क्या बिना धर्म के नैतिक जीवन संभव है?

अक्सर यह मान लिया जाता है कि नैतिकता का आधार धर्म है। समाज में यह धारणा प्रचलित है कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक नहीं है, तो वह नैतिक भी नहीं हो सकता। लेकिन आधुनिक समय में यह सवाल तेजी से उभर रहा है—क्या बिना धर्म के भी एक नैतिक, जिम्मेदार और संवेदनशील जीवन जिया जा सकता है? इस प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है, लेकिन गहराई से विचार करने पर यह स्पष्ट होता है कि… Continue reading क्या बिना धर्म के नैतिक जीवन संभव है?

 January 12, 2026

What Is the Difference Between Spirituality and Religion?

In modern discussions about faith, belief, and personal growth, the terms spirituality and religion are often used interchangeably. However, they are not the same. Many people today identify as “spiritual but not religious,” which raises an important question: what is the difference between spirituality and religion, and why does this distinction matter? Understanding this difference helps individuals make sense of their beliefs and choose a path that truly resonates with their inner values. Understanding Religion… Continue reading What Is the Difference Between Spirituality and Religion?

 January 12, 2026

क्या धर्म सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित है?

जब भी धर्म की बात होती है, अधिकतर लोगों के मन में सबसे पहले पूजा-पाठ, मंदिर, मस्जिद, व्रत, उपवास और धार्मिक अनुष्ठान की छवि उभर आती है। बहुत-से लोग मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति पूजा करता है, नियम निभाता है, तो वह धार्मिक है; और अगर नहीं करता, तो वह धर्म से दूर है। लेकिन सवाल यह है कि क्या धर्म वास्तव में सिर्फ पूजा-पाठ तक ही सीमित है? सच यह है कि धर्म… Continue reading क्या धर्म सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित है?

 January 12, 2026

Somnath Temple : जब इतिहास टूटता है, लेकिन आस्था खड़ी रहती है

Somnath Temple : History of Somanth Temple अरब सागर की लहरें आज भी उसी लय में उठती-गिरती हैं, जैसे सदियों पहले उठती थीं। फर्क बस इतना है कि उनके सामने खड़ा सोमनाथ मंदिर अब केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक स्मृति बन चुका है। यह स्मृति टूटने की नहीं, बार-बार खड़े होने की है। एक मंदिर, अनेक कालखंड सोमनाथ भारत के उन गिने-चुने स्थलों में है, जहाँ पुराण, इतिहास और वर्तमान एक… Continue reading Somnath Temple : जब इतिहास टूटता है, लेकिन आस्था खड़ी रहती है

 January 11, 2026

सोमनाथ 1000 वर्ष महोत्सव: आस्था, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना का ऐतिहासिक संगम

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – देश के सम्मान का महोत्सव सोमनाथ (गुजरात): भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ने इतिहास के एक सहस्राब्दी को सजीव कर दिया। यह महोत्सव 1026 ईस्वी में हुए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने तथा स्वतंत्र भारत में मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। अरब सागर के तट पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग एक… Continue reading सोमनाथ 1000 वर्ष महोत्सव: आस्था, स्वाभिमान और राष्ट्र चेतना का ऐतिहासिक संगम

 January 11, 2026

सोशल मीडिया ने धर्म को कैसे बदला?

पिछले एक दशक में सोशल मीडिया ने इंसान के सोचने, बोलने और मानने के तरीकों को गहराई से प्रभावित किया है। राजनीति, शिक्षा, रिश्ते और व्यापार के साथ-साथ धर्म भी सोशल मीडिया के प्रभाव से अछूता नहीं रहा। आज सवाल यह नहीं है कि सोशल मीडिया ने धर्म को छुआ या नहीं, बल्कि यह है कि सोशल मीडिया ने धर्म को कैसे बदला है—अच्छे या बुरे दोनों रूपों में। धर्म अब मंदिरों तक सीमित नहीं… Continue reading सोशल मीडिया ने धर्म को कैसे बदला?

 January 11, 2026

Is Religion Relevant for Today’s Youth?

In today’s fast-paced, technology-driven world, young people are more connected, informed, and independent than ever before. They question traditions, challenge authority, and seek logic behind every belief. In such a climate, an important question often arises: Is religion still relevant for today’s youth, or has it become outdated? The answer is not a simple yes or no. Religion itself has not lost relevance; rather, the way it is understood, practiced, and presented has changed—and in… Continue reading Is Religion Relevant for Today’s Youth?

 January 11, 2026

युवा पीढ़ी धर्म को बोझ क्यों समझती है?

आज का युवा पहले से कहीं ज़्यादा पढ़ा-लिखा, जागरूक और तकनीक से जुड़ा हुआ है। उसके पास सवाल पूछने की आज़ादी है, विकल्पों की भरमार है और सोचने का एक आधुनिक तरीका है। ऐसे में यह सवाल बार-बार उठता है कि युवा पीढ़ी धर्म को आस्था की बजाय बोझ क्यों समझने लगी है? क्या सच में धर्म बदल गया है, या फिर उसे समझाने का तरीका गलत हो गया है? धर्म को कर्मकांड तक सीमित… Continue reading युवा पीढ़ी धर्म को बोझ क्यों समझती है?

 January 11, 2026

क्या अच्छे कर्म बुरा समय बदल सकते हैं?

भूमिका जीवन में ऐसा समय लगभग हर व्यक्ति के जीवन में आता है, जब परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध होती हैं। मेहनत के बावजूद असफलता, अच्छे इरादों के बाद भी कष्ट—ऐसे क्षणों में मन में एक ही प्रश्न उठता है: क्या अच्छे कर्म बुरा समय बदल सकते हैं? क्या सही आचरण, सेवा, ईमानदारी और धैर्य वास्तव में हमारे कठिन दौर को बेहतर बना सकते हैं, या यह केवल सांत्वना देने वाला विचार है? इस प्रश्न का उत्तर… Continue reading क्या अच्छे कर्म बुरा समय बदल सकते हैं?

 January 10, 2026

How Scientific Is the Theory of Karma and Result?

Introduction The idea that every action has a consequence is deeply rooted in Indian philosophy and spiritual traditions. Commonly expressed as “karma and its result,” this principle suggests that good actions lead to positive outcomes, while negative actions bring suffering. But in a modern, evidence-driven world, an important question arises: How scientific is the theory of karma and result? Can this ancient belief be explained or supported through logic, psychology, and science, or does it… Continue reading How Scientific Is the Theory of Karma and Result?

 January 10, 2026

क्या भाग्य पहले से लिखा होता है?

मनुष्य के जीवन में घटने वाली घटनाएँ अक्सर हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या सब कुछ पहले से तय है? क्या हमारा जन्म, सुख-दुःख, सफलता-असफलता—सब भाग्य की लिखावट है? या फिर हमारे कर्म और प्रयास ही जीवन की दिशा तय करते हैं? “क्या भाग्य पहले से लिखा होता है?” यह प्रश्न केवल दार्शनिक नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो जीवन में संघर्ष, आशा और विश्वास के बीच झूलता रहता… Continue reading क्या भाग्य पहले से लिखा होता है?

 January 10, 2026