तीन तलाक देने वालों को तीन साल की सजा
ट्रिपल तलाक यानी तीन तलाक का मामला एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र की मोदी सरकार तीन तलाक पर ड्राफ्ट लाने की तैयारी में है. उल्लेखनीय है कि तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट गैर कानूनी घोषित कर चुकी है.
कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक को असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य करार देते हुए कहा था कि तलाक देने का यह तरीका नैतिक रूप से गलत होने के साथ ही कुरान के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है. गौर करने वाली बात यह है कि मोदी सरकार ने यह फैसला यूपी निकाय चुनाव जीतने के तुरंत बाद किया है. इस मसौदे को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी है.
सरकार इस मामले में सभी राज्यों के विचार भी जानना चाहती है इसलिए तीन तलाक का मसौदा सभी राज्यों के पास भेज दिया गया है. जल्दी ही सभी राज्य इस मामले में अपनी अपनी राय सरकार को देंगे. केंद्र सरकार ने जो प्रावधान इस मामले में किए है उसके अनुसार तीन तलाक देने वालों को तीन साल की कारावास हो सकती है. इस अपराध को गंभीर मानते हुए सरकार ने इसे गैरजमानती अपराध का दर्जा भी दिया गया है.
इस कानून को संसद में पास होने के लिए रखा जाएगा. वैसे यह बात गौर करने वाली है कि अगर यह कानून संसद से पास हो जाता है तो भी इसे जम्मू कश्मीर में लागू नहीं किया जा सकता क्यूंकि इस क्षेत्र को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है.
यह भी पढ़ें-Exclusive: क्या है तीन तलाक पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सलन लॉ बोर्ड की प्रतिक्रिया
मुस्लिम समुदाय के विचार विमर्श के बाद बना है यह बिल
सरकार के दावों पर यकीन करे तो यह बिल इस्लाम या मुस्लिमों की आस्थाओं के खिलाफ नहीं है. इस बिल को इस्लाम के जानकारों तथा मुस्लिम महिलाओ के विचारो को सुनने के बाद ही तैयार किया गया है.
इस मामले में मुस्लिम समुदाय के प्रमुख संगठनों, संस्थानों और लोगों के विचारों को सुना गया है. सरकार की माने तो उन्होने तीन तलाक पर बिल बनाने के लिए वाराणसी की मुस्लिम महिलाओं से, मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी अलावा इस्लामिक स्कॉलर, मुफ्ती और वरिष्ठ वकीलों से सलाह भी ली है.
तीन तलाक के मामले में सभी पक्षों की बातों और भावनाओं का ख्याल रखा जाए इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के चार वकीलों और इस्लामिक विद्वान डॉ. इरफान अहमद शम्सी और धर्म गुरु मुफ्ती सफीक अहदम को भी शामिल किया गया है.
यह भी पढ़ें-तीन तलाक पर AIMPLB ने रखा अपना रूख : भोपाल में हुई बैठक
क्या है मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाले बिल की विशेषताएं
तीन तलाक को अनैतिक और गैर संवैधानिक मानते हुए सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए है. इस मसौदे को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बनाया गया है. इस मामले में कुछ अन्य राजनेताओं का मूल योगदान माना जा रहा है जिनमे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी का नाम प्रमुख है.
तीन तलाक पर सरकार के यह है बड़े फैसले
1.प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या ‘तलाक ए बिद्दत’ पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा.
2.यह बिल महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए शक्ति प्रदान करता है पीड़िता को अधिकार है कि वो अपने लिए और अपने बच्चो के लिए शौहर से गुजारा भत्ता मांग सकती है. इस मामले में वो मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकती है.
3.तीन तलाक से पीड़ित महिला को अपने बच्चो के संरक्षण का अधिकार भी है पीड़िता इसके बाकायदा महिला मजिस्ट्रेट से अनुरोध कर सकती है.
4.हर तरह का तीन तलाक गैर कानूनी होगा और इसे किसी भी रूप में कानूनी स्वीकार नहीं किया जाएगा. हर तरह का तीन तकलक जैसे महिला को बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के जरिए देना भी गैरकानूनी होगा.
5.तीन तलाक गलत और शुन्य होगा. गैर-जमानती अपराध होने के साथ ही इसे संज्ञेय अपराध भी माना जाएगा. दोष सिद्ध होने पर अपराधी को तीन साल की कारावास की सजा हो सकती है.
6.यह कानून जम्मू कश्मीर को छोड़कर पुरे भारत में लागू हो जाएगा.
———————————————————————————-
रिलीजन वर्ल्ड देश की एकमात्र सभी धर्मों की पूरी जानकारी देने वाली वेबसाइट है। रिलीजन वर्ल्ड सदैव सभी धर्मों की सूचनाओं को निष्पक्षता से पेश करेगा। आप सभी तरह की सूचना, खबर, जानकारी, राय, सुझाव हमें इस ईमेल पर भेज सकते हैं – religionworldin@gmail.com – या इस नंबर पर वाट्सएप कर सकते हैं – 9717000666 – आप हमें ट्विटर , फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकते हैं।
Twitter, Facebook and Youtube.
Editorial Review Note
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
Leave a Reply