‘द योग एसोशिएशन’ के 100 वीं वर्षगांठ का जोरदार जश्न
स्वामी चिदानन्द सरस्वतीजी और आचार्य मुनि लोकेशजी ने अन्तर्राष्ट्रीय योग सम्मेलन में की शिरकत
- काम, ज्ञान और भक्ति को जोड़ कर जो काम किया जाता है उसके परिणाम असाधारण होते है – श्री वेंकैया नायडू
- योग का मंत्र सर्वे भवन्तु सुखिनः है और योग में ही विश्व बन्धुत्व का सार भी समाहित है – पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी
- योग से दुनिया एक हो रही है- आचार्य मुनि लोकेशजी
ऋषिकेश, 24 दिसम्बर। मुंबई योग संस्थान के 100 वर्ष पूरे होने का जोरदार जश्न मनाया गया जिसमें विभिन्न धर्मो के आध्यात्मिक गुरू, अनेक राजनेताओं, योगाचार्यो, योग जिज्ञासुओं एवं योग के विशेषज्ञों ने सहभाग किया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने योग संस्थान की 100 वीं वर्षगांठ समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की।

यह योग संस्थान पिछले 100 वर्षों से प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक घर तक योग की पंहुच बनाने के लिये अथक प्रयास कर रहा है। हर परिवार में योग का संदेश प्रसारित करने वाले मिशन के साथ चलने वाला यह काफी पुराना स्कूल है। इस मिशन ने अपनी 100 वीं वर्षगांठ पर पूज्य संतों के पावन सानिध्य में एक वर्षीय योग जागरूकता कार्यक्रम और शिविर पूरे विश्व में संचालित करने का संकल्प लिया है ताकि भारत की प्राचीनत्तम विधा योग की पंहुच विश्व के हर कोने-कोने में हो। 99 वें फाउंडेशन दिवस और 100 वें वर्ष के आरम्भ के इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, राज्यपाल महाराष्ट्र सरकार, श्री सी विद्यासागर रावजी, आचार्य लोकेश मुनीजी, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, शिक्षा मंत्री तौंदे विनोद जी, डाॅ एच आर नागेन्द्र जी, डाॅ कार्तिकेयन, डाॅ ईश्वर बसवर˜ी जी मोरार जी देसाई योग संस्थान, श्री सुबोध तिवारी जी, कव्यलधाम, पं राधेश्याम मिश्रा उज्जैन योग लाइफ सोसाईटी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’योग भारतीय संस्कृति की देन है और भारत की पहचान भी है। वर्तमान समय की तनावयुक्त जीवन शैली में योग संजीवनी के समान है जो मन-मस्तिष्क को अवसाद से मुक्त कर जीवन मंे शांन्ति का समावेश करता है। योग, जुड़ने और जोड़ने का विज्ञान है, जुड़ना चाहे स्वंय से हो या फिर प्रकृति सेे योग ही सिखाता है। भारतीय संस्कृति ने वसुधैव कुटुम्बकम का सूत्र दिया है और योग का मंत्र भी; योग सर्वे भवन्तु सुखिनः की युक्ति है तो योग में ही विश्व बन्धुत्व का सार भी समाहित है। योग को आत्मसात करना ही जीवन जीने की कला हैं।’
भारत के उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी, ने कहा कि ’यदि काम, ज्ञान और भक्ति को जोड़ कर जो काम किया जाता है उसके परिणाम असाधारण होते है। योग संस्थान ने इन तीनों पहलुओं को जोड़कर मानव सेवा का जो कार्य कर रहे है और सेवा के लिये प्रशिक्षकों को तैयार कर रहे है सचमुच यह बधाई के पात्र है। मानवता की सेवा सबसे उत्कृट सेवा है। योग को वैश्विक स्तर पर लें जाने में योग संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान है।’ उन्होने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य के बिना बाहर के कर्तव्यों की जिम्मेदारी ठीक से नहीं ले सकते इसलिये योग नितांत आवश्यक है। जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा ’योग स्वास्थ्य को निरोग रखने के लिये ही नहीं बल्कि जीवन की समग्रता के लिये नितांत आवश्यक है। योगमय जीवन ही शान्त एवं समग्र जीवन पद्धती है।’
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने योग संस्थान के सभी सदस्यों को साधुवाद दिया और सभी योग जिज्ञासुओं से आहृवान किया कि योग को प्रत्येक घर प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने में अपनी ऊर्जा को लगायें।

योग संस्थान के इस दो दिवसीय ऐतिहासिक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में योग के विशेषज्ञों द्वारा योगक्रियाओं के साथ योग चिकित्सा परामर्श शिविर एवं मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। साथ ही भारतीय संगीत की झलक भी देखने को मिली। प्रसिद्ध संतूर वादक राहुल शर्मा एवं उनकी टीम के द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में विश्व प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ और चिकित्सा वैज्ञानिक डाॅ बी एम हेगडे एवं अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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