अक्षय तृतीया 2019 : साल का सबसे पावन और भाग्यशाली दिन

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अक्षय तृतीया 2019 : साल का सबसे पावन और भाग्यशाली दिन

  • अक्षय तृतीया वर्ष 2019 में यह तिथि 07 मई 2019 (मंगलवार) को 
  • अक्षय तृतीया का सुंदर अद्‍भुत संयोग पूरे 1 दशक बाद बना 
  • पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:40 से 12:17 तक
  • जानिए क्या-क्या कर सकते है अक्षय तृतीया को…

यह व्रत पर्व प्रतिवर्ष बैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2019 में यह तिथि 07 मई 2019 (मंगलवार) को पड़ रही है। इस तिथि को भगवान नर नारायण सहित परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था। इसके अलावा, ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इस तिथि को हुआ था। अगर यह व्रत सोमवार अथवा रोहिणी नक्षत्र के दिन पड़े तो महाफलदायक माना जाता है। मन्दिरों में इस दिन प्रातः काल से ही दान पुण्य करने वालों का तांता लग जाता है। अक्षय तृतीया के दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, इमली, वस्त्र आदि का दान बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत गुजरात महाराष्ट्र राजस्थान मध्यप्रदेश सहित सम्पूर्ण उत्तर भारत में बहुत ही चर्चित है। बद्रीनारायण के कपाट भी इसी दिन खुलते हैं। भगवान परशुराम अवतार भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था जिन्होंने अपने बलबूते समस्त धरती को उस समय क्षत्रिय विहीन कर दिया था।

अक्षय तृतीया का सुंदर अद्‍भुत संयोग पूरे 1 दशक बाद बन रहा है। इससे पूर्व वर्ष 2003 में 5 ग्रहों का ऐसा योग बना था। वर्ष 2019 में एक बार फिर ऐसा संयोग बनेगा, जब 4 ग्रह अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे। अक्षय तृतीया 6 मई की रात 3:23 बजे से लग जाएगी, लेकिन उदया तिथि के कारण इसका मान 7 मई को सुबह 5:28 बजे सूर्योदय के साथ होगा। इस दिन अक्षय तृतीया रात 2:30 बजे तक रहेगी।

इस साल अक्षय तृतीया पर एक विशेष संयोग बन रहा है। पूरे एक दशक के बाद यह संयोग बन रहा है। इससे पहले वर्ष 2003 में 5 ग्रहों का ऐसा संयोग बना था। अब इस साल एक बार फिर ऐसा संयोग बनने जा रहा है कि जब 4 ग्रह सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहु अपनी उच्‍च राशि में गोचर करेंगे। मानवीय जीवन के लिहाज से इस संयोग को बेहद ही शुभ माना जा रहा है। इस दिन शाम 4:46 से रात 2:20 बजे तक मृगशिरा नक्षत्र के साथ चंद्र मिथुन राशि में रहेगा।

इस वर्ष अक्षय तृतीया ( 7 मई 2019) पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:40 से 12:17 तक है। वहीं सोना खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:26 से लेकर रात्रि 11:47 तक है।

अक्षय तृतीया के दिन अनबूझे और अनसूझे विवाह लग्न की भी महत्ता बताई गई है अर्थात् अगर किसी का विवाह सारे साल में नहीं सूझ रहा हो तो अक्षय तृतीया के दिन बिना लग्न मुहूर्त के विवाह कर देने से उसका दाम्पत्य जीवन सफल हो जाता है। यही कारण है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बंगाल आदि में आज भी अक्षय तृतीया के दिन हजारों लाखों की संख्या में विवाह होते हैं। यह भी मानते हैं कि इनमें से कुछ विवाह ऐसे भी होते हैं जिनको बाल विवाह या कानून सम्मत नहीं माना जाता है लेकिन सामूहिक विवाह में शामिल होने के कारण इस प्रकार के बाल विवाह को भी समाज में मान्यता दी जाती है। राजस्थान में दो वर्ष से लेकर 9 वर्ष की लड़कियों के बाल-विवाह अक्षय तृतीया यानी आक्खां तीज के दिन कर दी जाती हैं। आज भी सारे भारत में अधिकतम बाल विवाह या आदिवासी एवं पिछडे क्षेत्रों के सामूहिक विवाह अक्षय तृतीया के दिन आयोजित होते हैं।

