विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेले का आगाज, देश-विदेश से पहुंचे सैलानी

 In Hinduism

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर मेले का सोमवार को रंगारंग आगाज हो गया। मेले में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं।

पुष्कर, 4 नवम्बर; अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेला पूजा-अर्चना एवं ध्वजारोहण के साथ विधिवत रूप से सोमवार को प्रारंभ हो गया। मेले का समापन कार्तिक मास की पूर्णिमा 12 नवंबर को महास्नान के साथ होगा। मेले के समापन के दिन पुरस्कार वितरण भी होगा। जिला कलेक्टर विश्व मोहन शर्मा ने पुष्कर सरोवर के जयपुर घाट पर पूजा-अर्चना की और इसके तत्काल बाद स्टेडियम में तिरंगा लहराकर मेले का विधिवत आगाज किया। मेले का आगाज होते ही बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पुष्कर पहुंचे। पुष्कर में चारों तरफ पर्यटक नजर आ रहे हैं। पुष्कर के रेतीले धोरों की रौनक बढ़ने लगी है।

एक नज़र आयोजनों पर

मेले में नगाड़ा वादन के साथ ही ग्रामीणों और विदेशी पर्यटकों के बीच चक दे राजस्थान फुटबॉल मैच हुआ। इसके बाद शिल्पग्राम हैंडीक्राफ्ट बाजार का शुभारंभ हुआ और शाम को पुष्कर सरोवर के विभिन्न घाटों पर दीपदान के साथ महाआरती होगी। शाम सात बजे मेला रंगमंच पर नीरज आर्या कबीर कैफे की लाइव कंसर्ट शो होगा।

विदेशी पर्यटकों की आवक ज्यादा

मेले के पहले दिन देशी पर्यटकों से ज्यादा विदेशी पर्यटक नजर आए। कुछ विदेशी पर्यटक पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में भी पुष्कर कस्बे में भ्रमण करते नजर आए। विदेशी पर्यटकों के लिए सबसे आकर्षण का केंद्र राजस्थानी वेशभूषा में नृत्य करते स्थानीय कलाकार और पशुओं का नृत्य है। मेले को इस बार तीन चरणों में बांटा गया है। इसमें पहला चरण 28 अक्टूबर को पशु मेले से शुरू हो गया। मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। इसी तरह धार्मिक मेले की शुरुआत कार्तिक माह की एकादशी को आठ नवंबर से होगी। मेले का समापन महास्नान के साथ 12 नवंबर को होगा।

विदेशियों के आकर्षण के कई कारण

विदेशी पर्यटकों के पुष्कर मेले में पहुंचने के कई कारण हैं। पुष्कर में उन्हें सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म को समझने का मौका मिलता है। कई विदेशी यहां शोध करने भी आते हैं। इसके अलावा यहां के रेतीले धोरे, नाग पहाड़, गुलाब के फूलों के बाग, कैमल और डेजर्ट सफारी, लोकगीत और लोकनृत्य विदेशी पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं। अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह और आनासागर भी विदेशियों के यहां पहुंचने का कारण है।

 

पुष्कर का महत्त्व

मान्यता है कि कार्तिक माह की एकादशी से पूर्णिमा पांच दिनों तक सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में यज्ञ किया था। इस दौरान 33 करोड़ देवी-देवता भी पृथ्वी पर मौजूद रहे थे। इसी कारण से पुष्कर में कार्तिक माह की एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस माह में सभी देवताओं का पुष्कर में वास होता है। इन्हीं मान्यताओं के चलते पुष्कर मेले का आयोजन होता है। पुराने समय में लोग संसाधनों की कमी के कारण पशुओं को भी अपने साथ लेकर आते थे। इस कारण यह धीरे-धरे पशु मेले का भी रूप लेता गया। पुष्कर नगर पालिका के चेयरमैन कमल पाठक का कहना है कि मेले के दौरान कार्तिक पूर्णिमा को होने वाले महास्नना में बड़ी संख्या में पूरे देश से लोग पहुंचते हैं।

मेले में पहुंचे करीब पांच हजार पशु

पुष्कर पहले पशु मेले के नाम से ही जाना जाता था और हमेशा की तरह इस बार भी पशु मेले में पशुओं की मंडी सजी हुई है। मेले में करीब पांच हजार पशु पहुंचे हैं। इनमें सबसे अधिक दो हजार 760 ऊंट, 1,985 घोड़े, 135 गौवंश, 132 भैंस, 400 से अधिक भेड़ों सहित अन्य पशु मेले में पहुंचे हैं। यहां पशुओं की खरीद-फरोख्त जारी है। पशुपालन विभाग के अनुसार, इस बार ऊंट पहले से कम संख्या में पहुंचे हैं। राज्य के चार बड़े पशु मेलों में पुष्कर का पशु मेला सबसे अधिक प्रसिद्ध है। पड़ोसी राज्यों से भी लोग पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए यहां पहुंचते हैं।

Watch Religion World New Video Initiative Spiritual Talks 

Recommended Posts
Contact Us

We're not around right now. But you can send us an email and we'll get back to you, asap.

Not readable? Change text. captcha txt

Start typing and press Enter to search