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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन
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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन

आचार्य लोकेश जी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का किया उदघाटन

नई दिल्ली, दिनांक 17.01.2021: नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित कॉंस्टीट्यूशन क्लब में आज नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के 125वें राष्ट्रीय जन्म उत्सव के उपलक्ष में अहिंसा विश्व भारती और राष्ट्रिय सैनिक संस्था द्वारा “भारत की आज़ादी में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की भूमिका” विषय पर राष्ट्रिय संगोष्ठी का आयोजन विश्व शांतिदूत आचार्य डॉ लोकेशजी की अध्यक्षता में किया गया।

संगोष्ठी में भारत के राष्ट्रपति के मिलिट्री सचिव रहे लेफ्टिनेंट जनरल अश्वनी बक्शी, एयर डिफेन्स कोलेज के पूर्व कमानडेंट मेजर जनरल पीके सहगल, देश की तीन यूनिवर्सिटी के पूर्व वाईस चान्सलर मेजर जनरल रंजित सिंह, नेवल आर्मामेंट के महानिदेशक रियर एडमिरल सनातन कुलश्रेष्ठ, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के राष्ट्रिय अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के स्वाधीनता में योगदान के ऊपर अपने विचार रखे।

सुभाष चन्द्र बोस

आज़ादी के समय सुभाष चन्द्र बोस होते तो देश का बंटवारा नहीं होता – आचार्य लोकेशजी

इस अवसर पर अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ लोकेशजी ने कहा कि भारत के इतिहास में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का स्वतंत्रता संघर्ष के लिये दिया गया महान योगदान अविस्मरणीय हैं। वो वास्तव में भारत के एक सच्चे बहादुर हीरो थे जिसने अपनी मातृभूमि की खातिर अपना घर और आराम त्याग दिया था। भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिये उन्होंने अपनी “आजाद हिन्द फौज” को तैयार किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के समय नेताजी होते तो देश का बंटवारा नहीं होता।

1947 में जो आजादी मिली वह मुख्यत नेताजी के कारण मिली : ले.ज.अश्विनी कुमार बक्शी

लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार बक्शी ने कहा कि नेताजी भारत के एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बहुत संघर्ष किया और एक बड़ी भारतीय आबादी को स्वतंत्रता संघर्ष के लिये प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि अपने राष्ट्रवादी क्रियाकलापों के लिये नेताजी को कई बार जेल जाना पड़ा लेकिन वो इससे न कभी थके और ना ही निराश हुए। 1947 में जो भी आजादी मिली वह मुख्यत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के कारण मिली।

सुभाष चन्द्र बोस

मेजर जनरल पी के सहगल ने कहा कि आज देश के युवा को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जज्बे को देखते हुए सीख लेनी चाहिए जिससे देश विरोधी तत्वों एवं विदेशी ताकतों की बुरी मनसा को नियंत्रित एवं नष्ट किया जा सकता है। नेताजी के क्रियाकलाप देश के युवाओं को भारतीय सेनाओं में जाकर देश सेवा के लिए प्रेरित करते है।

सुभाष चन्द्र बोस
मेजर जनरल रंजीत सिंह ने बताया कि ब्रिटिश पार्लियामेंट के अनुसार अँग्रेजी हुकूमत को जून 1948 में भारत छोडने के आदेश थे लेकिन अंग्रेज़ो में नेता जी का डर इस कदर था की अगस्त 1947 में ही उन्होंने ट्रांसफर ऑफ पॉवर कर दिया क्योंकि वो जानते थे की नेताजी प्लेन क्रेश में नहीं मरे थे।

मेजर जनरल एस पी सिन्हा ने कहा कि एशिया के विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीयों का सम्मेलन कर उसमें अस्थायी स्वतंत्र भारत सरकार की स्थापना कर नेताजी ने आजादी प्राप्त करने के संकल्प को साकार किया। अपनी मातृभूमि के लिए ऐसी राष्ट्रभक्ति एवं साहस वाले व्यक्ति कई शताब्दियों में जन्म लेते है।

रियर एड्मिरल सनातन कुलश्रेष्ठ ने कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अभी भी एक जीवंत प्रेरणा के रूप में भारतीय लोगों के दिल में अपने जीवंत राष्ट्रवाद के साथ जीवित है। इस तरह के आयोजनों द्वारा देश भर के नौजवानों एवं नई पीढ़ी को भी नेताजी के राष्ट्रवादी क्रियाकलापों की जानकारी मिलती है जो युवाओं में जोश एवं देशभक्ति को उजागर करता है।

राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने कहा कि अविभाजित भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे, क्योंकि 21 अक्टूबर 1943 को उन्होंने आज़ाद हिन्द सरकार के गठन की घोषणा भी की थी जिसे 10 दिन में 11 देशों ने मान्यता भी दे दी थी जिनमे रूस और जर्मनी शामिल थे I भारत ने भी मान्यता दे दी होती तो भारत तभी आज़ाद हो गया होता।

एन सी सी अलुमनी क्लब ऑफ दिल्ली से श्री कर्ण कपूर ने कहा कि देश के प्रत्येक युवा के लिए सेना प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए जिससे लोगो में देशभक्ति के साथ आत्मनिर्भरता भी उत्पन्न होगी।

अमेरिका के श्री सावन शाह को विश्व शांति केंद्र के निर्माण हेतु विशिष्ट योगदान के लिए और पांच साल की मासूम धनिष्ठा के माता-पिता को अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया। 20 माह की बच्ची धनिष्ठा के ब्रेन डेड होने की वजह से मृत्यु हो गई थी, इसके पश्चात धनिष्ठा के माता-पिता ने इसके अंगो का सर गंगा राम अस्पताल में दान किया जिससे पांच व्यक्तियों की जान बची। ये सम्मान नेताजी को सेल्यूट करने के लिए दिए गये ।

सुभाष चन्द्र बोस

इस अवसर पर, एनसीसी कैडेटों द्वारा सभी अतिथियों को सम्मानपूर्वक निर्धारित स्थान पर पहुंचाकर कार्यक्रम का प्रारम्भ राष्ट्रगान के साथ हुआ, कोरोना के सरकारी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम सीमित संख्या में किया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन एन सी सी अलुमनी क्लब ऑफ दिल्ली के कर्ण कपूर द्वारा दिया गया।

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Source : Press Release

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Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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January 17, 2021 5 min read
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