श्री श्वेतवाराहकल्प में वैवस्वत मन्वन्तर के मध्य सत्ययुग के आरंभ की इस पुण्यदाई तृतीया तिथि को माता पार्वती ने मानव कल्याण हेतु अमोघ फल देनेवाली बनाया है। माँ के आशीर्वाद प्रभावस्वरूप इस तिथि के मध्य किया गया कोई भी कार्य कभी भी निष्फल नहीं होता है। इस बार अक्षय तृतीया का महापर्व 7 मई 2019 (मंगलवार) को है। इस दिन मांगलिक कार्य, मुंडन, शादी विवाह, बहू का प्रथम बार चौका छूना, दूकान की ओपनिंग व्यापार का प्रारंभ और सारे शुभ कार्यवकिए जाते हैं। पंचांग के मुताबिक अक्षय तृतीया बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इस वर्ष पूरे 15 साल बाद अक्षय तृतीया पर सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहु अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेंगे।

यह बेहद शुभ संयोग है। इस दिन सोना खरीदना बहुत शुभ माना गया है। कहते हैं कि इस दिन सोना या फिर कोई भी अन्‍य कीमती वस्‍तु खरीदने से वह अक्षय यानि कभी भी ना खत्‍म होने का फल प्राप्‍त करता है।

अक्षय तृतीया के दिन महाभारत की लड़ाई भी खत्म हो गई थी । साथ ही द्वापर युग समाप्त हुआ था । इस तिथि के महत्व को प्रगट करते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यही बताया कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे उसका पुण्य प्रताप अक्षय रहेगा। कोई भी नया काम नया घर नया कारोबार आदि शुरू करने से उसमें बरकत और ख्याति स्वतः ही अक्षय तृतीया के पुण्य प्रताप से आ जायेगी । अक्षय तृतीया के दिन प्रातः स्नान ध्यान जप तप करना हवन करना स्वाध्याय पितृ तर्पण करना तथा दान पुण्य आदि करना अक्षय पुण्य फल का भागी बनाता है।

जिस महिला को अभी तक संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो पाई है, उसे भी इस व्रत को करके माता के आशीर्वाद से इस सुख की प्राप्ति हो सकती है। देवी इंद्राणी ने इसी अक्षय तृतीया का व्रत करके जयंत नामक पुत्र प्राप्त किया था। इसी व्रत को करके देवी अरुंधती अपने पति महर्षि वशिष्ट के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त कर सकी थीं।

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक गरीब सदाचारी और देवताओं में श्रद्धा रखने वाला वैश्य रहता था। अमीर बिरादरी में पैदा होकर भी वह बहुत गरीब था और दिन रात व्याकुल रहता था। एक दिन किसी ब्राह्मण ने उसे अक्षय तृतीया का व्रत रखने की सलाह दी और यह पर्व आने पर विधि-विधान से देवताओं की पूजा करके गंगा स्नान आदि करने का भी फल बताया। वैश्य ने ऐसा ही किया और कुछ ही दिनों के बाद उसका व्यापार फलने-फूलने लगा। अपने जीवन काल में उसने हमेशा ही अक्षय तृतीया के दिन खुलकर दान पुण्य किया। अगले जन्म में वह कुशावती का राजा बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा बना कि भगवान ब्रहमा विष्णु महेश तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेश धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे। अपनी श्रद्धा और भक्ति को उसे कभी भी घमंड नहीं हुआ और महान वैभवशाली होने के बावजूद भी वह धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुआ। राजा चन्द्रगुप्त का अवतार भी कुशावती का यही राजा बना जो कि अक्षय तृतीया को अपने जप-तप के कारण प्रख्यात हुआ।

