर पैरों की ऋणात्मक तरंगे वातावरण की धनात्मक तरंगों को आकर्षित करती हैं और सिर की धनात्मक तरंगे वातावरण की ऋणात्मक तरंगों को आकर्षित करती हैं जिससे हमारे मस्तिष्क में कोई हलचल नहीं होती है। इससे नींद अच्छी आती है। अत: उत्तर की ओर सिर रखकर नहीं सोना चाहिए।
जब आपको रक्त से जुड़ी कोई समस्या होती है, मसलन एनीमिया या रक्ताल्पता तो डॉक्टर आपको क्या सलाह देता है? आयरन या लौह तत्व। यह आपके रक्त का एक अहम तत्व है। आपने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रों (मैगनेटिक फील्ड) के बारे में सुना होगा। कई रूपों में अपनी चुंबकीयता के कारण पृथ्वी बनी है। इसलिए इस ग्रह पर चुंबकीय शक्तियां शक्तिशाली हैं।
अगर आप उत्तर की ओर सिर करते हैं और 5 से 6 घंटों तक उस तरह रहते हैं, तो चुंबकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा।
जब शरीर क्षैतिज अवस्था में होता है, तो आप तत्काल देख सकते हैं कि आपकी नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। शरीर यह बदलाव इसलिए लाता है क्योंकि अगर रक्त उसी स्तर पर पंप किया जाएगा, तो आपके सिर में जरूरत से ज्यादा रक्त जा सकता है और आपको नुकसान हो सकता है। अब अगर आप अपना सिर उत्तर की ओर करते हैं और 5 से 6 घंटों तक उसी अवस्था में रहते हैं, तो चुंबकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा। अगर आप एक उम्र से आगे निकल चुके हैं और आपकी रक्त शिराएं कमजोर हैं तो आपको रक्तस्राव और लकवे के साथ स्ट्रोक हो सकता है।
या अगर आपका शरीर मजबूत है और ये चीजें आपके साथ नहीं होतीं, तो आप उत्तेजित या परेशान होकर जाग सकते हैं क्योंकि सोते समय दिमाग में जितना रक्त संचार होना चाहिए, उससे ज्यादा होता है। ऐसा नहीं है कि एक दिन ऐसा करने पर आप मर जाएंगे। मगर रोजाना ऐसा करने पर आप परेशानियों को दावत दे रहे हैं। आपके साथ किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि आपका शरीर कितना मजबूत है।
पूर्व दिशा की ओर पैर करके सोना उचित नहीं माना जाता है। इससे जीवन में दोषों का प्रवेश हो सकता है। यह सूर्यदेव की दिशा है इसलिए पूर्व की और पैर नहीं करना चाहिए।
सोते वक्त यदि सिर दक्षिण दिशा की ओर तथा पैर उत्तर दिशा की ओर रखा जाए तो इससे पृथ्वी की ऊर्जा का प्रवाह सही बना रहता है।
दक्षिण दिशा की ओर सिर करने पर ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है और पैरों के जरिए बाहर निकल जाती है। यह शरीर का रक्त संचरण और पाचन तंत्र मे काफी मददगार रहते हैं।
चूंकि पूर्व दिशा से सूर्य उदय होता है, सूर्यदेव सम्पूर्ण जगत को प्रकाश देते हैं। वे जीवन के लिए ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। अगर पूर्व की ओर सिरहाना किया जाए तो यह फलदायक होगा।
यदि अप मन को शांत रखना चाहते है तो दक्षिण दिशा की ओर सिर रखकर सोना चाहिए है और अवसाद तथा तनाव पर नियंत्रण करना आसान होता है।
यदि दक्षिण दिशा की ओर सिर कर पाना संभव ना हो तो पश्चिम दिशा की और भी किया जा सकत है इस दौरान पैर पश्चिम की ओर रहते हैं।
