RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

पतंजलि योगपीठ का संस्कृत शोध पत्र प्रथम बार अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित

पतंजलि योगपीठ का संस्कृत शोध पत्र प्रथम बार अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित

पतंजलि योगपीठ का संस्कृत शोध पत्र प्रथम बार अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित
Visual Archive

पतंजलि योगपीठ का संस्कृत शोध पत्र प्रथम बार अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित

नयी दिल्ली, 5 फरवरी; पहली बार अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका एमडीपीआई ने संस्कृत भाषा में एक शोध पत्र प्रकाशित किया है। पतंजलि आयुर्वेद ने इस पेपर प्रस्तुत किया था।

स्विट्जरलैंड के बेसल-स्थित एमडीपीआई, जो 219 वैज्ञानिक पत्रिका शीर्षक छापता है, ने पहली बार संस्कृत में एक पत्र प्रकाशित किया।एमडीपीआई की पत्रिकाओं में से एक, बायोमोलेक्युलस, ने अंग्रेजी उपशीर्षक के साथ औषधीय जड़ी बूटी पर वीडियो बनाया है।

पतंजलि आयुर्वेद के सीईओ आचार्य बालकृष्ण ने एक वेवसाइट को बताया, “यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच अनुसंधान के क्षेत्र में ‘संस्कृत भाषा’ की स्वीकृति की दिशा में पहला कदम है। यह पतंजलि की स्वदेशी के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है।” आचार्य बालकृष्ण इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता हैं।

वह आगे कहते हैं, “सम्मानित पत्रिका ने पहली बार संस्कृत भाषा में सामग्री प्रकाशित की है। यह भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के हमारे वादे को दोहराता है और हमारे लिए, यह 1,000 करोड़ रुपये के टर्नओवर को प्राप्त करने से भी बड़ा है”।

आचार्य बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण

एमडीपीआई के प्रकाशन निदेशक मार्टिन रिटमैन ने इसकी पुष्टि करते हुए वेबसाइट द प्रिंट को कहा, “मैं किसी भी पिछले वीडियो के बारे में नहीं जानता हूं जो हमने संस्कृत में प्रकाशित किया है, एमडीपीआई के लिए यह पहला ऐसा मामला है। उन्होंने आगे कहा, “विविधता और स्थिरता हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए हम संस्कृत में एक वीडियो सार प्रकाशित करके बहुत खुश हैं।

शोध के अनुसार ‘अश्वगंधा’ त्वचा विकार का इलाज करता है.

पतंजलि अनुसंधान पत्र, ‘औषधीय पौधों के फार्माकोलॉजी‘ नामक पत्रिका के एक विशेष अंक में 25 जनवरी को प्रकाशित, औषधीय जड़ी बूटी ‘विथानिया सोम्निफेरा’ पर है, जिसे आमतौर पर ‘अश्वगंधा’ के रूप में जाना जाता है।

आचार्य बालकृष्ण एवं अन्य साथ अनुसन्धानकर्ताओं के अनुसार, “डब्ल्यू सोम्निफेरा (अश्वगंधा), भारतीय औषधीय का उपयोग प्राचीन काल से किया जाता रहा है। जानकारी के मुताबिक सभी शोधकर्ता पतंजलि अनुसंधान संस्थान के दवा खोज और विकास प्रभाग में काम करते हैं।

अश्वगंधा
अश्वगंधा

अध्ययन से साबित होता है कि डब्ल्यूएस बीज (अश्वगंधा) सोरायसिस को कम करने में मदद करता है – (सोरायसिस एक पुरानी ऑटोइम्यून स्थिति जो त्वचा की कोशिकाओं के तेजी से बिल्डअप का कारण बनती है जो त्वचा की सतह पर स्केलिंग और लालिमा का कारण बनती है।)

शोध के अनुसार, “स्किन रिपेयर और एंटी इंफ्चालेमेटरी प्रॉपर्टीज के संयोजन से अश्वगंधा का  फैटी एसिड मजबूत एंटी-सोरायटिक क्षमता को प्रदर्शित करता है।

अध्ययन में पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक रामदेव के वित्तीय योगदान को भी स्वीकार किया गया है। इसमें लिखा है, “हम इस शोध कार्य को पूरा करने के लिए अपने वित्तीय और संस्थागत समर्थन के लिए परम श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी के विनम्र आभारी हैं।”

पतंजलि सौंदर्य प्रसाधन और त्वचा उत्पादों के लिए अश्कावगंधा के बीजों का उपयोग करेगी

यह पता लगाने के बाद कि डब्ल्यूएस बीजों से निकाले गए तेल को सोरायसिस जैसी त्वचा की सूजन के लिए एक प्राकृतिक उपचार विकल्प या पूरक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, पतंजलि आयुर्वेद अब एक व्यवसाय योजना के साथ तैयार है।

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, “हम निश्चित रूप से शोध का मुद्रीकरण करेंगे। हम अपने खुद के उत्पादों को सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा श्रेणी के तहत लॉन्च करने के लिए शोध का उपयोग करेंगे “हालांकि, अनुसंधान पर हमने किसी भी पेटेंट के लिए आवेदन नहीं किया है। हम अपने उत्पाद विकास के लिए शोध का उपयोग करने के लिए अन्य लोगों का स्वागत करते हैं।”

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

February 5, 2020 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

कांवड़ यात्रा की शुरुआत सबसे पहले किसने की थी? जानिए भगवान परशुराम से जुड़ी पौराणिक मान्यता

सावन का महीना आते ही देशभर में भगवान शिव की भक्ति का अनूठा उत्साह देखने को मिलता है। लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते…

Read now
Hinduism

तिरुमला मंदिर में दान का नया रिकॉर्ड: सिर्फ 10 घंटे में TTD को मिले 96.98 करोड़ रुपये, भक्तों की आस्था ने रचा इतिहास

क्यों उमड़ा 10 घंटे में इतना दान? वजह है TTD की नई डोनर पॉलिसी इस रिकॉर्ड दान के पीछे एक विशेष कारण था। TTD बोर्ड ने सामान्य श्रद्धालुओं…

Read now
Hinduism

किन्नौर कैलाश यात्रा पर क्यों उठा विवाद? जानिए विरोध की वजह, स्थानीय लोगों की मांग और प्रशासन का फैसला

किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 स्थगित: ग्लेशियर का खतरा, ग्रामीणों ने की बहाली की मांग किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 इस बार आस्था के साथ-साथ विवाद के कारण भी चर्चा…

Read now