मॉं ब्रह्मचारिणी : नवरात्रि की द्वितीय देवी
देवी दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी। देवी के इस स्वरूप का संबंध मंगल से है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करने से मंगल ग्रह से जुड़ी समस्त पीड़ाएं दूर हो जाती है। इससे रोग दूर होते हैं और आत्मविश्वास, आत्मबल में वृद्धि होती है।नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना में गहरे नीले (रॉयल ब्लू) रंग का उपयोग लाभदायक रहता हैं।

वृषभ एवम तुला राशि वाले जातक को श्री विद्या में माता षोडशी या माता ब्रह्मचारिणी की उपासना करनी चाहिए। नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा की ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा होती है। मातारानी को को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। देवी को इस दिन पान-सुपाड़ी भी चढ़ाएं।
मां ब्रह्मचारिणी का यह मंत्र करेगा आपका कल्याण
ॐ देवी ब्रह्मचारिणी नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
वह जिसका कोई आदि या अंत न हो,वह जो सर्वव्याप्त,सर्वश्रेष्ठ है और जिसके पार कुछ भी नहीं।

ब्रह्मचारिणी का अर्थ है वह जो असीम, अनन्त में विद्यमान, गतिमान है। एक ऊर्जा जो न तो जड़ न ही निष्क्रिय है, किन्तु वह जो अनन्त में विचरण करती है। यह बात समझना अति महत्वपूर्ण है – एक गतिमान होना, दूसरा विद्यमान होना। यही ब्रह्मचर्य का अर्थ है।इसका अर्थ यह भी है की तुच्छता, निम्नता में न रहना अपितु पूर्णता से रहना। कौमार्यावस्था ब्रह्मचर्य का पर्यायवाची है क्योंकि उसमें आप एक सम्पूर्णता के समक्ष हैं न कि कुछ सीमित के समक्ष। वासना हमेशा सीमित बँटी हुई होती है, चेतना का मात्र सीमित क्षेत्र में संचार। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी सर्व-व्यापक चेतना है।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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