वास्तुशास्त्र : आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध

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वास्तुशास्त्र : आपके घर का वास्तु और उनका फर्नीचर से संबंध

  • आपके घर में फर्नीचर केसा और कहाँ होना चाहिए, वास्तु अनुसार

वास्तु शास्त्र का महत्व आजकल बढ़ता जा रहा है। जिसकी वजह है वास्तु द्वारा बताए गए नियम हैं। घर यानि, हमारा निवास स्थान, हमारे लिए स्वर्ग समान होता है। घर में हम हमेशा खुशी एवं तंदुरुस्त जीवन जीने के लिए वास्तु के बारे में जानने की आवश्यकता होती है। हर किसी की चाहत होती है कि उनके घर में, परिवार में सुख शांति समृद्धि खुशहाली बना रहे। इसके लिए इंसान हर प्रयास करता है। घर में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवेश होता रहे और नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकले, ये जरूरी है। वास्तु के जरिये इसी की जानकारी दी जाती है।

वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की घर में ऐसी कोई चीज नहीं होनी चाहिए जो अनुपयोगी हो। साथ ही ऐसी चीजें भी जो टूट जाती हैं उन्हें भी तुंरत घर से बाहर कर देना चाहिए। क्योंकि ये चीजें आपकी तरक्की का रोकती हैं। चाहे आप कितने भी ज्ञानी क्यों न हों। वास्तु शास्त्र के नियम कहते हैं कि घर में ऐसी कोई भी चीज नहीं रखनी चाहिए जो अनुपयोगी हो। 

फर्नीचर भले ही घर का बेहद जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसके इस्तेमाल में वास्तु के निर्देशों की जरूरत कम पड़ती है। असल में फर्नीचर का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करके आप वास्तु खराब कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में जो हम फर्नीचर लाते है वो हमारी सफलता, तरक्की, खुशियां लेकर आती है। इसलिए कभी भी फर्नीचर सोचे-समझकर ही घर लाना चाहिए। जिससे आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा रहें।

बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो वास्तु दोष में यकीन रखते हैं और उसी हिसाब से घर का नक्शा, डेकोरेशन और फर्नीचर का सामान सेट करते हैं। हम सब अपने घर को सुंदर और जरूरतों को पूरा करने को हर चीज अपने हिसाब से रखते है। इन्ही में से एक है फर्नीचर। जो कि हमारे घर का एक जरुरी हिस्सा है। 

सही फर्नीचर के चुनाव के लिए इस बात पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। यदि आप लकड़ी के फर्नीचर का चुनाव करते हैं तो फर्नीचर की फिनिशिंग की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि फिनिशिंग अच्छी नहीं है तो रंग ख़राब होने की संभावना बढ़ जाती है। विश्वसनीयता प्राप्त करने के लिए ब्रांडेड उत्पाद खरीदने का प्रयत्न करें। शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां फर्नीचर की जरूरत नहीं पड़ती है। फर्नीचर केवल घर की जरूरत ही नहीं होते हैं, बल्कि यह घर की खूबसूरती को भी बढ़ा देते हैं। हमेशा फर्नीचर सोच-समझकर ही खरीदना चाहिए। जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। कई घरों में तो केवल खूबसूरती बढ़ाने के लिए फर्नीचर रखे जातें हैं। काम के फर्नीचर अलग से रखे जाते हैं। आपको शायद पता ना हो लेकिन घर के वास्तु बनाने और बिगड़ने में फर्नीचर का बहुत बड़ा योगदान होता है। फर्नीचर का आकार और उसकी कीमत घर के वास्तु पर असर डालती है और कई बार आपकी आर्थिक स्थिति को भी काफी नुकसान पहुंचता है। अगर आप भी घर के लिए फर्नीचर खरीद रहे हैं या बनवा रहे हैं, तो वास्तु के कुछ नियमों को अपनाकर होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं।