आपका दिल शरीर के निचले आधे हिस्से में नहीं है, वह तीन-चौथाई ऊपर की ओर मौजूद है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ रक्त को ऊपर की ओर पहुंचाना नीचे की ओर पहुंचाने से ज्यादा मुश्किल है।
उज्जैन के वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार पारंपरिक रूप से आपसे यह भी कहा जाता है कि सुबह उठने से पहले आपको अपनी हथेलियां रगड़नी चाहिए और अपनी हथेलियों को अपनी आंखों पर रखना चाहिए। जो रक्त शिराएं ऊपर की ओर जाती हैं, वे नीचे की ओर जाने वाली धमनियों के मुकाबले बहुत परिष्कृत हैं। वे ऊपर मस्तिष्क में जाते समय लगभग बालों की तरह होती हैं। इतनी पतली कि वे एक फालतू बूंद भी नहीं ले जा सकतीं। अगर एक भी अतिरिक्त बूंद चली गई, तो कुछ फट जाएगा और आपको हैमरेज (रक्तस्राव) हो सकता है।
ज्यादातर लोगों के मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है। यह बड़े पैमाने पर आपको प्रभावित नहीं करता मगर इसके छोटे-मोटे नुकसान होते हैं। आप सुस्त हो सकते हैं, जो वाकई में लोग हो रहे हैं। 35 की उम्र के बाद आपकी बुद्धिमत्ता का स्तर कई रूपों में गिर सकता है जब तक कि आप उसे बनाए रखने के लिए बहुत मेहनत नहीं करते। आप अपनी स्मृति के कारण काम चला रहे हैं, अपनी बुद्धि के कारण नहीं।
वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री से जानिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु सिद्धांत-
सोने की सही दिशा (Sleeping Direction) – अच्छा स्वास्थ्य काफी कुछ हमारे सोने की अवस्था पर भी निर्भर करता हैं. जैसे यदि आप अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर करके सोते हैं तो आपका स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहेगा. इसके अलावा यदि आपको पित्त की शिकायत हैं तो आप अपने दाहिने हाथ की ओर करवट लेकर सो सकते हैं तथा यदि आपको कफ की शिकायत हैं. तो वास्तुशास्त्र के अनुरूप आपको बाई और करवट लेकर सोना चाहिए |
पलंग (Bed) – वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार वास्तुशास्त्र में यह मान्यता हैं कि हमेशा पलंग की लम्बाई सोने वाले व्यक्तियों की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए. इसके साथ ही पलंग पर छोटा या बड़ा कैसा भी दर्पण नहीं लगा होना चाहिए. क्योंकि यदि दर्पण लगा होगा और सोने से पहले आप उसमें अपना प्रतिबिम्ब देखते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता हैं और आपकी आयु भी कम होती हैं.
दर्पण (Mirror) – वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार कभी भी दर्पण को अपने कमरे के ऐसे स्थान पर न लगायें जहाँ से आपको अपना प्रतिबिम्ब लेटी हुई अवस्था में दिखाई दें. इसके सतह ही बेड को कभी भी दीवार के कोने से सटाकर बिल्कुल न रखें. क्योंकि इसका असर भी आपकी सेहत पर पड़ता हैं.
बीम (Beem) – घर बनवाते समय बीम को भी घर के बीचों बीच न बनवाएं. क्योंकि इससे दिमाग से सम्बन्धित परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं.
अग्नि (Fire) – वास्तुशास्त्र के अंतर्गत घर में बिमारियों के पैदा होने का सबसे बड़ा कारण हैं घर में अग्नि का गलत दिशा में का प्रयोग होना. यदि आप दक्षिण मुखी घर में रहते हैं तो कभी – भी अपने घर की दक्षिण दिशा में आग न जलाएं.
