माँ बगलामुखी से जुड़े प्रभावशाली मन्त्र : जाप का तरीका और प्रभाव
- देवी बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या है
- माता बगलामुखी की उपासना से शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है
- मां बगलामुखी का बीज मंत्र साधक की समस्त मनोकानाओं की पूर्ति कर सकता हैं
शत्रुओं पर विजय प्राति, शत्रु भय से मुक्ति तथा प्रभावशाली वाक-शक्ति की प्राप्ति के लिए मां बगलामुखी की साधना की जाती है। देवी बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या है। माता बगलामुखी की उपासना से शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद-विवाद में विजय प्राप्त होती है। बगलामुखी मंत्र सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति दिलाते है, रोगों की पुरानी समस्याओं और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करते है और संरक्षण देते है। ऐसा कहा जाता है की बगलामुखी मंत्र के नियमित जप से अहंकार नष्ट होता है और शत्रुओं का नाश होता है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि माँ बगलामुखी की इस साधना में एक विशेष संख्या में बगलामुखी मंत्र के जाप का विधान है। सामान्य शत्रु बाधा दूर करने के लिए इस मंत्रों का कम से कम 10 हजार बार जाप करना करना चाहिए, लेकिन अगर कोई बहुत बड़ी शत्रु बाधा हो या शत्रुता में जीवन-मरण का प्रश्न हो तो ऐसे में कम से कम 1 लाख बार इस मंत्र का जाप करने वाला कभी भी शत्रु से हारता नहीं। ऐसे व्यक्ति को हर प्रकार के वाद-विवाद में विजय मिलती है और वह अपनी बातों को सही सिद्ध कर पाता है।
कई जगहों पर मां बगलामुखी के सर्व कामना पूर्ति बीज मंत्र को अशुद्ध रूप से लिखा पाया जाता है, और अगर कोई अशुद्ध मंत्र का उच्चारण या जप करता है तो उसे कोई बड़ी हानि भी हो सकती है । मंत्र के जानकार कहते है कि वहीं यदि इस मन्त्र का सही उच्चारण किया जाय तो मां बगलामुखी का बीज मंत्र साधक की समस्त मनोकानाओं की पूर्ति कर सकता हैं । बगलामुखी माता के उक्त मंत्र का जप करें, जप से विधिवत माँ बगलामुखी का पूजन करें। एवं निश्चित संख्या में जप पूरा होने के बाद गाय के शुद्ध घी से 251 बार हवन करें। हवन में आम, पलाश, गुलर आदि का समिधाओं का उपयोग करें।
बगलामुखी मंत्र के लिए कुल जप संख्या – 1,25000 बार
बगलामुखी मंत्र जप का श्रेष्ठ समय या मुहूर्त- शुक्ल पक्ष, चन्द्रावली, शुभ नक्षत्र, शुभ तिथि, रात्रि समय
मंत्र के शुद्ध और भावपूर्ण उच्चारण से शत्रु को शांत किया जा सकता है, मुकदमा भी जीत सकते है, आधिदैविक और आधिभौतिक समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है, बंधनों से मुक्ति मिल सकती है, जेसै कोई बेकसूर व्यक्ति जेल में है या जेल जाने के आसार हैं तो इस मंत्र की साधना से 100% बच सकता हैं । भूत प्रेत और जादू टोन की बाधा से रक्षा होती है, सारे डर खत्म हो जाते है। धन संबंधित समस्या दूर हो जाती हैं । इस साधना से कोई भी अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बना सकता है।
शुद्ध बगलामुखी बीज मंत्र
ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखम पदम् स्तम्भय ।
जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ।।
