RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

शहीदी दिवस विशेष: आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने दी थी प्राणों की आहुति

शहीदी दिवस विशेष: आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने दी थी प्राणों की आहुति

शहीदी दिवस विशेष: आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने दी थी प्राणों की आहुति
Visual Archive

शहीदी दिवस विशेष: आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने दी थी प्राणों की आहुति

आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने दी थी प्राणों की आहुति

सिखों के नवें गुरु, गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस 24 नवंबर को मनाया जाएगा. विश्व इतिहास में धर्म और मानवीय मूल्यों,आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय रहा है. प्रेम, त्याग और बलिदान के प्रतीक गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था.

यह भी पढ़ें-तख्त श्री केसगढ़, जहां हुआ था सिख पंथ का जन्म

गुरु तेग बहादुर का जन्म अमृतसर में गुरु हरगोबिन्द साहिब जी के घर हुआ था. बचपन में उनका नाम त्यागमल था. गुरु तेग बहादुर जी को धर्म और आदर्शों के लिए शहीद होने वाले महापुरुषों में गिना जाता है. गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों का मदद के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था.

औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी क्योंकि गुरुजी ने इस्लाम धर्म को मानने से इंकार कर दिया था.  तब मुगल शासक औरंगजेब ने इस्लाम कबूल न करने पर गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कटवा दिया. गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया. गुरु तेगबहादुर की याद में उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा शीश गंज साहिब है.

यह भी पढ़ें-सिखों के चतुर्थ गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व हर्षोल्लास से मना

धर्म विरोधी और वैचारिक स्वतंत्रता का दमन करने वाली नीतियों के विरुद्ध गुरु तेग़ बहादुरजी का बलिदान एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक घटना थी. यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था. गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे. गुरु जी ने धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए कई जगहों की यात्राएं की. इन्हीं यात्राओं के बीच 1666 में गुरुजी के यहाँ पटना साहब में पुत्र का जन्म हुआ जो दसवें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी बने.

————————————

रिलीजन वर्ल्ड देश की एकमात्र सभी धर्मों की पूरी जानकारी देने वाली वेबसाइट है। रिलीजन वर्ल्ड सदैव सभी धर्मों की सूचनाओं को निष्पक्षता से पेश करेगा। आप सभी तरह की सूचना, खबर, जानकारी, राय, सुझाव हमें इस ईमेल पर भेज सकते हैं – religionworldin@gmail.com – या इस नंबर पर वाट्सएप कर सकते हैं – 9717000666 – आप हमें ट्विटर , फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर भी फॉलो कर सकते हैं।
Twitter, Facebook and Youtube.

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

November 21, 2017 • 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays


Deprecated: File Theme without comments.php is deprecated since version 3.0.0 with no alternative available. Please include a comments.php template in your theme. in /var/www/html/religionworld/wp-includes/functions.php on line 6260

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

six + sixteen =