कुम्भ मेला 2019 : पौष पूर्णिमा पर संगम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
प्रयाग कुंभ का दूसरा प्रमुख स्नान पौष पूर्णिमा के दिन यानी 21 जनवरी को होगा. भारतीय पंचांग के पौष मास के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि को पौष पूर्णिमा कहते हैं. पूर्णिमा को ही पूर्ण चन्द्र निकलता है. कुंभ मेला की अनौपचारिक शुरूआत इसी दिन से मानी जाती है, क्योंकि पौष पूर्णिमा के साथ ही कुंभ में कल्पवास भी शुरू हो जाएगा.
सवा करोड़ श्रद्धालु करेंगे स्नान
पौष पूर्णिमा के अवसर पर प्रशासन के मुताबिक सवा करोड़ श्रद्धालु स्नान करेंगे. आज सुबह से ही मेला क्षेत्र में वाहनों की इंट्री बंद कर दी गई है. साथ ही मेला क्षेत्र में धारा 144 भी लागू कर दी गई है. पूर्णिमा स्नान पर नो इंट्री में कल्पवासियों के वाहनों को नहीं रोका जाएगा. इसके अलावा प्रशासन ने संतों, कल्पवासियों और स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं. पौष पूर्णिमा पर होने वाली भीड़ को देखते हुए यूपी बोर्ड, सीबीएसई और सीआईएससीई के सभी स्कूल-कॉलेज 21 जनवरी को बंद रहेंगे.
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पौष पूर्णिमा का महत्व
पूर्णिमा यानि पूर्णो मा:. मास का अर्थ होता है चंद्र. अर्थात जिस दिन चंद्रमा का आकार पूर्ण होता है उस दिन को पूर्णिमा कहा जाता है. और जिस दिन चांद आसमान में बिल्कुल दिखाई न दे वह स्याह रात अमावस्या की होती है. हर माह की पूर्णिमा पर कोई न कोई त्यौहार अवश्य होता है. लेकिन पौष और माघ माह की पूर्णिमा का अत्यधिक महत्व माना गया है,
पौष माह की पूर्णिमा को मोक्ष की कामना रखने वाले बहुत ही शुभ मानते हैं. क्योंकि इसके बाद माघ महीने की शुरुआत होती है. माघ महीने में किए जाने वाले स्नान की शुरुआत भी पौष पूर्णिमा से ही हो जाती है. मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन विधिपूर्वक प्रात:काल स्नान करता है वह मोक्ष का अधिकारी होता है. उसे जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाता है अर्थात उसकी मुक्ति हो जाती है. चूंकि माघ माह को बहुत ही शुभ व इसके प्रत्येक दिन को मंगलकारी माना जाता है इसलिए इस दिन जो भी कार्य आरंभ किया जाता है उसे फलदायी माना जाता है. इस दिन स्नान के पश्चात क्षमता अनुसार दान करने का भी महत्व है.
इस दिन के त्यौहार
पौष पूर्णिमा के दिन ही शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है. जैन धर्म के मानने वाले पुष्याभिषेक यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन करते हैं. वहीं छत्तीसगढ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासी इसी दिन छेरता पर्व भी मनाते हैं.
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कल्पवास का आरंभ
पौष पूर्णिमा से ही एक महीने के कल्पवास का भी आरंभ हो जाता है। कल्पवास का मतलब है किसी नदी या जल स्रोत के तट पर रहते हुए वेदाध्ययन और ध्यान करना. कल्पवास आरंभ पौष माह के 11वें दिन यानि एकादशी से माघ माह के 12वें दिन तक चलता है.वैसे कुछ लोग मकर संक्रांति से भी कल्पवास शुरू कर देते हैं. मान्यता है कि कल्पवास मनुष्य के लिए आध्यात्मिक विकास का माध्यम है और संगम पर पूरे माघ माह निवास करने से पुण्य फल प्राप्त होता है.
पौष पूर्णिमा तिथि व मुहूर्त
वर्ष 2019 में पौष पूर्णिमा व्रत 21 जनवरी को है. पवित्र माह माघ का स्वागत करने वाली इस मोक्षदायिनी पूर्णिमा पर प्रभु भक्ति व स्नान ध्यान, दानादि से पुण्य मिलता है.
पूर्णिमा तिथि आरंभ – 14:19 बजे से ( 20 जनवरी 2019 )
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 10:46 बजे (21 जनवरी 2019 )
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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