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कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन

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कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन

 कांचीपुरम, 28 फ़रवरी;  कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को निधन हो गया.  वह 82 साल के थे. जयेन्द्र सरस्वती को सांस लेने में आ रही दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था, इसी दौरान उनका देहांत हुआ. इससे पहले भी उन्हें कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था.

कांची मठ तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थापित है. यह पांच पंचभूतस्थलों में से एक है. यहां के मठाधीश्वर को शंकराचार्य कहते हैं. यह दक्षिण भारत के महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है. उन्हें 1994 में कांची मठ का प्रमुख बनाया गया था.

18 जुलाई 1935 को जन्मे जयेन्द्र सरस्वती कांची मठ के 69वें शंकराचार्य थे. वह 1954 में शंकराचार्य बने थे. कांची मठ के द्वारा कई सारे स्कूल, आंखों के अस्पताल चलाए जाते हैं. बीजेपी नेता राम माधव ने जयेन्द्र सरस्वती के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि वह सुधारवादी संत थे, उन्होंने समाज के लिए काफी काम किए.

समाजसेवा के क्षेत्र में कांची पीठ बहुत ही सक्रिय है। धार्मिक संस्थान, शिक्षा संस्थान, अस्पताल, वृद्धाश्रम और विश्वविद्यालय चलाकर पीठ समाज से सीधा जुड़ा रहा. पीठ के शंकराचार्य के पद पर आसीन होने से पहले उनका मां पिता द्वारा दिया गया नाम सुब्रहमण्यम था. वेदों का प्रकाण्ड ज्ञाता थे जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज. साल 2003 में उन्हें कांची पीठ के शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए पचास वर्ष संपन्न हुए थे.

कौन थे शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती

काँची कामकोटी पीठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का इस पद पर आसीन होने से पहले का नाम सुब्रहमण्यम था. उन्हें वेदों के ज्ञाता माना जाता है और जून 2003 में उन्हें काँची पीठ के शंकराचार्य के पद पर आसीन हुए पचास वर्ष हो गए. उस मौक़े पर तब भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वहाँ एक भव्य समारोह में भाग लिया और अपने संबोधन में अयोध्या मसले के समाधान के लिए शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की सराहना की थी.

शंकराचार्य ने अयोध्या और कुछ अन्य विवादास्पद मसलों पर विभिन्न पक्षों से बातचीत करने की पहल तो की लेकिन जहाँ ऐसा करने के लिए वाजपेयी ने उनकी सराहना की वहीं कई हल्कों में उनकी कड़ी आलोचना भी हुई. वाजेपयी ने तो तब यहाँ तक कहा था कि शंकराचार्य ने अन्य धर्मों के लोगों का विश्वास जीता है. 1983 में जयेंद्र सरस्वती ने शंकर विजयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया.

जयेंद्र सरस्वती पर वर्ष 2004 में कांचीपुरम मंदिर के एक कर्मचारी की हत्या के मामले में आरोपित किया गया था, लेकिन नौ साल बाद उन्हें तथा अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था.

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February 28, 2018 3 min read
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