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आखिर क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, क्या है इससे जुड़ा रहस्य 

आखिर क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, क्या है इससे जुड़ा रहस्य 

आखिर क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, क्या है इससे जुड़ा रहस्य 
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आखिर क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, क्या है इससे जुड़ा रहस्य 

आखिर क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, क्या है इससे जुड़ा रहस्य 

आज अनंत चतुर्दशी है यानि गणपति बप्पा की विदाई कई दिन. कई जगह पर गणेश जी एक 1 दिन तो कहीं 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन, या 10 दिन तक विराजते हैं। 10 दिन सभी के साथ रहने के बाद बाप्पा को दसवे दिन यानि अनंत चतुर्दशी के दिन नाम आँखों से विदा किया जाता है. अब सहज ही यह सवाल उठ सकता है कि जिन्हें हम इतने उत्साह के साथ स्थापित करते हैं उनको विसर्जित क्यों किया जाता है। चलिए जानते हैं  विसर्जन का महत्व क्या है और क्या है इससे जुड़ा रहस्य।

विसर्जन का अर्थ क्या है

विसर्जन का अर्थ क्या हैविसर्जन संस्कृत भाषा का शब्द है उसका अर्थ है पानी में विलीन होना और यह सम्मान सूचक प्रकिया है। जब भी हम घर में किसी भगवान की मूर्ति की पूजा करते हैं और उसके बाद उनका विसर्जित करके उन्हें सम्मान दिया जाता है।

गणेश जी का विसर्जन

गणेश का विसर्जन यह दिखाता है कि गणेश जी मिट्टी से जन्में है और बाद में इस शरीर को मिट्टी में ही मिलना है। गणेश जी की प्रतिमा मिट्टी से बनती है और पूजा के बाद वो मिट्टी में मिल जाती है।

विसर्जन से मिलती है ये सीख

गणेश विसर्जन से मिलती है ये सीखविसर्जन ये सिखाता है कि मनुष्य को अगला जन्म पाने के लिए इस जन्म को त्यागना पड़ेगा। गणेश जी की मूर्ति मिट्टी की बनती है, उसकी पूजा होती है लेकिन फिर उन्हें अगले साल आने के लिए इस साल विसर्जित होना पड़ता है। इस प्रकार हमारा जीवन भी यही है और हमें अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा और समय समाप्त होने पर अगले जन्म के लिए हमें इस जन्म को छोड़ना पड़ेगा।

यह भी पढ़ें-अनंत चतुर्दशी: अनंतसूत्र के 14 गांठ 14 लोकों के हैं प्रतीक

प्रकृति को लौटाना पड़ेगा

गणेश जी को मूर्ति रूप में आने के लिए मिट्टी का सहारा लेना पड़ता है, मिट्टी प्रकृति की देन होती है लेकिन जब गणेश जी पानी में विलीन होते हैं तो मिट्टी फिर प्रकृति में ही मिल जाती है। इससे हमें यह समझ में आता है कि, जो प्रकृति से लिया है उसे लौटाना ही पड़ेगा, खाली हाथ आये थे और खाली हाथ ही जाना पड़ेगा।

गणेश विसर्जन से जुड़ी है ये कथा

गणेश विसर्जन से जुड़ी है ये कथा

धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था।

10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है। तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है।

इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया। यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई। माटी झरने भी लगी तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा।

इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है।

एक अन्य मान्‍यता है कि गणपति उत्‍सव के दौरान लोग अपनी जिस इच्‍छा की पूर्ति करना चाहते हैं, वे भगवान गणपति के कानों में कह देते हैं। गणेश स्‍थापना के बाद से 10 दिनों तक भगवान गणपति लोगों की इच्‍छाएं सुन-सुनकर इतना गर्म हो जाते हैं कि चतुर्दशी को बहते जल में विसर्जित कर उन्‍हें शीतल किया जाता है।

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Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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September 12, 2019 4 min read
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