RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

वसंत पंचमी विशेष: जानिए सरस्वती पूजन की सही तिथि और वसंत पंचमी के बारे में

वसंत पंचमी विशेष: जानिए सरस्वती पूजन की सही तिथि और वसंत पंचमी के बारे में

वसंत पंचमी विशेष: जानिए सरस्वती पूजन की सही तिथि और वसंत पंचमी के बारे में
Visual Archive

वसंत पंचमी विशेष: जानिए सरस्वती पूजन की सही तिथि और वसंत पंचमी के बारे में

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 30 जनवरी, गुरुवार को है। मत मतांतर से इसे 29 को भी मनाया जा रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी तिथि पर देवी सरस्वती प्रकट हुईं थीं। इस बार वसंत पंचमी का पर्व सिद्ध योग में मनाया जाएगा। ये योग बहुत ही खास है, इस योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं।
पचंमी तिथि का आरंभ 29 जनवरी, बुधवार को सुबह 8 बजकर 18 मिनट से होगा, ये तिथि 30 जनवरी, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि ग्राह्य होने से 30 जनवरी को ही वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस बार वसंत पंचमी पर सिद्ध योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, इस योग में पूजन करने से सभी कामों में सफलता मिलती है।
वसंत पंचमी का महत्त्व 
देवी भागवत में उल्लेख मिलता है कि माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत, काव्य, कला, शिल्प, रस, छंद, शब्द शक्ति जिह्वा को प्राप्त हुई थी। वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने, हल्दी से सरस्वती की पूजा और हल्दी का ही तिलक लगाने का भी विधान है। पीला रंग इस बात का द्योतक है कि फसलें पकने वाली हैं इसके अलावा पीला रंग समृद्धि का सूचक भी कहा गया है। इस पर्व के साथ शुरू होने वाली वसंत ऋतु के दौरान फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों सोने की तहर चमकने लगता है, जौ और गेहूं की बालियां खिल उठती हैं और इधर उधर रंगबिरंगी तितलियां उड़ती दिखने लगती हैं।
वाणी की देवी 

बुद्धि, विद्या और वाणी की देवी हैं भगवती सरस्वती भगवती सरस्वती विद्या, बुद्धि, और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं। देवी सरस्वती सत्वगुणसम्पन्ना हैं। इनके अनेक नाम हैं, जिनमें वाणी, गीः, गिरा, भाषा, शारदा, वाचा, धीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी और वीणापाणी अधिक प्रसिद्ध हैं।

भगवती सरस्वती को प्रसन्न कर लेने पर मनुष्य संसार के सारे सुख भोगता है। इस प्रकार अमित तेजस्विनी और अनन्त गुणशालिनी देवी सरस्वती की पूजा एवं आराधना के लिए माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि निर्धारित की गई है। वसंत पंचमी को इनका आविर्भाव दिवस माना जाता है। अतः वागीश्वरी जयन्ती एवं श्रीपंचमी के नाम से भी इस तिथि की प्रसिद्धि है।

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

By Shweta January 29, 2020 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Ayurveda

मां के नौ औषधीय स्वरूप: जानिये इन नौ औषधियों का देवी मां के नौ स्वरूपों से सम्बन्ध

नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा…

Read now
Hinduism

वसंत पंचमी विशेष: जानिए वसंत पंचमी का वैदिक, वैज्ञानिक और पौराणिक महत्त्व

वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है…

Read now
Hinduism

वसंत पंचमी विशेष: वसंत ऋतु के साथ ब्रज में होली का आगाज

मथुरा, 30 जनवरी;  ब्रज में वसंत पंचमी के अवसर पर 40 दिवसीय फाग महोत्सव (होली) का शुभारंभ हो गया। बृहस्पतिवार की सुबह शृंगार आरती के बाद ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में…

Read now