इस बार श्रावण की शुरूआत छह जुलाई से होने जा रही है इसी दिन सोमवार है। इस बार श्रावण मास में कुल 5 सोमवार पड़ेंगे। छह जुलाई के बाद तीन अगस्त को आखिरी सोमवार पर श्रावण मास का समापन होगा।
लंबे अरसे के बाद इस साल सावन के पांच सोमवार होंगे। यह भगवान शिव की पूजा- पाठ के हिसाब से शुभ संकेत देने वाले हैं। इससे एक दिन पहले 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है।
गुरु और शिष्य की इस पौराणिक परंपरा के निर्वहन और मिलन में इस बार कोरोना आड़े आएगा। प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार कहीं पर भी भीड़ नहीं करनी है।
ऐसे में यह आयोजन ऑनलाइन होंगे अथवा गुरु पूजन घरों में मूर्ति रखकर या फिर ऑनलाइन पूजा पाठ के माध्यम से होगी। इस बार श्रावण में पांच सोमवार होंगे।
सावन में भगवान शिव की पूजा का महत्त्व
भगवान शिव की पूजा-पाठ का महत्व सावन के महीने में विशेष होता है। खासतौर से कुंवारी कन्याओं और विवाहिताओं के लिए। वहीं इस बार यह अनूठा संयोग सोमवार को शुरू होकर सोमवार को ही संपन्न हो रहा है।
इसलिए भी इसका अलग महत्व माना जा रहा है। श्रावण माह भगवान शिव की महाआराधना का पर्व माना गया है। श्रावण प्रतिपदा को सोमवार, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैद्धति योग तथा कोलव नामक करण रहेगा, वहीं चंद्रमा मकर राशि में विचरण करेगा।
पहला सोमवार 6 जुलाई को, दूसरा सोमवार 13 जुलाई को, तीसरा सोमवार 20 जुलाई को, चौथा सोमवार 27 जुलाई को और पांचवां व अंतिम सोमवार 3 अगस्त को रहेगा। इस वर्ष पांचों सोमवार को विशेष योग रहेंगे। इन योग में भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक करना बहुत ही श्रेष्ठ रहेगा।
पहले सोमवार को करें शिव के साथ लक्ष्मीनारायण की भी पूजा
छह जुलाई को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैधृति योग, कौलव करण, प्रतिपदा तिथि रहेगी। यह अभीष्ट फलदायक वन सोमवार रहेगा। मान्यता है कि इस दिन शिव तत्व की साधना और पूजा-अर्चना मंगलकारी, अनिष्ट विनाशक सिद्ध होगी।
दूसरा सोमवार
दूसरा सोमवार 13 जुलाई को होगा। इस दिन अष्टमी तिथि होगी, जिसके स्वामी शिव हैं। सोमवार को शिव तिथि का होना विशेष संयोग कारक है। दूसरे सोमवार को रेवती नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी पूषण नामक सूर्य है। समस्त रुके हुए कार्य जल्दी ही संपन्न होंगे।
तीसरे सोमवार को ऋषि-पितृ-गो पूजन
सावन का तीसरा सोमवार 20 जुलाई को रहेगा। अमावस्या तिथि रहेगी जो हरियाली अमावस्या के रूप में मनेगी। इस दिन सोमवती अमावस्या विशेष फलदायी रहेगी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन ऋषि, पितृ और गौ पूजन करना भी विशेष लाभप्रद रहेगा।
चतुर्थ सोमवार दिलाएगा मान सम्मान
श्रावण मास का चौथा सोमवार 27 जुलाई को होगा। सुबह 7:10 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि रहेगी। चित्रा नक्षत्र, साध्य योग, वाणिज करण विद्यमान रहेंगे। इस दिन सूर्य और विश्वकर्मा की पूजा विशेष उपयोगी रहेगी। इस पूजा से राजनीतिक उत्थान, उन्नति, यश, मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भूमि-भवन की भी प्राप्ति शीघ्र होगी।
पांचवें सोमवार
पांचवां और अंतिम श्रावण सोमवार तीन अगस्त को रहेगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, प्रीति तथा आयुष्मान योग रहेगा। इस दिन शिव पूजा के साथ भगवान सत्यनारायण, विश्व देव तथा ब्राह्मणां की पूजा तथा सम्मान देने से स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अन्नदान करना चाहिए।
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