विदेशों में भी हिंदू नव वर्ष की धूम

भारत में इस बार नव संवत्सर को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह और जागरुकता दिखी। हिंदू संगठनों की ओर से कई आयोजन किए गए जिनमें युवाओं ने भी बढ़–चढ़कर हिस्सा लिया। सोशल मीडिया पर भी जमकर नव संवत्सर की बधाई के संदेशों का आदान–प्रदान हुआ। सरकार की ओर से भी कई आयोजन किए गए। लोगों को नव संवत्सर और इसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
एक और खास बात यह कि भारत के साथ ही विदेशों में भी हिंदू नववर्ष की धूम रही।पिछले कुछ सालों से विदेशों में हिंदू नववर्ष मनाने का सिलसिला शुरू हुआ है जो इसबार और आगे बढ़ा। भारत के बाहर कई दूसरे देशों में भी इसबार से हिंदू नववर्ष मनाने की शुरुआत हुई है।
अमेरिका और सिंगापुर में सूर्य को अर्घ्य के साथ स्वागत
भारत के साथ ही इस बार अमेरिका और सिंगापुर के शहरों में भी हिंदू नव वर्ष मनाया गया। सूर्य को अर्घ्य देकर इन देशों के लोगों ने नव संवत्सर का स्वागत किया। इन देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों ने हिंदू नव वर्ष मनाने की शुरुआत करते हुए उत्साह और उमंग से नव संवत्सर का स्वागत किया।
इंडोनेशिया में साइलेंस डे के रूप में मनाया नव वर्ष
इंडोनेशिया की राजधानी बाली में डे ऑफ साइलेंस के रूप में नव संवत्सर मनाया गया। 24 घंटे के लिए लोगों ने दुनिया से कटकर घर के अंदर रहकर ही मानसिक–आत्मिक शांति और शुचिता के लिए मौन रखा। इस दौरान बाली में इंटरनेट, मोबाइल, टीवी, और अन्य उपकरण बंद रहे। शांति इनती के मानो पूरा शहर थम गया हो। सड़कों से लेकर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, थिएटर, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर भी एकदम शांति थी। बाली में इसे न्येपी त्योहार के रूप में मनाया जाता है जो कि बाली में हिंदू समुदाय का प्रमुख त्योहार है। बाली के लोगों ने इन बार डे ऑफ साइलेंस के दौरान टीवी और इंटरनेट पर बैन की मांग प्रमुख रूप से की थी। इंडोनेशिया में इस बार न्येपी का मुहूर्त 17 मार्च सुबह 6 बजे से 18 मार्च की सुबह तक निकला था। न्येपी पर इंडोनेशिया में अवकाश रहता है।
डे ऑफ साइलेंस से पहले होता है जश्न
न्येपी से पहले यहां ओगो–ओगो उत्सव (नीचे वीडियो देखें) भी मनाया जाता है जिसमें डे ऑफ साइलेंस से पहले जमकर नववर्ष का जश्न होता है। इस दौरान कई परंपराएं निभाई जाती हैं और नववर्ष का स्वागत किया जाता है।
हजारों साल पुरानी है परंपरा
एक हजार साल से भी पुरानी ये परंपरा हिंदू नववर्ष पर मनाई जाती है।प्रमुख रूप से ये उत्सव बाली में मनाया जाता है लेकिन लॉम्बॉक एवं कई गांवों में भी इसकी धूम देखने को मिलती है।
रिपोर्ट– डॉ. देवेन्द्र शर्मा
ईमेल:sharmadev09@gmail.com
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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