आज के समय में अक्षय तृतीया उन लोगों के लिए एक ऐसा खुला मुहुर्त है जिनके अटके हुए काम नहीं बन पा रहे हैं। व्रत- उपवास करने के बावजूद जिनकी मनोकामना की पूर्ति नहीं हो पा रही है, इसके साथ ही व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है। कमाई के बावजूद घर में पैसा नहीं टिकता है। परिवार में सुख शान्ति नहीं है। सन्तान मनोनुकूल नहीं है। शत्रु चारों तरफ सिर उठा रहे हैं। कोई रास्ता नहीं निकल रहा है। अक्षय तृतीया का व्रत और उपवास तथा दान-पुण्य करना सभी के लिए महापुण्य दायक है। हां, इसकी इस तिथि की कुछ कुरीतियां भी हैं जैसे कि बाल विवाह या बेमेल विवाह इस प्रकार की कुप्रथाओं से बचना चाहिए।

जानिए क्या-क्या कर सकते है अक्षय तृतीया को…

1.नवजात शिशु का नामकरण संस्कार
2.घर में टीवी, फ्रिज या मूल्यवान मशीनरी खरीदना
3.बोरवेल कुंआ या पानी का टैंक स्थापित करना
4.कन्या का रिश्ता तय करना या विवाह की रस्म अदा करना
5.जमीन-जायदाद या फिर फलैट आदि बुक करना
6.सोना चांदी के आभूषण या हीरे जवाहरात खरीदना
7.नया वाहन ट्रक,कार या सवारी वाहन खरीदना
8.खेतीबाडी और बागवानी के लिए सिंचाई पम्प स्थापित करना
9.घर में दुधारु पशु जैसे गाय-भैंस खरीदना
10.सरकारी या प्राइवेट नौकरी जॉइन करना
11.रोगी और रोगग्रस्त व्यक्ति को दवा पान करवाना
12.बैक में फिक्स्ड डिपॉजिट करना। पहली बार शेयर खरीदना
13.नये कपडे खरीदना या पहनना।

व्रत में न करें नमक का सेवन

इस पावन तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती कहती हैं कि यदि कोई भी स्त्री यदि सभी प्रकार के सुखों को पाना चाहती है तो उसे यह व्रत करते हुए किसी भी प्रकार का सेंधा आदि व्रती नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। महाराज दक्ष की पुत्री रोहिणी ने यही व्रत करके अपने पति चन्द्र की सबसे प्रिय रहीं। उन्होंने बिना नमक खाए यह व्रत किया था।

जैन समाज मनाएगा इक्षु तृतीया

जैन धर्म के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने छह माह की तपस्या के बाद अक्षय तृतीया के दिन ही गन्ने का रस आहार के रूप में लिया था। जैन समाज इस दिन को इक्षु तृतीया के रूप में मनाता है।

जानिए क्या नहीं करें अक्षय तृतीया के दिन…

1.कर्ज, उधार या बैंक का लोन लेना
2.किसी पर कोर्ट केस दायर करना
3.लम्बी यात्रा के लिए टिकट बुक करना
4.अस्पताल में भर्ती होना
5.जमीन की खुदाई करना या पुरानी इमारत को तोड़ना
6.किसी भी नौकर-चाकर को हटाना या किसी भी उपयोगी व्यक्ति, मकैनिक, मिस्त्री आदि से विवाद करना
7.गाड़ी, मोटर कार आदि को बेचना। घर बन्द करके जाना।
8.मदिरापान करना। बाल कटवाना। अपने वस्त्र आदि किसी को दान या उतार कर देना।
9.बैंक खाता बन्द करना या टैक्स फाइल करना।
10.बर्तन क्रॉकरी को फेंकना या बुजुर्गों से अपशब्द कहना या उनसे बहस करना।

पुण्य पाने को लगाएं फलदार पेड़

अक्षय तृतीया के दिन पीपल, आम, पाकड़, गूलर, बरगद, आंवला, बेल, जामुन अथवा अन्य फलदार वृक्ष लगाने से प्राणी सभी कष्टों से मुक्त होकर ऐश्वर्य भोगता है। जिसप्रकार ‘अक्षयतृतीया’ को लगाये गए वृक्ष हरे-भरे होकर पल्लवित- पुष्पित होते हैं, उसी प्रकार इसदिन वृक्षारोपण करने वाला प्राणी भी प्रगतिपथ की और अग्रसर होता है।

पं. दयानंद शास्त्री, उज्जैन

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