ऋषिकेश के परमार्थ गंगा तट पर “राष्ट्रीय कवि संगम”

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ऋषिकेश के परमार्थ गंगा तट पर “राष्ट्रीय कवि संगम”

  • परमार्थ गंगा तट पर राष्ट्रीय कवि संगम, कवि हृदय गंगा तट पर काव्यपाठ कर हुआ गदगद
  • कविता के रस में डूबे देशी-विदेशी पर्यटक
  • कवियों ने अगाध श्रद्धा से की गंगा आरती
  • कवियों ने किया संकल्प देश भक्ति से युक्त कविता के साथ अब जल, जंगल, जमीन, पेड़, पर्यावरण और पहाड़ के संरक्षण हेतु भी किया जायेगा काव्यपाठ
  • सोच बदलती है तो सृष्टि बदलती है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
  • वृक्षारोपण करने के पश्चात ही कवि सम्मेलन का आरम्भ करे- इन्द्रेश कुमार

ऋषिकेश, 29 जून। परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के दूसरे दिन ’राष्ट्रीय कवि संगम’ का संरक्षक, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को नियुक्त किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि संगम श्री जगदीश मित्तल जी ने इसकी घोषणा करते हुये कहा कि कवि संगम देश के 30 प्रांतों के 5000 से भी अधिक कवियों का यह संगठन है जिनका धर्म और मूल मंत्र है राष्ट्र जागरण। साथ ही उन्होने यह भी घोषणा की कि वर्ष में एक बार परमार्थ निकेतन माँ गंगा के तट पर कवि संगम का आयोजन किया जायेगा।
राष्ट्रीय कवि संगम विगत 13 वर्षो से कविताओं के माध्यम से राष्ट्र जागरण का कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय कवि संगम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की चतुर्थ बैठक में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और श्री इन्द्रेश कुमार जी के पावन सान्निध्य में आज छंद विन्यास कार्यशाला, विद्यालयों मंे कविता पाठ द्वारा राष्ट्र जागरण, दिनकर जयंती, दस्तक युवा पीढ़ी का आयोजन पर विचार विमर्श किया गया। साथ ही सांयकाल विख्यात कवियों द्वारा काव्यपाठ किया गया।


वरिष्ठ ओज कवि डाॅ हरिओम पवाॅर जी ने राष्ट्र, भगवान श्री राम, देश भक्ति, देश के रक्षक सैनिक आदि अनेक देशभक्ति के विषयों पर कविता पाठ किया जिसे सुनकर गंगा तट तालियों की गड़गड़ाहट से गूजंने लगा।

राष्ट्रीय संरक्षक श्री इन्द्रेश कुमार जी ने अखण्ड भारत को बनाये रखने का संकल्प कराया। उन्होने कहा कि हमारे देश में दूसरों का मैला उठाने वाले भाई-बहनों को नीच कहा जाता है बल्कि समाज की गंदगी साफ करने वाली माताओं को समाज माता कहना चाहिये। उन्होने कहा कि परमार्थ निकेतन में देश के विभिन्न प्रातों से अनेक कवि काव्यपाठ के लिये आये हैं, अब वे स्वामी जी द्वारा भेंट स्वरूप दिये रूद्राक्ष के पौधों के साथ ही यह संकल्प भी लेकर जायें कि जहां भी जायें कविता पाठ से पहले पौधा रोपण अवश्य करेंगे। अब वृक्षारोपण करने के पश्चात ही कवि सम्मेलन का आरम्भ करें या कवि सम्मेलन का शुभारम्भ ही वृक्षारोपण से होगा। साथ ही कवि सम्मेलन के पहले दो दिव्यांगांे और समाज सेवियों के सम्मान का संकल्प भी कराया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि अब भारत में पर्यावरण हितैषी हरित काव्य पाठ मिशन की शुरूआत करने की जरूरत है। यह सारी बात हमारी सोच की है और सोच एक बीज है, सोच बदलती है तो सृष्टि बदलती है; सोच बदली है तो दिल बदलते हैं और दिल बदलते हैं तो हमारे भीतर की नहीं बल्कि बाहर की दुनिया भी बदलती है, हमारे कर्म बदलते है और इससे किसी का दिल बदलता है तो किसी का दिन बदलता है और किसी का पूरा जीवन ही बदल जाता है। हमारी सोच ही कर्मो में परिवर्तित होती है और वैसी ही हमारी सृष्टि का निर्माण करती है।

