मासिक धर्म पैड के लिये परमार्थ निकेतन निकालेगा पदयात्रा

 In Hinduism

ऋषिकेश, 5 नवम्बर। परमार्थ निकेतन में महिला सशक्तीकरण का अद्भुत कार्य देखने को मिला। हापुड, उत्तरप्रदेश से दो महिलायें परमार्थ निकेतन पधारी उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती से मुलाकात की।
स्वामी जी और साध्वी जी के साथ हापुड में पैड बनाने वाली मशीन लगायी गयी उस के बारे में चर्चा की। उन्होने बताया  कि किस प्रकार वे पहले दो महिलायें थी फिर धीरे-धीरे उन्होने उस गांव के लोगों को समझाया और पैड बनाने के लिये राजी किया। अब छः महिलाओं का दल प्रतिदिन लगभग छः हजार पैड बनाती है उनका नेटवर्क अभी 40 गांवों में फैला हुआ है जहां पर वे अपने द्वारा बनायें पैडों को वितरित करती है।


सच्ची सहेली संस्था की डॉ. सुरभि सिंह जी के साथ मिलकर पैड यात्रा को पूरे भारत में ले जाने के लिये विचार विमर्श किया गया। जिसमें स्नेहा जी, सुमन जी, सुभाष जी, गंगा नन्दिनी जी और युथ संगठन प्रज्ञा चारू जी ने सहभाग किया।

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सच्ची सहेली के साथ गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन और डिवाइन शक्ति फाउण्डेशन के मिलकर इस कार्य को आगे ले जाने पर चर्चा हुई. स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पैड यात्रा कश्मीर से कन्याकुमारी और ऋषिकेश से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा होगी। संसार के जीवन चक्र को आगे बढ़ाने में जिस मासिक चक्र का अहम योगदान है वह शर्म का नहीं गर्व का विषय है। यह एक नन्ही सी बेटी को ईश्वर के द्वारा दिया उपहार है जिसके माध्यम से वह नियंता के द्वारा बनायी इस सृष्टि में अपना भी योगदान दे पायेगी। मै तो समझता हूँ बेटी का मासिक धर्म आने के पश्चात हर माता-पिता को गर्व होना चाहिये की उनकी प्यारी बेटी, विधि के विधान को आगे बढ़ाने में सक्षम हो गयी है। मासिक धर्म के विषय में अब चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है। उन्होने बताया कि परमार्थ निकेतन में मासिक धर्म सुरक्षा और स्वच्छता विषय पर प्रशिक्षण देने का यही उद्देश्य है कि भारतीय समाज अपनी रूढ़ीवादी परम्पराओं से उपर उठकर इस बदलाव को स्वीकर करे, बेटियों को मासिक धर्म के विषय में सही जानकारी प्रदान करे और उन्हे सजग बनाये। मासिक धर्म के विषय में सबसे पहले माताओं को अपनी हिचक से बाहर आना होगा अपनी चुप्पी को तोड़ना होगा तथा इस पर अपनी बेटियो से खुलकर बात करनी होगी।
स्वामी जी और साध्वी जी के साथ सुमन जी, स्नेहा जी, सुभाष जी और अन्य श्रद्धालुओं ने विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।

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