  • जब भी कभी फर्नीचर खरीदें, तो इस बात का जरुर ध्यान रखें कि वह किस तरह की लकड़ी से बनी है। यानि की हमेशा नीम, शीशम, अशोका, चंदन, सागवान, साल, अर्जुन से बनी हो। वही फर्नीचर खरीदें।
  • अगर आप फर्नीचर में किसी भी तरह की डिजाइन बनवाना चाहते है, तो उसमें फूल, मछली, सूरज. राधा-कृष्ण, गाय हाथी आदि की आकृति बनाएं। इसके साथ ही डार्क पॉलिश न करा कर हल्के रंग की पॉलिश कराएं। यह शुभ साबित होगा।
  • कई बार होता है कि फर्नीचर बनवाते समय हम किनारे नुकीले कर देते है। जो कि सही नहीं है। यह आपके लिए हानिकारक साथ ही घर में नकारात्मक ऊर्जा भी लाता है। इसलिए हमेशा गोल आकार में ही किनारा बनवाएं।
  • अगर आप ऑफिर में फर्नीचर का इस्तेमाल करना चाहते है, तो स्टील का खरीदें। इससे सकारात्मक ऊर्जा आने के साथ-साथ धन की वृद्धि होती है।
  • अगर बेड के हेडबोर्ड की डायरेक्शन साउथ या वेस्ट में हो, तो आपको हेडबोर्ड के सामने वाली दीवार को डेकोरेट करना चाहिए। इससे उस बेड पर सोने वाली की सेहत अच्छी रहती है।
  • घर का फर्नीचर भी सही हालत में होना आवश्यक है। वास्तुविद पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  वास्तु के अनुसार फर्नीचर में टूट-फूट अशुभ मानी जाती है। घर में वास्तु दोष होने से पैसों की कमी बनी रहती है, इसलिए इसका निवारण तुरंत करना चाहिए।
  • ऑफिस के लिए स्टील फर्नीचर का भी प्रयोग किया जा सकता है। ऑफिस में इसके इस्तेमाल से पॉजिटिव एनर्जी और पैसों का फ्लो बना रहता है।
  • जरुरत से ज्यादा कॉर्नर्स वाले फर्नीचर को शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए कोशिश करें कि घर में कम से कम कॉर्नर फर्नीचर बनवाएं
  • फर्नीचर या फर्नीचर बनाने वाली लकड़ी किसी शुभ दिन ही खरीदें। कभी भी शनिवार, अमावस्या या फिर मंगलवार को न खरीदें।
  • घर में वुडवर्क का काम हमेशा साउथ या वेस्ट डायरेक्शन में शुरू करें और नार्थ-ईस्ट में खत्म। ऐसा करना घर के लोगों की तरक्की के लिए अच्छा माना जाता है।
  • फर्नीचर बनाने के लिए खरीदी लकड़ी को नॉर्थ, ईस्ट या नॉर्थ-ईस्ट डायरेक्शन में न रखें।  इससे फर्नीचर बनाने की प्रोसेस में देरी हो सकती है और मनी फ्लो भी प्रभावित होगा।
  • ध्यान रखे कि फर्नीचर की लकड़ी किसी शुभ पेड़/वृक्ष (पॉज़िटिव ट्री) की हो। जैसे शीशम, चंदन, अशोका, सागवान, साल, अर्जुन या नीम। इससे बना फर्नीचर शुभ फल देने वाला होता है।
  • आप फर्नीचर में राधा-कृष्ण, फूल, सूरज, शेर, चीता, मोर, घोड़ा, बैल, गाय, हाथी और मछली की आकृति बनवा सकते हैं। फर्नीचर पर हमेशा हल्की पॉलिश का इस्तेमाल करें। डार्क और डल कलर्स निगेटिविटी फैलाते है।
  • फर्नीचर के किनारे गोलाकार होने चाहिए। नुकीले किनारे न सिर्फ खतरनाक होते हैं, बल्कि ये खराब एनर्जी भी छोड़ते हैं। अगर आपका फर्नीचर छत से टकरा रहा है, तो इसकी ऊंचाई कम करवा लें।
  • हल्का फर्नीचर हमेशा नॉर्थ और ईस्ट में रखें और भारी फर्नीचर साउथ और वेस्ट में रखें। इस बात का ध्यान न रखने पर पैसों का नुकसान हो सकता है।
  • अपने बेडरूम में बिजली की आइटम न रखें, चाहे वह टी.वी., कंप्‍यूटर, लैपटॉप या कोई अन्‍य वस्‍तु ही क्‍यूं ना हो। यह एनर्जी को ब्‍लॉक करते हैं। इन्‍हें रखने से आपके मन का सुकून खत्म होता है।
  • अगर बेड को दीवार के नजदीक सटा कर रख रहे हैं तो यह जरुर देख लें कि सिर के पीछे की दीवार काफी मजबूत हो। आपका सिर ना तो दीवार के कोने में हो और ना ही किसी अल्‍मारी के पीछे। इसके साथ ही सोते समय आपके पैर भी दीवार की ओर नहीं होने चाहिए। यह मृत्‍यु के समय की स्थिति होती है इसलिये कभी भी ऐसे ना सोएं।
  • अगर आप रॉमांटिक टच देना चाहें तो अपने बेडरूम में पिंक, रेड, मैजेंटा, लेवेंडर या कोरल ऑरेंज रंग करवाएं।

