“आश्रम” सीरीज के खिलाफ शिकायत
जोधपुर/दिल्ली। बीते दिनों ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज हुई सीरीज आश्रम को लेकर हिंदू धर्मगुरूओं में नाराजगी है। इसमें हिंदू धर्म के आश्रम शब्द का प्रयोग और कथावस्तु में एक गुरू के अनाचार को प्रमुखता से पेश किया गया है। “आश्रम” सीरीज को निर्देशक प्रकाश झा ने बनाया है इसमें अभिनेता बाबी देओल ने गुरू का चरित्र निभाया है।

जोधपुर, राजस्थान के तखतगढ धाम आश्रम के युवाचार्य स्वामी अभयदास ने इसको लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र लिखा है। इसमें ओटीटी प्लेटफार्म्स पर कैसे धर्म को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, इसकी बात विस्तार से लिखी गई है।
आश्रम वेब सीरीज के खिलाफ शिकायती पत्र

सूचना प्रसारण मंत्रालय से शिकायत
पत्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से ये निवेदन किया गया है कि, “कला और रचनात्मकता के नाम पर दिखाए जा रहे उत्तेजक और हिंसक वृत्तांत आम जनमानस को मानसिक-भावनात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। विशेषकर युवा इस वजह से भारतीय समाज की व्यवस्था को लेकर दिग्भ्रमित हो रहे हैं। आपके मंत्रालय द्वारा सिनेमा हॉल और टेलीविजन पर ऐसी विषयवस्तुओं के प्रदर्शन को वर्जित करने के लिए की गई सेंसर बोर्ड की उत्तम व्यवस्था प्रशंसनीय है किन्तु वर्तमान में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ऐसी कोई व्यवस्था न होने के कारण दर्शकों तक भ्रामक जानकारियां पहुंचाई जा रही हैं।”
तखकगढ़ आश्रम के युवाचार्य अभयदास ने आगे लिखा है कि, “मैं आपका ध्यान गत सप्ताह एमएक्स प्लयेर पर शुरू हुई वेब सीरीज “आश्रम” की ओर आकृष्ट कराना चाहूंगा। आश्रम शब्द सनातन संस्कृति की गुरु शिष्य परंपरा से जुड़ा हुआ है।
इस शब्द को नकारात्मक कहानी से जोड़कर दिखाना भारतीय संस्कृति के एक अहम प्रतीक को दूषित करना है। इस सीरीज में रचे गए दृश्य यथार्थ के नाम पर सनातन परंपरा को हानि पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। आप विज्ञ हैं, जानते ही होंगे, अधिकतर वेब सीरीज हिन्दू धर्म और संस्कृति को नीचा व असभ्य दिखाने का एजेंडा हैं।
इसके पहले भी बहुत सी वेब सीरीजों में हिंदू धर्म संस्कृति का सर्वथा अनुचित चित्रण किया गया है। मुझे इस तरह के फिल्मी तथ्यों से घोर आपत्ति है। हिन्दू धर्म संस्कृति और समाज से जुड़ा होने के कारण यह केवल मेरी ही नहीं इन असंख्य लोगों की पीड़ा है जिनके पास इन वे सीरीज के विरुद्ध बात रखने का माध्यम नहीं है। हम हिन्दू समाज के लोग अपने धर्म का अपमान देखकर हृदय से दु:खी और लज्जित हैं कि धर्म के देश में अधर्म का सार्वजनिक प्रसारण किया जा रहा और मोबाइल फोन के माध्यम से यह विषयवस्तु घर-घर तक पहुंच रही है।
मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों को न केवल आश्रम वेब सीरीज अपितु अन्य ऐसी वेब श्रृंखलाओं को देखकर उनका विश्लेषण तैयार करने को आदेशित करें और इस आधार पर हिन्दू अस्मिता पर हो रहे प्रहार को वर्जित करने हेतु एक सशक्त विधान का निर्माण करने की प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त करें।
आपकी महती कृपा होगी यदि आप मेरे इस आग्रह को गंभीरता से ग्रहण करेंगे। यह अत्यंत गभीर विषय है जिसका दुष्प्रभाव आज की युवा पीढ़ी पर आ रहा है। इससे देश की सामाजिक व्यवस्था को भी खतरा है। आशा है आप इस संदर्भ में उचित कार्यवाही करने का कष्ट करेंगे। विश्वास कीजिए आपका यह कदम भारतीय संस्कृति को मनोरंजन के माध्यम से क्षतिग्रस्त होने से बचाएगा।”
युवाचार्य अभयदास ने ये बताया उन्होंने कि ये इसलिए उठाई क्योंकि, “आश्रम शब्द सनातन संस्कृति की गुरु शिष्य परंपरा से जुड़ा हुआ है वहीं इस शब्द को नकारात्मक कहानी से जोड़कर दिखाना भारतीय संस्कृति के एक अहम प्रतीक को दूषित करना है। इस सीरीज में रचे गए दृश्य यथार्थ के नाम पर सनातन परंपरा को हानि पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं।”
आश्रम सीरीज एमएक्स प्लेयर ओटीटी प्लेटफार्म पर 28 अगस्त को रिलीज की गई है। और एमएक्स प्लेयर ने चार सितंबर को ये जानकारी अपने सोशल मीडिया पेज पर दी कि इसे दस करोड़ लोग अभी तक देख चुके है।

Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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