वैदिक ब्राह्मणों को मिल सकता है अल्पसंख्यक दर्जा
नयी दिल्ली; 11 सितम्बर; केंद्र सरकार वैदिक ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने पर विचार कर रही है. लेकिन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने केन्द्र के ऐसे किसी भी कदम का विरोध किया है और कहा है कि ऐसा कोई भी कदम मौजूदा अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ होगा.

केन्द्र सरकार ने अल्पसंख्यक आयोग से इस प्रस्ताव पर विचार करने और वैदिक ब्राह्मणों को अल्पसंख्यकों का दर्जा देने की सिफारिश की थी. इसके विपरीत अल्पसंख्यक आयोग केंद्र सरकार के ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ है. अल्पसंख्यक आयोग दारा 2016-2017 की जारी रिपोर्ट के अनुसार वैदिक ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक का दर्जा देना संभव नहीं है क्योंकि वे हिन्दू धर्म के अभिन्न अंग हैं. हालांकि कमीशन ने इस बारे में अंतिम फैसला केन्द्र सरकार पर छोड़ दिया है.
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इस मुद्दे पर रिलीजन वर्ल्ड ने विद्यामठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बात की तो उन्होंने कहा, ” यह एक राजनीतिक दांव के सिवा कुछ भी नहीं है क्यूंकि आज यह वैदिक ब्राह्मणों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने पर विचार कर रहे हैं, कल पुराण पढने वाले ब्राह्मणों के बारे में बात करेंगे. यदि ऐसा ही रहा तो हिन्दू समाज में जल्द ही फूट पड़ने की सम्भावना बढ़ जाएगी. उन्होंने आगे यह भी कहा ,”अल्पसंख्यक वह होते हैं जिनकी संख्या कम होती है या जिनकी भाषा लिपि और संस्कृति सबसे भिन्न हो…. इस लिहाज से तो ब्राह्मण कहीं भी फिट नहीं बैठते . इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस राजनीतिक दांव से केंद्र सरकार अपना वोट बैंक बनाये रखने का प्रयास कर रही है.”
अल्पसंख्यक आयोग ने अपना मत रखते हुए कहा है कि यदि सरकार ब्राह्मण महासभा या फिर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की मांग पर वैदिक ब्रह्माणों को अल्पसंख्यक का दर्जा दे भी देती है तो इसी तरह की मांग राजपूत, वैश्य और दूसरे हिन्दू जातियों की तरफ से भी उठ सकती है. इसलिए ब्रह्माणों को अल्पसंख्यक दर्जा देना सही नहीं होगा.
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क्या है अल्पसंख्यक का अर्थ
यूं तो इसका अर्थ होता है की कम संख्या वाले यानी कि जो अनुपात मे कम होते हैं, उन्हे अल्पसंख्यक कहा जाता है। परंतु, आज की तारीख मे आप किसी भी राह चलते इंसान से इसका अर्थ पूछेंगे तो अधिकतर लोगों का एक ही जवाब होगा- “एक विशेष धर्म वाले”। भारत में 6 धार्मिक समुदायों को अल्पसंख्यकों का दर्जा हासिल है इनमें, मुस्लिम, क्रिश्चयन, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी शामिल है.
कब हुयी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत एनसीएम की स्थापना हुई थी, जिसका काम देश के पांच धार्मिक समुदायों (मुस्लिमाें, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों) की शिकायतों पर विचार करना है. एनसीएम में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित सात सदस्य हैं.
पिछले कुछ दिनों से हिन्दू समुदाय की कई अन्य जातियां भी अपनी पौराणिक अस्मिता और पहचान के आधार पर अल्पसंख्यक दर्जे की मांग कर रही है. इसके पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं और स्कीमें चलाती है और उनकी धार्मिक, सामाजिक पहचान की रक्षा करती हैं.
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