स्वामी जी ने कहा कि भारत में शान्ति, प्रसनन्ता और समृद्धि लाने के लिये जल का संरक्षण नितांत आवश्यक है। जल संसाधनों के विकास, नियोजन, संवर्द्धन हेतु देश के हर व्यक्ति को आगे आना होगा तभी भावी पीढ़ियों के लिये हम जल को बचा सकते है। स्वामी जी ने कहा कि मुझे तो लगता है अब हमारे हर कार्य की शुरूआत ही हरित होना चाहिये और हमारा धर्म स्वच्छ पर्यावरण का सजृन करना। अब हमारे सम्मेलनों और कार्यक्रमों का आयोजन वातानुकूलित कमरों में बैठकर नहीं बल्कि नदियों के तटों पर होना चाहिये ताकि जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दूर तक पहुंच सके।

स्वामी जी महाराज ने कहा कि आज हम हिमालय की गोद में बसे ऋषिकेश में काव्यपाठ कर रहे है तो यहां से पूरे विश्व को हिमालय पारिस्थितिकी तंत्र को बनायें रखने का संदेश जाये। उन्होने काव्य के मंच पर पेरिस समझौते कि रिपोर्ट पर चर्चा करते हुये कहा कि कार्बन डाई आक्साइड उत्र्सजन में कटौती करने के बावजूद वर्ष 2050 तक पृथ्वी का तापमान अत्यधिक बढ़ जायेगा और इसके लिये काफी हद तक एकल उपयोग प्लास्टिक जिम्मेदार है। अब तो समय ऐसा आ गया है कि हमारा खाना, पीना, पहनना और अन्य सभी कार्य पर्यावरण हितैषी हो तभी हम पृथ्वी पर स्वस्थ जीवन की कल्पना कर सकते है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम के मंच का एक-एक कवि अपने आप में पूरा भारत होकर जीता है। हर कवि केे अन्दर देश भक्ति के अंगारे धधक रहे है वैसी ही थोड़ी सी आग सभी के अन्दर चाहिये बस हो गया फिर परिवर्तन और आज समाज को इसी की आवश्यकता भी है। उन्होने कहा कि कवियों के भीतर की गर्मी, धरती की गर्मी को दूर कर सकती है और शीतलता प्रदान कर सकती है।
राष्ट्रीय कवि संगम का उद्घोष वाक्य ’’राष्ट्र जागरण-हमारा धर्म’’ पर देश के प्रसिद्ध कवियों यथा श्री हरिओम पवांर जी, श्री बाबा सत्यनारायण मौर्य जी श्री सुदीप भोला जी, श्री कांत शर्मा जी, श्री सुमीत ओरछा जी की कविताओं और शायरियांे ने गंगा तट को देश भक्ति और राष्ट्र भावना से ओतप्रोत कर दिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कवियों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया तथा सभी कवियों ने विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति के लिये विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। स्वामी जी महाराज ने जल, जंगल, जमीन, पेड़, पर्यावरण और पहाड़ के संरक्षण हेतु कविता लेखन और पाठ करने का संकल्प कराया।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, राष्ट्रीय संरक्षक श्री इन्द्रेश कुमार जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि संगम श्री जगदीश मित्तल जी, संरक्षक श्री हरिओम पवांर जी, संरक्षक श्री बाबा सत्यनारायण जी, राष्ट्रीय महामंत्री श्री अशोक बत्रा जी, प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक गोयल जी, श्री आलोक कुमार जी, संस्थापक ट्रष्टी श्री अरूण कुमार गोयल जी, राष्ट्रीय मंत्री श्री कमलेश मौर्य जी, श्री योगेन्द्र शर्मा जी, श्री पुष्पक ज्योति जी और कई विख्यात कवियों ने सहभाग किया। सभी ने माँ गंगा की दिव्य आरती में सहभाग किया।

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