बगलामुखी मन्त्र के प्रारंभ में ह्री या ह्लीं दोनों में से किसी भी बीज का प्रयोग किया जा सकता है, ह्रीं तब लगायें जब आपका धन किसी शत्रु ने हड़प लिया है और ह्लीं का प्रयोग शत्रु को पूरी तरह से परास्त करने के लिए ही करें। इससे शत्रु को वश में करने की अद्भुत शक्ति मिलती है, लेकिन यह सब एक दो दिन में नहीं होगा बल्कि इसके लिए संकल्प लेकर कम से कम 40 दिन का विशेष अनुष्ठान करने का नियम हैं। बिना नियमों की जानकारी इस साधना को नहीं करना चाहिए। अन्यथा समस्या से छूटकारा नहीं सकेगा। माँ बगलामुखी अपने भक्त से श्रद्धा और विशवास चाहती हैं, यदि आपको पूरी श्रद्धा है और नियमों के साथ साधना करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। नलखेड़ा, मध्यप्रदेश स्थित विश्वप्रसिद्ध मां बगलामुखी मन्दिर, जो महाभारत कालीन एवम पांडवों द्वारा स्थापित हैं, में यह अनुष्ठान सम्पन्न करवाने हेतु पंडित दयानन्द शास्त्री जी से सम्पर्क कर सकते हैं।
शत्रु को परास्त करने का मंत्र
अगर कोई शत्रु अत्यंत शक्तिशाली हो तो ऐसी अवस्था में यदि मां बगलामुखी के इस मन्त्र को नीचे लिखे अनुसार शुद्धता पूर्वक उच्चारण कर जप किया जाए तो शत्रु से तुरंत सुरक्षा मिलती है ।
ॐ ह्लीं बगलामुखी अमुक (शत्रु का नाम लें ) दुष्टानाम वाचं मुखम पदम स्तम्भय स्तम्भय ।
जिव्हां कीलय कीलय बुद्धिम विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ।।
इस मन्त्र में अमुक शब्द के स्थान पर शत्रु का नाम लेकर कम से कम 11 सौ बार एक दिन में जप करें, ऐसा करने से मां बगुलामुखी साधक की रक्षा करेंगी एवं साधक का शत्रु या तो किसी मुसीबत में फंस जाएगा या फिर कोई भारी गलती करके स्वयं ही फंस जाएगा ।
सम्पुट युक्त बगलामुखी मन्त्र
सम्पुट मन्त्र की शक्ति को दोगुना करने के लिए किया जाता है, किसी भी मन्त्र की शक्ति को सम्पुट द्वारा बढ़ने के लिए साधक को पहले बिना सम्पुट से निश्चित संख्या में जप करना चाहिए, उसके बाद ही सम्पुट लगाया जा सकता है । मन्त्र के आदि में और अंत में बीज लगाने से मन्त्र सम्पुट युक्त हो जाता है ।
यह होते हैं बगलामुखी मंत्र के लाभ
ऐसा माना जाता है की बगलामुखी मंत्र में चमत्कारी शक्तियां है। पंडित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार माँ बगलामुखी मंत्र शत्रुओं पर विजय सुनिश्चित करने के लिए जाना जाता है। प्रशासन और प्रबंधन के लोगों को, नेताओं को, ऋण या मुकदमे की समस्याओं का सामना कर रहे लोगो को बगलामुखी मंत्र का विशेष सुझाव दिया जाता है। बगलामुखी मंत्र का उपयोग व्यापार में क्षति का सामना कर रहे व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है , जैसे वित्तीय समस्याएं, झूठी अदालत के मामले, निराधार आरोप, ऋण की समस्याएं, व्यापार में बाधाएं आदि। प्रतियोगी परीक्षाओं और वाद-विवाद आदि में भाग लेने वाले लोगों के लिए भी बगलामुखी मंत्र प्रभावी है। बगलामुखी मंत्र अनिष्ट आत्माओं और अशुभ दृष्टि से सुरक्षित रहने में सहयोग करता है। नलखेड़ा, मध्यप्रदेश स्थित विश्वप्रसिद्ध मां बगलामुखी मन्दिर, जो महाभारत कालीन एवम पांडवों द्वारा स्थापित हैं, में यह अनुष्ठान सम्पन्न करवाने हेतु पंडित दयानन्द शास्त्री जी से सम्पर्क कर सकते हैं।
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Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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