क्यों कहलाए जैन मुनि तरूणसागर महाराज राष्ट्रीय संत ?

 In Jainism, Saints and Service

क्यों कहलाए जैन मुनि तरूणसागर महाराज राष्ट्रीय संत ?

मुनि तरुणसागर महाराज की प्रवचनकला दूसरे संत-मुनियों से हटकर थी। उनके प्रवचन प्रवाह में आरोह-अवरोह शैली का भरपूर उपयोग होता है। विचारों की इसी सम्प्रेषणकला ने उन्हें क्रान्तिकारी संत बना दिया।

उनके प्रवचन जैन धर्म से जुड़े लोगों के लिए ही नहीं होते, अपितु सभी धर्म से जुड़े लोगों के लिए समान रूप से उपयोगी होते थे। वे महावीर की शिक्षाओं को मंदिरों तक ही सीमित न रख उसे आमजन के लिए मूल्यवान बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि मुनि तरुणसागर अपने प्रवचन प्रायः मंदिरों से हटकर पार्को-चौराहों और खुले स्थानों में दिया करते थे। उनके प्रवचनों को सुनकर तनावग्रस्त और निराश जीवन जी रहे लोगों के मन मुस्कराने लगते. धर्म, राजनीति व सामाजिक विषयों पर भी वे लुहार के हथौड़े-सा प्रहार करने से नहीं चूकते। प्रवचनों में सर्वधर्म समभाव की भावना निहित होती है. मुनिश्री ने कड़वे प्रवचनों की पुस्तकें लिखकर अपनी अलग पहचान स्थापित की। सुनिए….

 तेरह साल की उम्र में छोड़ा घर

जैन मुनि तरुण सागर ने मात्र 13 साल की उम्र में वैरागी बनने के लिए घर छोड़ दिया था. उन्होंने छत्तीसगढ़ में 1981 में दीक्षा ली थी. इस दौरान उन्होंने क्षुल्लक को अपना लिया. क्षुल्लक शब्द जैन धर्म में दो वस्त्र धारण करनेवाले व्रतियों के लिए प्रयोग किया जाता है. इसके बाद पवन कुमार जैन से उनका नाम तरुण सागर पड़ गया.

जलेबी खाते-खाते विचार आया

जैन मुनि तरुण सागर को छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान जलेबी खाते समय वैराग्य का विचार आया था. उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था, मुझे जलेबियां खाना बहुत पसंद है. इस दौरान उन्होंने बताया कि मैं एक दिन स्कूल से घर जा रहा था. इसी दौरान एक दुकान पर रुककर जलेबी खाने लगा. उन्होंने बताया कि पास में ही आचार्य पुष्पधनसागरजी महराज का प्रवचन चल रहा था. प्रवचन के दौरान ही पुष्पधनसागरजी महराज ने कहा, तुम भी भगवान बन सकते हो. उन्होंने बताया कि ये शब्द जब मेरे कानों में पड़े तो जलेबी का रस जाता रहा और भगवान बनने का रस आ गया.

20 वर्ष की उम्र में दिगंबर मुनि बने

जैन मुनि तरुण सागर 20 वर्ष की उम्र में दिगंबर मुनि बने. उन्होंने आचार्य पुष्पदंत सागर से राजस्थान के बागीदौरा में दीक्षा ली. जहां क्षुल्लक दो वस्त्रों को पहनते हैं, वहीं दिगंबर साधु कोई वस्त्र धारण नहीं करते और कठोर तप करते हुए जीवन व्यतीत करते हैं.

मध्य प्रदेश और हरियाणा विधानसभा में संबोधन 

जहां एकतरफ जैन मुनि राजनीतिज्ञों से जुड़ने से बचते हैं वहीं तरुण सागर अक्सर अतिथि के रूप में राजनेताओं से मिलते रहे थे. उन्होंने 2010 में मध्य प्रदेश विधान सभा और 26 अगस्त 2016 में हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया था.

फर्जी बाबाओं की जांच 

उन्होंने देश में फर्जी बाबाओं की जांच करने और उन्हें सजा दिलवाने की बात भी कही थी. तरुण सागर ने कहा था कि देशभर में लगभग 1400 फर्जी बाबा हैं जिनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए.

संघ की बेल्ट बदली

तरुण सागर को वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने विजयदशमी के कार्यक्रम में बुलाया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि संघ जिस चमड़े की बेल्ट का इस्तेमाल करते हैं वह अहिंसा के विपरीत है. इसके बाद आरएसएस ने अपनी ड्रेस से चमड़े की बेल्ट की जगह कैनवस की बेल्ट इस्तेमाल करनी शुरू कर दी।

आज, 26 जून को होता है अवतरण दिवस

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