सावधानी रखें – अगर आप बेड पर हैं और आईने/कांच/शीशे में आपका स्वरूप/अक्स साफ दिखाई दे रहा है, तो सोने से पहले उस शीशे को पूरा ढंक दें। रूम में ऐसा आइना लगाइए, जिसमें आपका पूरा शरीर दिखें। 

सोने की सही दिशा (Sleeping Direction) – अच्छा स्वास्थ्य काफी कुछ हमारे सोने की अवस्था पर भी निर्भर करता हैं. जैसे यदि आप अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर करके सोते हैं तो आपका स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहेगा. इसके अलावा यदि आपको पित्त की शिकायत हैं तो आप अपने दाहिने हाथ की ओर करवट लेकर सो सकते हैं तथा यदि आपको कफ की शिकायत हैं. तो वास्तुशास्त्र के अनुरूप आपको बाई और करवट लेकर सोना चाहिए |

पलंग (Bed) – वास्तुशास्त्र में यह मान्यता हैं कि हमेशा पलंग की लम्बाई सोने वाले व्यक्तियों की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए. इसके साथ ही पलंग पर छोटा या बड़ा कैसा भी दर्पण नहीं लगा होना चाहिए. क्योंकि यदि दर्पण लगा होगा और सोने से पहले आप उसमें अपना प्रतिबिम्ब देखते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता हैं और आपकी आयु भी कम होती हैं.

दर्पण (Mirror) – कभी भी दर्पण को अपने कमरे के ऐसे स्थान पर न लगायें जहाँ से आपको अपना प्रतिबिम्ब लेटी हुई अवस्था में दिखाई दें. इसके सतह ही बेड को कभी भी दीवार के कोने से सटाकर बिल्कुल न रखें. क्योंकि इसका असर भी आपकी सेहत पर पड़ता हैं.

बीम (Beem) – घर बनवाते समय बीम को भी घर के बीचों बीच न बनवाएं. क्योंकि इससे दिमाग से सम्बन्धित परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं.

अक्सर लोग अपने घरों में फर्नीचर ड्राइंग रूम के बीच में रखते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के बीच में फर्नीचर नहीं रखने चाहिए. घर के बीच का स्थान ब्रहमस्थल होता हैं. इस स्थान में किसी तरह के पत्थर का या कंकरीट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए तथा प्रयास करना चाहिए कि यह स्थाम अधिकतर खाली ही रहे. क्योंकि इससे घर के सदस्यों की तबियत अधिकतर समय ख़राब रहती हैं.

पंडित दयानन्द शास्त्री,
(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)
MOB.-09669290067 &  07000394515
WHATS App-09039390067,               
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