फर्नीचर (Furniture) – वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अक्सर लोग अपने घरों में फर्नीचर ड्राइंग रूम के बीच में रखते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के बीच में फर्नीचर नहीं रखने चाहिए. घर के बीच का स्थान ब्रहमस्थल होता हैं. इस स्थान में किसी तरह के पत्थर का या कंकरीट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए तथा प्रयास करना चाहिए कि यह स्थाम अधिकतर खाली ही रहे. क्योंकि इससे घर के सदस्यों की तबियत अधिकतर समय ख़राब रहती हैं.
सीढियाँ (Stairs) – वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि आप घर बना रहे हैं तो अपने घर की सीढियों को घर के कोने में बनवाएं. क्योंकि जो व्यक्ति अपने घर में सीढियाँ बिल्कुल घर के बीच में बनवाते हैं. उनकी तबियत अधिकतर ख़राब रहती हैं.
मुख्य द्वार और रसोई (Mein Gate and Kitchen) – यदि आपके घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने रसोई घर हैं. जिससे की आपके घर के सामने से आने जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आपका घर दिखाई देता हैं. तो वास्तु के अनुरूप इससे घर की मुख्य महिला के द्वारा बनाये गये भोजन में स्वाद नहीं आता तथा उसकी तबियत अधिकतर समय खराब रहती हैं |इसके यदि आपके घर की रसोई बड़ी हैं तो आप अपना भोजन रसोईघर में ही बैठ कर करें. इससे यदि आपके घर के किसी सदस्य की कुंडली में राहु के दुष्ट प्रभाव हैं तो उस व्यक्ति की कुंडली में से ये प्रभाव नष्ट हो जायेंगे |
उत्तर–पूर्व में शौचालय : वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार वास्तु -शास्त्र के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भवन का उत्तर पूर्वी कोना ईशान कोने के नाम से जाना जाता है । शास्त्रों के अनुसार ईशान भगवान शिव का नाम है । अतः यह कोना वास्तव में एक प्रार्थना घर अथवा ध्यान कक्ष बनाने के लिए आदर्श स्थान है । यहाँ शौचालय रखने से इस क्षेत्र की दिव्य ऊर्जा पूर्ण रूप से प्रभावित होती है एवं क्षीण हो जाती है जिसके कारणवश गंभीर एवं दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्यायएं, विशेष रूप से मस्तिष्क प्रणाली से सम्बंधित, उत्पन्न होती हैं । वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी की भू-चुम्बकीय ऊर्जा का प्रवाह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होता है । अतः यहाँ शौचालय बनाने से इन ऊर्जाओं का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो जाता है । यह पाया गया है की घर का कोई एक अथवा प्रतेयक सदस्य लंबे समय तक बीमार रहता है तथा कोई भी दवाईयां उन्हें पूर्ण रूप से ठीक करने में सक्षम नहीं रहती । जिस प्रकार इस शौचालय में फ्लश किया जाता है , उसी प्रकार ज्ञान एवं रचनात्मकता भी फ्लश हो जाती है । निवासी स्पष्ट रूप से सोच नहीं पाते और जल्दबाज़ी में निर्णय लेते है जिनके कारण उन्हें जीवन के सभी पहलुओं में नुक्सान भुगतना पड़ता है । बच्चों में एकाग्रता की कमी आती है जिसके कारण वह परीक्षा में अच्छे अंक लाने में असफल होते हैं ।
वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि किसी रोगी व्यक्ति को अगर पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन दिया जाए तो वो जल्दी स्वस्थ हो सकता है दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से यश की प्राप्ति होती है। पर अगर आपके माता पिता जीवित है तो आपको दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन नही करना चाहिये। इनके लिये पूर्व या पश्चिमी दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
अगर आपकी आर्थिक स्थिति चिताँजनक है तो पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करे इससे आर्थिक स्थिति मे सुधार आता है ।इस तरह दिशाओ मे बदलाव लाकर अपने जीवन मे सुधार ला सकते है।
 
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पंडित दयानन्द शास्त्री,
(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)
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