नवरात्र पूजन के वास्तु नियम
चैत्र नवरात्रि 2026 प्रारंभ: 19 मार्च 2026
घटस्थापना मुहूर्त: 6:52 AM – 7:43 AM
राम नवमी: 26 मार्च 2026
नवरात्रि का समय माता की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इन नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना की जाती है। मूर्ति स्थापना से लेकर कलश स्थापना और अखंड ज्योति तक, नवरात्र पूजन में कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखना भी आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि यदि पूजा वास्तु के अनुसार की जाए तो उसका शुभ फल अधिक मिलता है और माता की कृपा प्राप्त होती है।
नवरात्रि में देवी की आराधना पूरे श्रद्धाभाव से की जाती है, लेकिन यदि इस दौरान पूजन स्थल, दिशा और व्यवस्था से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। वास्तुविद दयानन्द शास्त्री के अनुसार, नवरात्र काल में माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना ईशान कोण में करना शुभ माना जाता है।
ईशान कोण का महत्व
वास्तु मान्यताओं के अनुसार ईशान कोण देवताओं का स्थान माना जाता है। इसी कारण नवरात्रि में माता की प्रतिमा, पूजन सामग्री या कलश की स्थापना इस दिशा में करना शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इस दिशा में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है, जिससे पूजा का वातावरण पवित्र और संतुलित बना रहता है।
अखंड ज्योति किस दिशा में रखें
नवरात्रि में अखंड ज्योति का विशेष महत्व होता है। वास्तु के अनुसार इसे पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखना उचित माना गया है, क्योंकि आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि इस दिशा में अखंड ज्योति रखने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और नकारात्मकता दूर रहती है।
शाम के समय पूजन स्थल पर उचित प्रकाश की व्यवस्था रखना भी शुभ माना गया है। घी का दीपक जलाना विशेष रूप से मंगलकारी बताया गया है। यदि संभव हो तो देशी गाय के घी से अखंड ज्योति जलानी चाहिए, और यदि वह उपलब्ध न हो तो अन्य घी से भी दीपक जलाया जा सकता है।
माता की प्रतिमा और कलश स्थापना
नवरात्रि में कलश स्थापना का अपना विशेष महत्व है। Chaitra Navratri 2026 के लिए Ghatasthapana 19 March 2026 को है और New Delhi के लिए मुहूर्त 6:52 AM से 7:43 AM बताया गया है. यदि माता की स्थापना चंदन की चौकी या पट पर की जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। वास्तुशास्त्र में चंदन को सकारात्मकता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। ऐसी स्थापना से पूजा स्थल अधिक सात्विक और व्यवस्थित माना जाता है।
पूजन के समय किस दिशा में बैठें
नवरात्र काल में पूजा करते समय आराधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। मान्यता है कि पूर्व दिशा प्रकाश, शक्ति और तेज का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा स्थिरता और शुभता से जुड़ी मानी जाती है। इसलिए साधक को इन दिशाओं की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए।
नौ दिनों की आराधना और श्रृंगार
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के जिन स्वरूपों की पूजा की जाती है, उनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। Chaitra Navratri 2026 का कैलेंडर भी 19 March से 27 March तक इन नौ दिनों की पूजा पर आधारित है, जबकि Rama Navami 26 March 2026 को पड़ रही है. इन नौ दिनों में माता का विशेष श्रृंगार करना शुभ माना जाता है। चोला, फूलों की माला, हार, नए वस्त्र, चुनरी और आभूषणों से माता का श्रृंगार किया जाता है। लाल रंग को शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, इसलिए लाल वस्त्र, रोली, लाल चंदन, सिंदूर और चुनरी अर्पित करना विशेष महत्व रखता है।
रोली, कुमकुम और स्वास्तिक का महत्व
नवरात्र पूजन में रोली या कुमकुम का विशेष उपयोग किया जाता है। पूजन स्थल के द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक बनाना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे घर में मंगलभाव आता है और साधक के जीवन में शुभता का प्रवेश होता है। नवरात्र के नौ दिनों तक घर के बाहर चूने और हल्दी से स्वास्तिक चिह्न बनाना भी शुभ माना जाता है। हल्दी और चूना शुभ कार्यों में उपयोग किए जाते हैं और इन्हें सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
पूजा स्थल कैसा होना चाहिए
पूजा स्थल को साफ-सुथरा, शांत और व्यवस्थित रखना बहुत आवश्यक है। जहां पूजा की जा रही हो वहां अव्यवस्था, गंदगी या भारी बाधाएं नहीं होनी चाहिए। यदि पूजा स्थल के ऊपर बीम हो, तो उसे ढंकने की व्यवस्था करना उचित माना गया है। इससे पूजा के समय मन एकाग्र रहता है और स्थान अधिक संतुलित महसूस होता है।
घर और दुकान के मुख्य द्वार के लिए उपाय
नवरात्रि में घर या दुकान के मुख्य द्वार से जुड़े कुछ उपाय भी शुभ माने गए हैं। घर या दुकान के मेन गेट के ऊपर देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर लगानी चाहिए, जिसमें वे कमल के फूल पर विराजमान हों। ऐसा करना शुभ फलदायक माना जाता है। दरवाजे पर चांदी का स्वास्तिक लगाना भी शुभ माना गया है। यदि ऐसा संभव न हो तो लाल कुमकुम से भी स्वास्तिक बनाया जा सकता है। नवरात्रि समाप्त होने से पहले मेन गेट पर मां लक्ष्मी के चरण चिन्ह लगाना भी शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि चरणों की दिशा घर के अंदर की ओर हो। मेन गेट के पास किसी पात्र में जल भरकर उसमें फूल डालकर पूर्व या उत्तर दिशा में रखना भी लाभकारी माना गया है। घर के द्वार पर सुंदर और रंगीन तोरण बांधना चाहिए। यदि तोरण आम, पीपल या अशोक के पत्तों से बना हो तो उसे और अधिक शुभ माना जाता है। दरवाजे पर ॐ का चिन्ह बनाना या शुभ-लाभ लिखना भी शुभ माना गया है। इन्हें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बनाना अधिक मंगलकारी माना जाता है।
निष्कर्ष
नवरात्र पूजन में वास्तु नियमों का ध्यान रखने से पूजा स्थल अधिक व्यवस्थित, पवित्र और शुभ माना जाता है। कलश स्थापना, अखंड ज्योति, पूजन की दिशा, स्वास्तिक, तोरण और मुख्य द्वार से जुड़े ये उपाय नवरात्रि के दौरान विशेष महत्व रखते हैं। श्रद्धा, स्वच्छता और विधि-विधान के साथ की गई पूजा से माता की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्र पूजन में कलश स्थापना किस दिशा में करनी चाहिए?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में कलश स्थापना ईशान कोण में करना शुभ माना जाता है। इसी दिशा में माता की प्रतिमा या पूजन सामग्री रखना भी मंगलकारी माना गया है।
अखंड ज्योति किस दिशा में रखनी चाहिए?
नवरात्रि में अखंड ज्योति को पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखना उचित माना गया है, क्योंकि आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।
नवरात्रि में पूजा करते समय मुख किस दिशा में होना चाहिए?
पूजन के समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इन दिशाओं को शुभ, संतुलित और पूजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
क्या नवरात्र पूजन में चंदन की चौकी का उपयोग शुभ माना जाता है?
हाँ, नवरात्र काल में यदि माता की स्थापना चंदन की चौकी या पट पर की जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे पवित्रता और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।
नवरात्रि में रोली, कुमकुम और स्वास्तिक का क्या महत्व है?
नवरात्र पूजन में रोली या कुमकुम से पूजन स्थल के द्वार पर स्वास्तिक बनाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में मंगलभाव और शुभता का प्रवेश होता है।
नवरात्रि में पूजा स्थल कैसा होना चाहिए?
पूजा स्थल साफ-सुथरा, शांत और व्यवस्थित होना चाहिए। जहां पूजा की जा रही हो वहां गंदगी, अव्यवस्था या बाधा नहीं होनी चाहिए।
घर या दुकान के मुख्य द्वार पर कौन से उपाय शुभ माने जाते हैं?
मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाना, तोरण बांधना, मां लक्ष्मी के चरण चिन्ह लगाना और शुभ-लाभ या ॐ लिखना नवरात्रि में शुभ माना गया है।
क्या देशी घी से अखंड ज्योति जलाना जरूरी है?
देशी गाय के घी से अखंड ज्योति जलाना अत्यंत शुभ माना गया है, लेकिन यदि वह उपलब्ध न हो तो अन्य घी से भी दीपक जलाया जा सकता है।
लेखक – वास्तुविद दयानन्द शास्त्री









